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अब भाजपा के निशाने पर नीतीश कुमार हैं

फज़ल इमाम मल्लिक

पटना .पटना में जल जमाव ने एनडीए के घटकों दलों की एकजुटता पर भी पानी फेर दिया है. भाजपा और जदयू में जूतमपैजार चल रहा है. बयानों के तीर दागे जा रहे हैं और बयानों का जवाब बयानों से दिया जा रहा है. सरकार के मुखिया नीतीश कुमार हैं, लेकिन भाजपा भी सरकार में पूरे ठसक के साथ शामिल है. सुशील कुमार मोदी उपमुख्यमंत्री हैं तो कई महत्त्वपूर्ण मंत्रालय भाजपा के पास है. लेकिन जल जमाव से निपटने में नाकाम सरकार ने इसका ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ा. हालांकि पटना की दोनों संसदीय सीट, चार विधानसभा सीट और नगर निगम पर अरसे से भाजपा का कब्जा है. इसलिए तोहमत उस पर भी लग रहे हैं. भाजपा अपनी जिम्मेदारी नीतीश कुमार पर थोप कर अपने को पाक-साफ दिखाने की कोशिश की. दोनों दलों की कड़वाहट सार्वजनिक हुई. आरोप लगे और भाषा की मर्यादा भी टूटी. बयानों का असर पहले रावण दहन के दौरान दिखा. भाजपा ने नीतीश कुमार से दूरी बनाई और इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया तो जदयू ने अगले दिन ही जवाब में भरत मिलाप के कार्यक्रम से भाजपा नेताओं से दूरी बना कर संकेत दे दिया कि रिश्तों की डोर इतनी तन गई है कि टूट भी सकती है.

राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में दशहरा के अवसर पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम सियासत के केंद्र में आ गया. कार्यक्रम में नीतीश कुमार तो शामिल हुए ही. बिहार विधानसभा के स्पीकर विजय कुमार चौधरी व प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष मदन मोहन झा तो शामिल हुए लेकिन राज्यपाल फागू चौहान और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी नहीं पहुंचे. राज्यपाल को इस कार्यक्रम का उद्घाटन करना था. यह दूसरा मौका है जब फागू चौहान ने राज्यपाल कम, भाजपा कार्यकर्ता की तरह व्यवहार ज्यादा किया. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के नाम वाली कुर्सी खाली रही. बाद में मदन मोहन झा उस पर बैठे.


लेकिन सुशील कुमार मोदी ही नहीं कार्यक्रम में बीजेपी की तरफ से किसी भी नेता ने हिस्सा नहीं लिया. मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बगल में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बैठे. जबकि, सामान्‍यत: उनके बगल में उपमुख्‍मंत्री सुशील मोदी बैठते रहे हैं. इसे लेकर सियासत तेज हुई. जदयू ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उसने एतराज जताया तो भाजपा की इस पर सफाई आई. लेकिन सफाई ऐसी जो दमदार नहीं कही जा सकती. इसलिए कार्यक्रम से भाजपा का बॉयकाट करने पर नए सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं. अटकलें लगाई जा रहीं हैं. कयासों का बाजार गर्म है. सरकार बनने और बिगड़ने तक की बात कही जा रही है. क्योंकि यह पहला मौका है जब जब राज्य सरकार में शामिल रहने के बावजूद भाजपा का कोई नेता सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच पर नहीं दिखा.


राज्यपाल का पद दलगत राजनीति से अलग माना जाता है, लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी भी सवाल खड़े कर रही है. क्योंकि उन्हें ही कार्यक्रम का उदघाटन करना था. दशहरा कमेटी के अध्यक्ष कमल नोपनी के मुताबिक हर साल की तरह इस बार भी राज्यपाल समेत सभी मंत्रियों, पटना के सांसदों और विधायकों को निमंत्रण भेजे गए थे. वे क्यों नहीं आए, इस संबंध में वे ही बता सकते हैं. कार्यक्रम का उद्घाटन व रावण दहन मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने किया. हालांकि इसे लेकर भाजपा नेता अब सफाई दे रहे हैं. दीघा से भाजपा विधायक संजीव चौरसिया ने अजब तर्क दिया कि पटना जलजमाव से परेशान है. जल निकासी के कार्य में लगे रहने के कारण उन्‍हें कार्यक्रम में आने में विलंब हो गया. 


एनडीए को एकजुट बताते हुए भाजपा नेता संजय टाइगर ने कहा कि नीतीश कुमार पहुंच गए तो पूरा एनडीए पहुंच गया. वहीं भाजपा सांसद रामकृपाल यादव ने कहा कि दानापुर में बाढ़ आ गई थी. जनता त्राहिमाम कर रही थी. इसी वजह से मैं रावण वध कार्यक्रम में नहीं पहुंच सका. उन्‍होंने यह भी कहा कि बाढ़ की वजह से हमलोगों को न तो दुर्गापूजा सूझ रहा था और न ही दशहरा महोत्‍सव. हालांकि अगले दिन भाजपा नेता भरत मिलाप कार्यक्रम में पहुंचे. उस कार्यक्रम में हिस्सा लेने की वजह से लोगों के साथ दिखावे की राजनीति का कलई भी उतर गया.

जदयू नेता व मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि बीजेपी नेताओं का नहीं आना बड़ा सवाल है. इसका कोई बड़ा कारण होगा. जदयू प्रवक्‍ता राजीव रंजन ने बताया कि उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी पटना में नहीं थे और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस साल दशहरा नहीं मनाने की बात कही थी. उन्‍हें छोड़कर अन्‍य नेताओं को यह बताना चाहिए कि क्‍यों नहीं आए. उन्‍होंने अपने आचारण से लोगों को निराश किया.


पटना में जलजमाव के मुद्दे पर दोनों दल आमने-सामने दिख रहे हैं. मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार इसे प्राकृतिक आपदा बताते रहे हैं तो केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह इसके लिए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी को जिम्‍मेदार बताया था. एनडीए की तरफ से जनता से माफी मांग उन्‍होंने जदयू की जिम्‍मेदारी भी तय कर दी है. भाजपा कोटे के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा कहते हैं कि अफसर तो बात ही नहीं सुनते थे. भाजपा  के हमले पर जदयू ने भी जमकर पलटवार किए. गिरिराज सिंह के तीखे बयानों से आहत जदयू की तरफ से पार्टी महासचिव केसी त्‍यागी ने ऐसे बड़बोले नेताओं पर लगाम लगाने की मांग सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह से की थी.


यों दोनों दलों में बयानों के तीर जलजमाव के पहले से चल रहे हैं. कुछ दिनों पहले एमएलसी संजय पासवान ने कहा था कि नीतीश कुमार को मुख्‍यमंत्री का पद छोड़ केंद्र में अहम जिम्‍मेदारी निभानी चाहिए. उनके बयान पर जदयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. गिरिराज सिंह तो प्रदेश सरकार व नीतीश कुमार पर पहले से ही हमलावर रहे हैं. तकरार बझडा तो कुछ दिनों पहले जदयू राज्य परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने किसी का नाम लिए बगैर बीजेपी के बयानबाज नेताओं पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि बयानबाजी कर गठबंधन को कमजोर नहीं करना चाहिए. 

नीतीश कुमार ने एनडीए को एकजुट बताते हुए कहा था कि जो भी इस एकजुटता के खिलाफ काम करेगा वह आगामी विधानसभा चुनाव के बाद कहीं का नहीं रहेगा. अब रावणन दहन के दौरान यह बड़ी सियासी घटना घटी. कहा जा रहा है नीतीश कुमार इसे लेकर गुस्से में हैं और वे इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि इस पूरे खेल के पीछे किसका खेल है. माना जा रहा है कि इस तरह का खेल अभी कुछ दिन और चलेगा. सियासी गलियारे में बनते-बिगड़ते समीकरण की चर्चा भी है. कई तरह के गठबंधन के कयास लगाए जा रहे हैं. यह टकराव का अंत किस तरह से होगा, फिलहाल इस पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है.


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