जनादेश

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दक्षिणपंथी उग्रवाद के उभार पर जताई चिंता

 फज़ल इमाम मल्लिक 

पटना .बिहार में महागठबंधन को लेकर अटकलें लगाई जाती रहीं हैं. लोकसभा चुनाव के बाद महागठबंधन में शामिल दल अलग-अलग दिखे. यह भी सही है कि लोकसभा चुनाव में भी दल तो मिल गए थे लेकिन दलों के दिल नहीं मिले थे. नतीजा लोकसभा चुनाव में करारी हार मिली. हार की और वजहें भी हो सकतीं हैं लेकिन महागठबंधन की गांठ ढीली होनी भी एक बड़ी वजह रही थी. इसलिए राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर महागठबंधन के कार्यक्रम पर सियासी नजरें भी थें और कैमरे की भी. कौन आरहा है कौन जारहा है इसे लेकर खूब अटकलें लगाईं गईं.

कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने वह कर दिखाया, जो अब तक बिहार में महागठबंधन में शामिल दलों के नेताओं ने नहीं कर दिखाया था. पटना में समाजवादी नेता व चिंतक राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में महागठबंधन की एकजुटता ने सारी अटकलों को एक तरह से विराम लगा दिया है. हालांकि कार्यक्रम से पहले तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रहीं थीं और मीडिया में उसके आने व उसके न आने को लेकर ही कयास लगाए जा रहे थे. तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे थे. लेकिन कार्यक्रम ने सारे सवालों का जवाब जोरदार तरीके से दिया. कांग्रेस, राजद, हम, वीआईपी, रालोसपा के बड़े नेता तो मंच पर मौजूद थे ही, भाकपा, माकपा और भाकपा (माले) ने भी इस समारोह में हिस्सा लेकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का एक खाका तैयार तो कर ही डाला है.

समाजवादी नेता शरद यादव बतौर अभिभावक कार्यक्रम में थे तो तेजस्वी यादव, मदन मोहन झा, जीतनराम मांझी व मुकेश सहनी की मौजूदगी ने महागठबंधन की एकता को नए सूत्र में पिरोया और इसके सूत्रधार रहे उपेंद्र कुशवाहा. कार्यक्रम में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना भी हुई और नीतीश कुमार की सरकार की भी. देश और बिहार में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई गई और देश में दक्षिणपंथी उग्रवाद के उभार पर भी फिक्रमंद दिखे महागठबंधन के नेता.

बिहार में नीतीश कुमार के शासन में हुए सृजन घोटाला, मोबाइल घोटाला, कार्यालय घोटाला, मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड, चमकी बुखार से हुई मौतों का जिक्र करते हुए मॉब लिंचिंग व दंगों से निपटने में सरकार की नाकामी का उल्लेख किया गया. बाढ़ और जल जमाव में सरकार के निकम्मेपन का उल्लेख कर महागठबंधन ने बाकायदा प्रस्ताव पास कर नीतीश कुमार का इस्तीफा मांगा. प्रस्ताव में केंद्र सरकार से भी मांग की गई कि वे देश में बेहतर माहौल बनाए. सार्वजनिक उपक्रमों सहित रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की पुरजोर तरीके से मुखालफत की गई. नीतीश कुमार की आरएसएस नेताओं से गुपचुप मुलाकात का जिक्र भी हुआ और जहानाबाद दंगों का भी. बिहार में दंगों और बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के लिए नीतीश कुमार की नीतियों और भाजपा-आरएसएस से उनकी साझेदारी को जिम्मेदार माना गया. दशहरा के मौके हुए दंगे में भी आरएसएस, बजरंग दल और भाजपा नेताओं का नाम लिया जा रहा है और नीतीश कुमार की पुलिस मूक दर्शक बनी दंगाइयों को उकसाती रही.


कार्यक्रम में यह भी तय हुआ कि अब सड़कों पर उतरा जाए. दस नवंबर को केंद्र व राज्य सरकार की नाकामी और नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन का एलान किया गया. कार्यक्रम में चैनलों पर सरकार और भाजपा के चलाए जा रहे एजंडे पर भी चर्चा हुई और विपक्ष को डरा धमका कर चुप कराने पर चिंता जताई गई. उपेंद्र कुशवाहा ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अब तो हालत यह हो गई है कि कोई अगर सवाल करता है तो उसे देशद्रोही करार कर दिया जाता है. यह गंभीर मुद्दा है.

हाल के दिनों में महागठबंधन की टूट की खबरें लगातार उछाली जा रही थी लेकिन 12 अक्तूबर को बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में महागठबंधन की एकता दिखी. वाम दलों के साथ आने से महागठबंधन को और मजबूती मिली. कार्यक्रम में महागठबंधन के घटक दल के सभी नेता व वाम दलों के नेता एक साथ एक मंच पर दिखे और केंद्र व बिहार की एनडीए सरकार की नाकामी को उजागर किया. हालांकि एक दिन पहले तक तेजस्वी यादव के कार्यक्रम में शिरकत नहीं करने की चर्चा मीडिया में थी लेकिन तेजस्वी आए और उन्हें लेकर जो सवाल उठाए जा रहे थे उसका जवाब दिया. तेजस्वी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महागठबंधन में कभी वापसी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि मेरे चाचा पलटूराम को अब पलटने से भी महागठबंधन में जगह नहीं मिलने वाली है.


भाजपा से दोस्ती के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि लालू जी के बाल सफेद हो गए, मेरे पिताजी ने भाजपा का रथ रोका था. अब हम भी भाजपा या आरएसएस से न डरेंगे, न उसके सामने झुकेंगे न कभी समझौता करेंगे. भाजपा से न कोई समझौता हुआ है और न ही भविष्य में कभी होगा. तेजस्वी ने बिहार में लगातार हो रहे अपराध, हत्या और बलात्कार की घटनाओं पर नीतीश सरकार को घेरा और कहा कि यह सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है. पटना में जलजमाव के मामले पर तेजस्वी ने नीतीश कुमार से पूछा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आपके पंद्रह साल का विकास कहां है, वह तो अब बड़ा हो गया होगा. उन्होंने कहा कि पटना नगर निगम में चार सौ करोड़ का घोटाला हुआ है. उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर अब तो नीतीश कुमार जी को इस्तीफा दे देना चाहिए.

तेजस्वी यादव ने मंच से महागठबंधन के नेताओं को संदेश देते हुए कहा कि सबको ईगो छोड़कर साथ आना चाहिए. तभी हम इस एनडीए का मुकाबला कर पाएंगे. इस तरह के बिखराव का विरोधी फायदा उठाएंगे और हमारी कमजोरी आने वाले समय में सबके लिए घातक साबित होगी. 


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अगर इस लड़ाई में मुझे विष भी पीना पड़े तो मैं पी लूंगा पर लोगों तक अमृत पहुंचाऊंगा.  उपेंद्र कुशवाहा जो इस कार्यक्रम के संयोजक भी थे, ने कहा कि हमें मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि यह समारोह तो ट्रेलर है. विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन का असली मजमा गांधी मैदान में लगेगा. उन्होंने बिहार के विकास के सवाल पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार में नीतीश सरकार हर मोर्चे पर फेल हो चुकी है.

शरद यादव ने मुसलमानों को लेकर बदले हुए माहौल पर गंभीर चिंता प्रकट की और कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर किसी मुसलमान पर कोई हाथ उठाए तो अपनी जान लगा दो. आज देश अंधेरे में है. ऐसा सत्तर साल में कभी नहीं हुआ. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह केवल मंदिर-मस्जिद की बात करती है. उन्होंने कहा कि डॉ.लोहिया कहा करते थे कि सड़कें सुनसान हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी, लेकिन आज संसद आवारा नहीं है, वहां तो भजन-कीर्तन हो रहा है. पहले संसद में राजनीति से तपे-तपाये लोग आते थे और अब सिनेमा और क्रिकेट के लोग आए गए. बाबाओं को संसद में भेजा जा रहा है. भाजपा और आरएसएस से संविधान खतरे में है. पिछले पांच सालों में देश में भाजपा की सरकार ने क्या काम किया, यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए. 


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