जनादेश

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मुंबई के फेफड़े पर बुलडोजर !

पंकज चतुर्वेदी 

मुंबई में अब बृहन्मुंबई नगर निगम बीएमसीटी ट्री अथॉरिटी ने मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को मेट्रो 3 कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित कार्य शेड के निर्माण के लिए आरे कॉलोनी में करीब 2650 पेड़ों की कटाई और प्रत्यारोपण के लिए अंतिम अनुमति पत्र भी जारी कर दिया और रात में ही प्रशासन भारी मशीनों और पुलिस बल के साथ पहुँच गया . इलाके में मोबाइल जेम्र लगाए गए और सीमेंट पक्का चबूतरों के लिए सैंकड़ों मशीने लगायी गयी-- जाहिर है कि निर्माण कम्पनी को पता था कि निर्णय क्या होगा .

बीती रात मुंबई के हज़ारों लोग वहां पेड़ काटने से रोकने के लिए पहुंचे, निर्मम लाठी चार्ज हुआ . लड़कियों को भी जम कर पीटा गया. कोई दो सौ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया . पेड़ काटने की अत्याधुनिक मशीने लगा कर सारी रात कई सौ पेड़ गिरा भी दिए गए .

इससे पहले शुक्रवार को ही jमुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने फैसले को चुनौती देने वाले शिवसेना पार्षद यशवंत जाधव पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.जाधव खुद बीएमसी के वृक्ष प्राधिकरण के सदस्य हैं। यही नहीं, पीठ ने आरे कॉलोनी को हरित क्षेत्र घोषित करने की मांग वाली एनजीओ 'वनशक्ति' की याचिका भी खारिज कर दी। उसने पर्यावरणविद जोरु बथेना की उस अर्जी को भी ठुकरा दिया, जिसमें आरे कॉलोनी को बाढ़ क्षेत्र घोषित करने के साथ ही पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। याद करें सदी के महा---- कहलाने वाले अमिताभ बच्चन पेड़ काटने का समर्थन करने वाला बयान दे चुके हैं.

मुंबई में मेट्रो की छः लाईनों के ठेके जारी हो चुके हैं .लाइन 3 महत्त्व्पूर्ण इसलिए है क्योंकि यह मुंबई की एक मात्र और पहली भूमिगत मेट्रो लाइन है। 33.5 लंबे इस कॉरिडोर की कल्पना बृहत मुंबई में ट्रैफिक कम करने के लिए की गई है क्योंकि यह कई व्यापारिक जिलों, हवाई अड्डे और शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ेगी.

उत्तर-दक्षिण दिशा में आरे कॉलोनी से कफ परेड तक की यात्रा करने वाली इस लाइन पर 30,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी .3,166 एकड़ में फैली आरे मिल्क कॉलोनी में से महाराष्ट्र सरकार ने 30 हेक्टेयर (74 एकड़) भूमि डिपो निर्माण के लिए महाराष्ट्र सरकार ने दी है। इसमें से डिपो भवन के लिए 25 हेक्टेयर का ही प्रयोग किया जाएगा। यहाँ हज़ारों पेड़ हैं जिन्हें अब मेट्रो के लये कुर्बान किया जा रहा है .

मुंबई मध्यम वर्ग के कुछ लोग मेट्रो कार शेड हेतु पेड़ काटे जाने के विरोध में थे। उन्होंने शेड के लिए 2,298 पेड़ों की कटाई के विरोध में बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की। साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान और हस्ताक्षर अभियान चलाए.इसके बाद कई गैर-सरकारी संगठन उनके साथ हो लिये. नुक्कड़ नाटक और मानव शृंखला जैसे माध्यमों से विरोध किया गया.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने स्थल के यथास्थिति के आदेश दिए. हालाँकि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पीआईएल खारिज करते परियोजना पर से स्थगन हटा दिया। अंततः वृक्ष आयोग ने अगस्त में डिपो हेतु पेड़ काटे जाने की अनुमति दे दी.

जरा देखें - जिस हरियाली को काटने की आदेश कोर्ट ने दिए और कल पूरी आत किस तरह प्रशासन पेड़ कटाई में पूरी ताक़त के साथ लगा रहा . अब अदालतें भी भरोसा खो रही हैं, प्रशासन और कथित विकास के नाम पर ठेकेदारों , अफसरों और नेताओं के गठजोड़ तो जगजाहिर थी ही.


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