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एक विद्रोही का सफ़र यूं खत्म हुआ !

विभव देव शुक्ला

"जब शराब कमज़ोरी हो और लोग तस्करों का वकील कहते हों तब वकालत कितनी मुश्किल होती है".किस्तान का छोटा सा शहर है शिकारपुर, इस शहर के छोटे से विद्यालय में एक छोटा सा कार्यक्रम था. अलग - अलग जगहों से शिक्षक भी आए हुए थे, बच्चों के लिए चहेता माहौल बना हुआ था. तभी एक शिक्षक ने तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे को मंच पर भेजा और बाकी शिक्षकों से कहा कि 'इस बच्चे से मुगलों के इतिहास के बारे में कुछ भी पूछ लीजिये'.चुनौती इतनी दमदार थी कि तुरंत सवाल जवाब का दौर शुरू हुआ. हर सवाल का जवाब आया, भले सटीक नहीं आया लेकिन जवाब में कोई खास गलती भी न थी. जवाबों की सीरत देख कर मौजूद सभी लोगों को समझ आ गया कि यह बच्चा लंबी पारी खेलने वाला है. जवाबों की ऐसी सूरत वाले शख्स को दुनिया 'राम जेठमलानी' नाम से पहचानती है.

जेठमलानी लंबे समय से बीमार चल रहे थे, 8 सितंबर की सुबह उनका निधन हो गया. लेकिन हर मुकदमे की पैरवी के दौरान उनकी ज़ुबान से उतरी दलीलें शायद ही कोई भूल पाए. आलम कुछ ऐसा था कि जेठमलानी अक्सर सर्वोच्च न्यायालय के वकीलों को कह देते थे 'तुम्हारी उम्र से अधिक मेरा अनुभव है'.इस बात में वज़न की कोई कमी भी नहीं थी क्योंकि जेठमलानी का अनुभव 76 साल का था जबकि सर्वोच्च न्यायालय के वकील की अधिकतम आयुसीमा 65 वर्ष होती है. जिस वजह से जेठमलानी देश के सबसे दिग्गज तजुर्बे वाले वकील माने जाते हैं.


जेठमलानी हमेशा से पढ़ने में बहुत अच्छे थे, महज़ 13 साल की उम्र में दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की. इतना ही नहीं 17 साल की उम्र में वकील भी बन गए जबकि भारत में मुकदमा लड़ने की आधिकारिक उम्र 21 साल है. लेकिन जेठमलानी की अभिरुचि को देखते हुए उनके लिए विशेष प्रावधान किया गया. जिसके बाद वह भारत के इकलौते ऐसे व्यक्ति बने जिसने महज़ 18 साल की उम्र में पहला मुकदमा लड़ा.

जेठमलानी ने अपनी ज़िंदगी के लगभग 76 साल वकालत को दिए और इस दौरान देश के कई बड़े मामलों की पैरवी की. जिसमें से तमाम मामलों के लिए उनकी आलोचना भी हुई है, जेठमलानी का नाम सबसे पहली बार लोगों की ज़ुबान पर तब आया जब उन्होंने नानावटी का मुकदमा लड़ा.

एक ऐसा सेना का अधिकारी जिसने अपनी पत्नी के प्रेमी को गोली मार दी थी. नानावटी ने अपराध स्वीकार लिया था जिसके बाद उन्हें 3 साल तक जेल में भी रहना पड़ा. लेकिन आखिरकार जेठमलानी ने नानावटी का मुकदमा लड़ा और उन्हें जीत दिलाई.


जेठमलानी को तस्करों का वकील भी कहा जाता है इसकी सबसे बड़ी वजह रही अंडरवर्ड डॉन हाजी मस्तान का मुकदमा लड़ना. जिस मामले में जेठमलानी ने हाजी मस्तान की वकालत की उसमें हाजी मस्तान पर तस्करी का मामला दर्ज था. इसके बाद जेठमलानी ने राजीव गांधी के हत्यारों का मुकदमा लड़ा और हत्या के आरोपियों की सज़ा को फांसी से उम्र कैद में तब्दील करवा दिया.

जेठमलानी ने इंदिरा गांधी के हत्यारों की भी पैरवी की, संसद बम धमाकों के आरोपी अफजल गुरु की पैरवी की, जेसिका लाल हत्याकांड के आरोपी की पैरवी की. इसके पीछे जेठमलानी का तर्क भी बेहद दिलचस्प था, वह सुनवाई के आखिरी समय तक कहते रहे कि जेसिका लाल को एक सिक्ख व्यक्ति ने मारा है और मैं जल्द इससे जुड़े अहम सुबूत पेश करूंगा.

जेठमलानी ने भ्रष्टाचार के कई मामलों में तमाम नेताओं की पैरवी की . 2 जी घोटाला मामले में डीएमके नेता करुणानिधि की बेटी कनिमोझी का मुकदमा लड़े. आय से अधिक मामले में जयाललिता और अवैध खनन मामले में येदियुरप्पा का मुकदमा लड़े. इतना ही नहीं सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह की पैरवी की और चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव की भी पैरवी की.

जेठमलानी का राजनीतिक सफर भी बेहद दिलचस्प रहा, साल 1977 में उन्होंने सुनील दत्त के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीते भी लेकिन 1985 में उनसे ही चुनाव हार गए. इसके बाद साल 1988 में सांसद के तौर पर राज्यसभा के सदस्य बने .साल 1996 में बनी 10 दिन की अटल सरकार में जेठमलानी कानून मंत्री बने, यह बात और थी कि उनकी अटल जी से कभी नहीं बनी. इसके उलट आडवाणी से उनकी दोस्ती बहुत अच्छी थी, यह एक बड़ा कारण था जेठमलानी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े. साल 2004 में जेठमलानी ने लखनऊ से अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा.


जेठमलानी अक्सर अपने व्यक्तिगत जीवन को लेकर भी चर्चा में रहते थे. शराब के शौकीन थे और अक्सर कहा करते थे कि औरतें और शराब मेरी दो सबसे बड़ी कमज़ोरी हैं. एक साक्षात्कार में उनकी दो शादियों से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा 'मेरी दो बीवियाँ तुम्हारी एक बीवी से ज़्यादा खुश है'.

आपातकाल के दौरान जेठमलानी को जेल भेज दिया गया था. इस पर पूरे देश के वकीलों में गुस्सा था, नतीजा यह निकल कर आया कि देश के लगभग 300 वकील जेठमलानी का मुकदमा लड़ने के लिए सामने आए किसी साक्षात्कार में उनसे पूछा गया कि आप कब तक वकालत करेंगे, जवाब में जेठमलानी ने कहा 'आप मेरी मरने की तारीख क्यों जानना चाहते हैं'?फोटो -साभार .टिपण्णी प्रजातंत्र से

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