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वैभव गहलौत ने भी ठोका दावा

विनोद पाठक

जयपुर. राजस्थान की राजनीति इन दिनों क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूम रही है. दरअसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सुपुत्र वैभव गहलोत ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के अध्यक्ष पद पर दावा ठोक दिया है. इस कुर्सी पर पहले से कांग्रेस के दिग्गज जाट नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की नजर थी. चूंकि वैभव को वर्तमान आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी (वे राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष भी हैं) सपोर्ट कर रहे हैं तो अब लड़ाई जोशी बनाम डूडी की हो चली है. वैभव खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन पिता अशोक गहलोत समेत पूरी सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लगी हुई है.

मई में संपन्न लोकसभा चुनाव में वैभव गहलोत ने जोधपुर से चुनाव लड़ा था. उनके पिता ने जमकर प्रचार किया था, लेकिन भाजपा के दिग्गज नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने वैभव को करारी शिकस्त दी थी. वैभव प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव भी हैं. जोधपुर से हार के बाद चर्चा थी कि वैभव क्रिकेट की राजनीति में कदम रख सकते हैं. इसी माह 10 तारीख को उन्होंने राजसमंद जिला क्रिकेट संघ में कोषाध्यक्ष का पद ग्रहण किया और साफ संकेत दिए कि आरसीए अध्यक्ष की कुर्सी पर उनकी नजर है.

डूडी ने भी हाल में क्रिकेट की राजनीति में कदम रखा है. वे नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं. जोशी और उनके बीच मनमुटाव को इस बात से समझा जा सकता है कि जोशी गुट ने उनके निर्वाचन को ही अवैध बताया हुआ है. डूडी भी किसी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. सूत्रों का कहना है कि आरसीए अध्यक्ष पद को लेकर वो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी दो-दो हाथ करने को तैयार हैं. डूडी आरसीए की राजनीति को लेकर कई दिनों तक दिल्ली में डेरा डाल चुके हैं. डूडी ने जोशी को भी बड़ा दिल दिखाने की नसीहत दी थी. डूडी के पक्ष में राज्य की जाट लॉबी सक्रिय बताई जा रही है. वैसे राजस्थान में अशोक गहलोत की छवि एंटी जाट नेता के रूप में प्रचारित की जाती है.

बहरहाल, आरसीए में चुनाव कराना भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. बीसीसीआई ने पहले चुनाव अधिकारी पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी टीएस कृष्णमूर्ति को नियुक्त किया था, लेकिन उन्होंने पद छोड़ दिया. इसके बाद पूर्व आईएएस विनोद जुत्शी को नियुक्त किया गया, जिनका डूडी गुट ने विरोध कर दिया. दरअसल, जुत्शी सीपी जोशी के साथ काम कर चुके हैं. अब जुत्शी ने यह कहकर खुद को आरसीए चुनाव से अलग कर लिया है कि वो इन जिम्मेदारी के योग्य नहीं हैं.

पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी के कारण राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन अक्सर चर्चा में रहता था. मोदी के चलते बीसीसीआई ने आरसीए पर बैन भी लगा रखा था. मोदी के हटने के बाद ही यह बैन हटा और जोशी को अध्यक्ष चुना गया. अब जोशी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और लोढ़ा कमेटी की 70 साल उम्र को लेकर बनाई नीति के कारण वो दोबारा चुनाव लड़ नहीं सकते हैं. इस कारण वो वैभव गहलोत का नाम आगे कर रहे हैं. जोशी ऐसा करके एक तीर से दो निशाने साधना चाहते हैं, एक तो वो अशोक गहलोत को साधेंगे और दूसरा वैभव के बहाने राज्य की क्रिकेट राजनीति पर उनकी पकड़ बरकरार रहेगी. अब देखना यह है कि क्या अशोक गहलोत इस बार पुत्र को विजय दिला पाएंगे या फिर वैभव क्रिकेट के अजित अगरकर साबित होंगे, जिनके नाम शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड दर्ज है.

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