विश्राम नहीं काम करने आया हूं - कलराज

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विश्राम नहीं काम करने आया हूं - कलराज

विनोद  कुमार पाठक

जयपुर. ठंडे प्रदेश हिमाचल से गर्म राजस्थान में आए राज्यपाल कलराज मिश्र ने शपथ लेने के साथ ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं. राजस्थान में विपक्षी दल कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार है और कलराज ने दो टूक कहा है कि मैं यहां विश्राम करने नहीं आया हूं. उनसे पहले प्रदेश के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह का कार्यकाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ सौहार्दपूर्ण रहा था. कलराज मिश्र उत्तर प्रदेश से आते हैं और वो कल्याण सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. वो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री थे, लेकिन 2019 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भारतीय जनता पार्टी में आए 78 वर्षीय कलराज मिश्र का लंबा राजनीतिक करियर रहा है. विधानसभा, राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य रहने के अलावा वो पार्टी में अहम पदों पर रहे हैं. राजस्थान में जिस तरह से अशोक गहलोत और सचिन पायटल गुट में खेमेबाजी चल रही है, उसमें उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है. यही कारण है कि जब वो शपथ लेने के लिए राजधानी जयपुर पहुंचे तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अलावा उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और पूरा कैबिनेट स्वागत के लिए एयरपोर्ट पहुंचा. लेकिन, शपथ लेते ही राज्यपाल कलराज मिश्र ने अपने इरादे जाहिर कर दिए. उन्होंने साफ-साफ कहा कि एक राष्ट्र, एक जन, एक संस्कृति ही मेरी विचारधारा है. मैं राजस्थान में विश्राम करने के लिए नहीं आया हूं. तत्कालीन राज्यपाल कल्याण सिंह की ही राह पर चलते हुए उन्होंने कहा कि महामहिम शब्द काफी भारी-भरकम है और जनता से दूरी बनाता है. इसे बंद करके केवल माननीय शब्द का उपयोग हो. गार्ड ऑफ ऑनर की परिपाटी को भी उन्होंने बंद करने को कहा (कल्याण सिंह ने भी इसे बंद कराया था).

प्रदेश की कांग्रेस सरकार के साथ बैलेंस बनाने के संकेत देते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि अब मैं बिना दल का व्यक्ति हूं. भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनों से इस्तीफा दे दिया है. प्रदेश सरकार से टकराव के कोई हालात नहीं बनेंगे. राजस्थान वीरों और देशभक्तों की भूमि है. इसके विकास में जो भी संभव होगा, करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विकास के लिए पक्ष-विपक्ष को साथ लेकर नई योजनाओं पर काम होगा. गौरतलब है कि हाल में संपन्न बजट सत्र में विपक्षी भाजपा ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया था और सरकार के लिए मुश्किलें पैदा की थीं.

राजस्थान में कांग्रेस को साधारण बहुमत ही मिला है. 200 में से उसके 100 सदस्य हैं, जबकि बसपा के 6 और कुछ निर्दलीय विधायकों का उसे समर्थन हासिल है, लेकिन गठन के समय से सरकार गहलोत और पायलट गुट में बंटी नजर आ रही है. बीच-बीच में सरकार पर संकट मंडराने की खबरें आती रहती हैं. यदि कोई संकट आता है तो राज्यपाल का रोल बढ़ जाएगा. राजनीतिक के तगड़े खिलाड़ी रहे कलराज मिश्र सख्त अंपायर की भूमिका में आ जाएंगे. अब यह देखना होगा कि जादूगर अशोक गहलोत नए राज्यपाल से कैसे तालमेल बिठाकर सरकार को चलाते हैं?

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