जनादेश

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समुद्र तट पर कचरा !

अंबरीश कुमार 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति के शोमैन हैं .वे अपनी हर गतिविधि को एक इवेंट में बदल देते हैं .वे लगातार राजनैतिक संदेश देते रहते हैं .इस उम्र में इतनी उर्जा और नेताओं में तो नहीं दिखती .यह उनकी बड़ी विशेषता है .पर कई बार वे चूक भी जाते हैं .इतिहास की नहीं उनके भूगोल की जानकारी पर सवाल उठ जाता है .खैर इवेंट वाली इस राजनीति में कई बार वे जो करना चाहते हैं वह नहीं हो पाता.सबकुछ उलट पलट भी जाता है .जिसके चलते उनपर लोग नाटक करने का भी आरोप लगा देते हैं .चेन्नई के महाबलीपुरम में भी कुछ ऐसा हुआ जिसे लेकर तरह तरह के सवाल खड़े हो गए .

महाबलीपुरम दक्षिण का बहुत लोकप्रिय पर्यटन स्थल है .चीन के राष्ट्रपति को वहां बुलाने की ऐतिहासिक वजह थी .एक दौर में चीन का समुद्री व्यापार इसी महाबलीपुरम के रास्ते होता था .चेन्नई से कभी पांडिचेरी के रास्ते पर गए हों तो यह बीच में पड़ता है .

और यह  रास्ता पल्लव साम्राज्य के प्राचीन अवशेषों के किनारे से भी जाता है. समुद्र तट से लगे सर्पिल रास्ते से गुजरते हुए पल्लव साम्राज्य का बंदरगाह और द्रविण शैली के मंदिरों की बुनियाद माना जाने वाला महाबलीपुरम यात्रियों के लिए पहला पडाव है. खूबसूरत समुद्री तटों और द्रविण शैली के पुराने मंदिरों का यह अनोखा संगम है. महाबलीपुरम होते हुए पांडिचेरी पहुंचना इतिहास में वापस जाने जैसा है. जहां दो अलग संस्कृतियों को देखा जा सकता है. महाबलीपुरम को यहां मामल्ल्पुरम कहा जाता है. समुद्र तट के किनारे सातवीं शताब्दी के इन मंदिरों को देखकर वास्तुकला व मूर्तिकला के किसी खुले विश्वविद्यालय में पहुंचाने का भ्रम होता है. करीब आठ वर्गमीटर में अलग अलग संकायों की तरह मंदिरों के अवशेष यहां नजर आते हैं. समुद्र तट के किनारे खड़ा तट मंदिर आज भी समुंदरी लहरों और हवाओं का वैसे ही मुकाबला कर रहा है जैसे करीब 13 सौ साल पहले कर रहा था.महाबलीपुरम से करीब पांच किलोमीटर पहले ही विभिन्न पर्यटन एजेंसियों के बीच रिसार्ट की श्रृंखला शुरू हो जाती है. 

ये सभी रिसार्ट बहुत साफ़ सुथरे सुनहरी रेत वाले समुद्र तट पर बने हैं .सबसे पहले पड़ने वाला गोल्डन बीच रिसार्ट तो फिल्म की शूटिंग के लिए मशहूर है .हिंदी फिल्मों की भी शूटिंग इसमें होती रहती है .

गोल्डन बीच रिसार्ट के कुछ दूर आगे से ही महाबलीपुरम के दूसरे समुद्र तट वाले रिसार्ट शुरू हो जाते हैं .इस अंचल को हम करीब चार दशक से देख रहे हैं .यह अपने खूबसूरत समुद्र तटों की वजह से ही जाना भी जाता है .महाबलीपुरम के समुद्र तट पर पहले इतने ज्यादा रिसार्ट नहीं थे .फिशरमैन कोव से लेकर तमिलनाडु पर्यटन विभाग का बीच रिसार्ट ज्यादा बड़ा था .आज भी तमिलनाडु का सरकारी बीच रिसार्ट यानी टीडीडीसी का समुद्र तट काफी दूर तक जाता है .इसकी एक सीमा महाबलीपुरम के मशहूर शोर टेंपल तक जाती है .यह मंदिर बहुत खूबसूरत है पर खंडित है .इसमें कोई पूजा नहीं होती .

पर कला, संस्कृत और प्रकृति का अनोखा संगम यहीं पर देखा जा सकता है. महाबलीपुरम के इन मंदिरों को द्रविण शैली की नीव मन जाता है. इस शैली के दो तरह के स्मारक देखे जा सकते हैं. जिनमें एक तरफ स्तंभ मंडप हैं तो दूसरी तरफ रथ जैसे एकाश्म मंदिर. यहां चट्टानों को तराशकर मंडपों में तब्दील किया गया है. कहा जाता है की कभी यहां समुद्र के किनारे ग्रेनाईट का एक बड़ा पर्वत था. जो एक किलोमीटर लम्बा, अध किलोमीटर चौड़ा और करीब टिस मीटर ऊँचा था इसके दक्षिण में 75 मीटर लम्बा और 14 मीटर ऊँचा एक दूसरा पर्वत था. इन दोनों चट्टानों को काटकर द्रविण शैली के ऐतिहासिक मंदिर की नीवं डाली गई थी. इन मंदिरों में तरह तरह के धार्मिक मिथकों को तराशा गया है.

 मंदिरों के इसी पुराने शहर में प्रधानमंत्री जब रुके और सुबह उन्होंने समुद्र तट पर टहलते हुए कूड़ा करकट उठाकर जब फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की तो चर्चा होने लगी .दरअसल महाबलीपुरम के रिसार्ट के अपने निजी समुद्री तट हैं जो बहुत साफ सुथरे हैं .इनपर आम लोग आ भी नहीं सकते जो कचरा फेंक जायें .दूसरे सभी रिसार्ट के सफाई कर्मचारी साफ़ सफाई का बहुत ध्यान भी रखते हैं .सुबह सुबह ही समुद्र तटों की सफाई की जाती है ताकि सैलानी जब समुद्री तटों पर आये तो उन्हें कोई असुविधा न हो .और सफाई में अमूमन पानी की बोतल या फिर कोल्ड ड्रिंक /बीयर के कैन आदि होते हैं जो कुछ सैलानी देर रात बैठने के बाद समुद्र तट पर डाल जाते हैं .इन्ही को आप कचरा कह सकते हैं .पर जब किसी पांच सितारा रिसार्ट में प्रधानमंत्री खुद रुके हों तो साफ़ सफाई का ज्यादा इंतजाम रखना स्वभाविक है .इसके आलावा सुरक्षा की दृष्टि से भी आसपास का इलाका छान डाला जाता है .यूपी में तो जब मायावती मुख्यमंत्री थी और वे घर से निकलती थी तो उनके रूट की सड़क को फायर ब्रिगेड वाली गाडी से धोया जाता था ताकि धूल न उड़े .कूड़ा करकट का तो सवाल ही नहीं उठता .ऐसे में प्रधानमंत्री समुद्र तट से इतना कूड़ा उठायें यह बात किसी के गले से नीचे आसानी से उतर नहीं पाई .

पर इससे भी बड़ा सवाल प्लास्टिक की वे थैलियां थी जो प्रतिबंधित हैं .क्या प्रधानमंत्री को ऐसी थैली उठाकर फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करना चाहिए थे .इसका क्या सन्देश गया यह उन्हें खुद सोचना चाहिए .यह जरुरी नहीं कि हर गतिविधि को सार्वजनिक इवेंट में बदल दिया जाए इसका नुकसान भी होता है .महाबलीपुरम के समुद्र तट की फोटो आप भी देखें .यह अन्य समुद्र तट से बेहतर है ,आज भी .अगर कूड़ा न डाला जाए तो .


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