जनादेश

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नर्मदा घाटी में डूब रहें हैं गांव

 बड़वानी .नर्मदा घाटी में जल स्तर प्रति सेकंड बढ़ रहा है. आज दोपहर 2 बजे पानी का स्तर 137.10 मीटर तक था . कई गांव पूर्ण रूप से डूब चुके हैं, कुछ टापू बन गए तो कुछ गांवों में पानी अंदर घुसना शुरू हो चुका है. अब पानी बांध की पूर्ण ऊंचाई तक पहुंचने लगा है तो सरकार द्वारा किये गए सर्वेक्षण में हुई धांधली स्पष्ट हो रही है क्योंकि पानी उन गांव तक भी पहुंच रहा है जिन्हें सरकार ने डूब से बाहर बताया. 9 सितंबर 2019 को नर्मदा बचाओ आंदोलन और मध्यप्रदेश शासन के बीच हुई पूरे दिन की बैठक में पुनर्वास संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा हुई और सरदार सरोवर बांध प्रभावित सभी लोगों को तत्काल पुनर्वास का आश्वासन दिया गया. 

आज धरातल की स्थिति भयावह और दर्दनाक है. गाँव, घर, सामान, फसले, मवेशी तो डूब में हैं ही लेकिन नर्मदा का पानी गांवों में घुसने से बोई हुई फसलें भी सड़नी शुरू हो रही हैं जिससे रुका हुआ पानी महामारी फैला रहा है. पीने का पानी नही है और न बिजली है और लोग टापुओं में फसे हुए हैं. ऐसे ही कुछ गांव की स्थिति इस प्रकार है.

कुक्षी तहसील के कटनेरा गांव को 2000 में हुए सर्वेक्षण में शामिल किया गया जिसे 2005 में हुए सर्वेक्षण में डूब से बाहर कर दिया गया. आज स्थिति यह है कि कटनेरा गांव के लोगों की ज़मीन टापू बन चुकी है और खेतों तक जाने का हर रास्ता डूब चुका है. गांव में जितने भी मवेशी हैं उनके लिए 10 दिनों से के चारा खाने की व्यवस्था नहीं है.  गांव की बिजली काट दी गयी है और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पानी के कुवें और नालो में गंदा पानी आ गया है जिससे पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. गांव के लोगों ने कई अधिकारियों से बात करने की कोशिश की लेकिन कोइ भी गांव में आने को तैयार नही है. ऐसी स्थिति पैदा होने पर गांव के लोगो ने तय करके खंडवा बड़ोदा स्टेट हाईवे पर आज चक्का जाम किया. इसमें चिखलदा, भवरिया, रसवा, रेखटी, कढ़माल, निसरपुर, भिलसुर,खराजना, मलवाड़ी, मुलकड गांव के लोगों के साथ - साथ मवेशी और बैल गाड़ी भी थे. 2 घंटे तक धरना चलने के बाद SDM कुक्षी धरना स्थल पर पहुँचे और कटनेरा के लोगों की समस्या सुनकर गांव का दौरा किया. साथ ही खेतों तक जाने वाले रास्ते जो डूब गए उनका भी दौरा किया. दौरे के बाद SDM कुक्षी ने लोगो को पीने के पानी की समस्या को हल करने हेतु पानी के टैंकर जल्द से जल्द भिजवाने का वादा किया और बाकी सभी समस्याओं पर जल्द कार्यवाही करने का आश्वासन दिया. 

राजघाट गांव नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ एक धार्मिक महत्व का गांव है. 10 से ज़्यादा मंदिर डूब चुके है . राजघाट गांव 133 मीटर में टापू बन गया था. 10 सितंबर को एस.डी.एम पूरी पुलिस की टीम, पटवारियों की टीम और एन.डी.आर.एफ की टीम के साथ नाव से राजघाट पहुँची और सभी परिवारों को घर खाली करने के लिए कहा जिससे कि लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित जगह पर पहुँचाया जा सके. मौके पर न.ब.आ के कार्यकर्ता भी मौजूद थे जिन्होंने इंदौर में हुए आंदोलन और मध्यप्रदेश प्रशासन के बीच हुई बैठक में हुई चर्चा के अनुसार पुलिस प्रसाशन से घर खाली करवाये जा रहे परिवारों का पंचनामा और वीडियो बनाने की बात कही. पुलिस इस बात के लिए तैयार नही थी और इस बात पर गांव के लोगों से लंबी बहस हुई. आखिर में बड़वानी कलेक्टर मौके पर पहुंचे और पुलिस प्रसाशन को पंचनामा बनाने का आदेश दिया. 40 परिवारों के पंचनामा बनते ही घर खाली करने का काम शुरू हुआ और कुछ 7 परिवारों को उनके घर के सामान के साथ स्थानांतरित किया गया. टापू पर फसे हुए परिवारों को और  80 से अधिक मवेशियों को प्रशासन ने टिन शेड में ले जाने का कोई प्रबंध न करते हुए ये ज़िम्मेदारी सिर्फ 2 लोगो को सौंपी जिनसे मवेशी सम्भले नही और उन्होंने लोगों के खेतों में लगी फसल बर्बाद कर दी. मवेशियों को ले जाने में इतनी लापरवाही के कारण आज एक गाय मृत मिली और 18 मवेशी वापस टिन शेड से भाग कर मूल गांव में आ गए. सारा सामान स्थानांतरित होने के बाद अभी भी कुछ 7 से 8 परिवार टापू बनी ज़मीन पर ही रह रहे है .


कल 11 सितंबर को कडमाल गांव के लोग SDM कुक्षी से मिलने आये और पुनर्वास से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर आवेदन दिए. चाहे वो डूब से बाहर किये 13 परिवारों को सर्वेक्षण सूची में शामिल करने का आवेदन हो, 5.80 लाख की अनुदान राशि और घर प्लाट न मिलने वाले लोगों की सूची हो, ऐसे सभी आवेदनों पर SDM कुक्षी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और सभी आवेदनों पर जल्द से जल्द कार्यवाही करने का आश्वासन दिया. साथ ही गांव के लोगो ने जल्द से जल्द  13 परिवार जो अभी भी गांव में हैं उनका जल्द से जल्द पंचनाम बनाने और दूसरी जगह स्थानांतरित करने की बात की. लेकिन अभी तक कोई प्रशासन से पहुंचा नही हैं.

11 सितंबर को SDM कुक्षी ने चिखलदा गाँव मे एक दल सर्वेक्षण करने के लिए भेजा . लेकिन वहां के लोगो का कहना है कि दल के सदस्यों ने लगभग 90 लोगों का ही सर्वेक्षण किया और 100 लोगों का सर्वेक्षण किए बिना ही चले गए. यह बचे हुए लोग दलित और मुसलमान समाज से आते हैं और जिन लोगों का अधिकारी सर्वेक्षण करके गए उनसे निचले स्तर पर रहते हैं. लोगो ने आज भी अधिकारियों का इंतज़ार किया लेकिन कोई सर्वेक्षण के लिए नही आया.

बड़वानी जिले के सेगावा गाँव में चारों तरफ से पानी बढ़ रहा है, जिससे यह गांव टापू बनने वाला है. गाँव में कुल  89 परिवार हैं जिनमें से सिर्फ 24 परिवारों को मुआवजा दिया गया है . इसमें से भी कइयों को घर प्लाट मिलने बांकी हैं तो कइयों को घर का मुआवजा. 


पानी अंदर तक घुसने से गाँव के बीच वाला रास्ता टूट चुका है और लोगों को छोटी नाव में आना -जाना करना पड़ रहा है, यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो छोटी नावें भी नहीं चल पाएंगी. 

बिजली और पानी के कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके है. गांव वालों को घर प्लाट और मुआवजा नहीं मिलने की वजह से वे डूब में रहने को मजबूर हैं. कभी भी घर की दीवारें टूट सकती हैं और लोगों तथा मवेशियों की जानें जा सकती हैं. 

प्रशासन के अधिकारी घर खाली करवाने तो आ रहे हैं परंतु इनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. पानी का स्तर कम नहीं हुआ तो चारों तरफ से रास्ते बंद हो जाएंगे और गांव वालों को बाहर निकलने का रास्ता भी नही मिल पायेगा. जिले के एकलवारा गाँव में 150 घर डूब चुके हैं जिनमें से 20 परिवारों को उनके लाभ मिलने बांकी हैं. ये 20 परिवार 10*12 के टीन शेड में मजबूरन गए हैं . इसमें से कई संयुक्त परिवार हैं तो बहुत से परिवारों के मवेशी भी साथ में हैं.


एकलवारा के 180 परिवार ऐसे हैं जिनको डूब से बाहर बताया गया था. आज इनके घरों तक पानी आ चुका है . इनका न तो सर्वे हुआ है, ना इनको मुआवजा मिला है और न ही कोई अन्य लाभ क्योंकि सरकार का कहना था कि यहां तक पानी नहीं आएगा. 

पर आज जब डूब इनकी देहलीज तक पहुच चुकी है तो ये अपने घरों के मुआवजे और अन्य लाभों की मांग कर रहै हैं. पानी के साथ साथ भूकंप के झटके भी दिन रात इस गांव में आ रहे है. गांव वालों पर दो धारी तलवार लटकी हुई है. बड़वानी में सेसमिसिटी मीटर्स होने के बावजूब भी प्रशासन का इस मुद्दे पर कुछ कहना नही हैं.ऐसे में अब मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पंचनामे भरवाकर लोगों से गांव खाली करने को कहा जा रहा है.

जांगरवा, खेड़ा और धरमराय में कुछ साल पहले ही बनाये गए पुल 137 मीटर पानी के लेवल पर डूब गए है जिससे पता चलता है कि सरकार ने सरदार सरोवर बांध प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया पर काम  कितनी लापरवाही से किया है. सरकार ने आज तक पानी के सही लेवल को भी  नहीं मापा  है. लोगों के घर, खेत, मवेशी, जंगल सब डूब रहे हैं लेकिन गुजरात और केंद्र सरकार फिर भी हकीकत से अपना मुह फेर अपनी ज़िद पर अड़े हैं, एक पूरी मानव संस्कृति को उजाड़ने में. ऐसी स्थिति में, जब सरकार की लापरवाही का भुगतान लाखो लोगों की डूब से हो रहा है, हम नर्मदा घाटी के लोग आज भी यही मांग करते हैं कि केंद्र सरकार सरदार सरोवर बांध के सारे गेट खोल  दे जब तक पूर्ण पुनर्वास नही होता.


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