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बिहार में अपराधियों की बहार है

फज़ल इमाम मल्लिक

पटना .बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नसीहत देने में किसी तरह की कोताही नहीं करते. बिहार में शिक्षा की हालत खराब है, अपराधियों की बहार है. आए दिन हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाएं हो रहीं हैं, रोजगार है नहीं, किसान परेशान हैं, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं लेकिन नीतीश कुमार लाल हैं. उन्हें किसी तरह की शर्मिंदगी नहीं. नीतीश कुमार और उनके बयानवीर अब भी लालू यादव के पंद्रह साल की दुहाई दे कर अपनी नाकामियों को छुपाने में लगे हैं. जबकि नीतीश कुमार के दौर में सृजन घोटाला और मोबाइल घोटाला से लेकर मुजफ्फरपुर शेल्टर होम जैसा कांड हुआ है.

लालू यादव के पंद्रह साल की दुहाई देने वाले नीतीश कुमार यह भूल जाते हैं कि बिहार की सत्ता में आए हुए उन्हें भी अब पंद्रह साल हो गए हैं और इन पंद्रह सालों की बात करें तो इतना ही कहा जा सकता है कि सुशासन के पंद्रह साल-बिहार बदहाल. लालू यादव की मदद से बिहार की सत्ता फिर से संभालने के बाद वे रातोंरात पलटी मार कर भाजपा की गोद में जा बैठे. लेकिन एनडीए के साथ उनके खटपट की खबरें अब सतह पर आ गईं हैं. भाजपा ने उनकी घेरेबंदी बुरी तरह कर डाली है और भाजपा का एक बड़ा वर्ग उन पर हमलावर है. नीतीश ने भाजपा नेताओं पर भी हमला किया और राजद पर भी लेकिन उन्हें जवाब भी फौरन मिला. गिरिराज सिंह ने भी नीतीश को जवाब दिया और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी.


भाजपा के हमलों के बीच ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में एनडीए गठबंधन को अटूट बताया. नीतीश कुमार ने कहा है कि गठबंधन मजबूत है और विधानसभा चुनाव में यह साबित हो जाएगा. हालांकि इससे पहले महागठबंधन और एनडीए की परीक्षा अगले महीने होने वाले उपचुनाव में भी ही हो जाएगा. भाजपा के अंदर से उनरे खिलाफ उठने वाली आवाजों पर नीतीश कुमार ने जमकर पलटवार किया है. नीतीश कुमार ने कहा है कि जो भी गठबंधन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं उन्हें विधानसभा चुनाव के बाद सबक मिल जाएगा.


नीतीश कुमार ने कहा है कि घचपच करने वालों का बहुत बुरा हाल होने वाला है. भाजपा के किसी नेता का नाम लिए बगैर नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ लोगों की आदत बेवजह बोलने की होती है. ऐसे नेताओं को यह नहीं पता होता कि चुनाव के समय उनके क्षेत्र में क्या हो रहा है. नीतीश के निशाने पर दरअसल गिरिराज सिंह और संजय पासवान थे. जो लगातार नीतश कुमार पर हमलावर थे. 

नीतीश कुमार ने दावा किया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेगा. भाजपा के बड़बोले नेताओं पर हमला बोलने के साथ नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के नेताओं को भी कम बोलने की नसीहत दी. मजाकिया लहजे में केसी त्यागी का नाम लेते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि आजकल दिल्ली में बैठकर भी सब मुद्दों पर बयान दिया जा रहा है, इससे बचने की जरूरत है. भाजपा एमएलसी संजय पासवान ने नीतीश कुमार को केंद्र की राजनीति में जाने की सलाह दी थी.


फिर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार में एनआरसी लागू किए जाने की मांग रखी थी जिसका भाजपा सांसद राकेश सिन्हा, गोपाल नारायण सिंह और बिहार सरकार के मंत्री विनोद सिंह ने भी समर्थन किया था. भाजपा नेताओं की तरफ से हो रही बयानबाजी पर नीतीश कुमार का सब्र टूट गया और जेडीयू के राज्य परिषद की बैठक में उन्होंने खुले मंच से सबको जमकर खरी-खोटी सुनाई. लेकिन कई बार भाषा की मर्यादा को भी तोड़ा. उन्होंने घचपच ही नहीं विपक्ष की औकात की बात कह कर निहायत ही गैरजिम्मेदार बयान दिया.


जेडीयू राज्य परिषद की बैठक में नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव और राजद के दूसरे बड़े नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई. नीतीश कुमार ने कहा कि आजकल लोग मुझे गालियां देते हैं और इससे मीडिया में उनकी खूब चर्चा होती है. बिहार की जमीन पर जिनका कोई वजूद नहीं है वे मेरा नाम लेकर सियासत कर रहे हैं. लेकिन नीतीश कुमार यह भूल गए कि वे लालू यादव के नाम की सियासत कर ही सत्ता पर बैठे हैं.

नीतीश कुमार ने कहा कि जनसेवा मेरा काम है और इसके अलावा वह अन्य किसी बात पर ध्यान नहीं देते हैं. तेजस्वी का नाम लिए बगैर नीतीश कुमार ने कहा कि लोकसभा चुनाव में उनका क्या हाल हुआ यह सब भूल चुके हैं. महागठबंधन में वापस आने को लेकर चल रही बयानबाजी पर नीतीश ने कहा कि वह सारी बयानबाजी देख रहे हैं. कोई ऑफर दे रहा है तो उसी पार्टी का कोई नेता विरोध में बयान दे रहा है. नीतीश कुमार ने कहा कि फजूल की बातों से मुझे निशाना बनाने की कोशिश की जाती रही है है. लेकिन नीतीश कुमार ने जिस भाषा में अपने सहयोगी दल के साथ-साथ राजद पर वार किया वह चौंकाने वाला रहा. दूसरे दलों की औकात की बात कर वे क्या साबित करना चाह रहे थे. यूं नीतीश कुमार के बयानों पर गिरिराज सिंह ने भी टिप्पणी की और तेजस्वी यादव ने भी. नीतीश कुमार की भाषा को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं. बहरहाल मामला यहीं थमेगा, ऐसा लगता तो नहीं है. लेकिन नीतीश कुमार के औकात वाले बयान पर उनकी आलोचना हो रही है. सियासी गलियारे में इसे नीतीश कुमार की खीझ के तौर पर देखा जा रहा है.  

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