जनादेश

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मुंबई के जंगल पर कुल्हाड़ी !

विक्रम सिंह चौहान 

मुंबई .मुंबई में बुलेट ट्रेन के लिए 50 हज़ार मैंग्रोव के पौधें काटने के निर्णय के बाद अब मेट्रो के लिए भी मुम्बई की धड़कन आरे फारेस्ट को काटा जा रहा है. देश में जंगल की कीमत पर विकास किया जा रहा है. मुम्बई का आरे फारेस्ट करीब 76 प्रकार की चिड़िया, 80 प्रकार की तितलियों और 16 प्रकार के जानवरों समेत 0.4 मिलियन पेड़ों का घर है.यहां से बीएमसी 2700 से अधिक पेड़ काटेगी ,मतलब पूरा फारेस्ट नष्ट कर दिया जाएगा.आरे फारेस्ट मुम्बई में बचे कुछ चुनिंदा हरे इलाकों में सबसे महत्वपूर्ण है. इसमें शहर का सबसे ज़्यादा घना हरित इलाका आता है, इसे काटने का मतलब होगा मुंबई में बाढ़ का खतरा बढ़ना.एयरपोर्ट से सटे इलाके में बारिश के समय यह बाढ़ का कारण बन जायेगा.मुम्बई पहले ही बाढ़ की बड़ी तबाही झेल चुका है.भारत में बैठकर अमेज़ॉन की जंगलों की चिंता करने वाले इन जंगलों की कटाई को लेकर मौन है.लेकिन मुंबईकर चुप नहीं है वे अपने जंगल की रक्षा के लिए सड़क पर उतर चुके हैं.बच्चे,बूढ़े,युवा सब ह्यूमन चैन बनाकर इसका विरोध कर रहे हैं.लेकिन दो आदमी इन पेड़ों के कटने के पक्ष में है,मेट्रो के पक्ष में है.पहला आदमी है अमिताभ बच्चन और दूसरा है अक्षय कुमार.अमिताभ कहते हैं ''पेड़ो को काटकर आप घर में पौधे लगाकर पर्यावरण को बचाइए,मैंने अपने बगीचे में पौधे लगाए हैं''..देख लीजिए आपके इस नकली हीरो की सोच.क्या अमिताभ दिनभर अपने बगीचे की हवा,ऑक्सीजन पर जिंदा रहते हैं? मैंने आज तक इस आदमी को कभी किसी मुहिम में अवाम के साथ नहीं देखा.जब भी देखा इसे सत्ता के साथ,सरकार के साथ देखा है.आरे फारेस्ट को बचाने की मुहिम में देश मुंबईकर के साथ है.

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