जनादेश

बाबा रामदेव का ट्विटर पर क्यों हुआ विरोध ? जेएनयू के छात्र यूं नहीं सड़क पर हैं गुदड़ी के लाल थे वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई ध्यान से देखिये ,ये फोटो देश के महान गणितज्ञ की है ! नेपाल में शुरू हुआ चीन का विरोध जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें

झटका तो यूपी बिहार में भी लग गया !

गिरधारी लाल जोशी

लखनऊ /पटना . भाजपा गठबंधन को यूपी और बिहार में भी झटका लग गया है .यूपी में बकरी चोरी ,भैस चोरी से लेकर किताब चोरी का मुक़दमा झेलने वाले आजम खान ने अपनी पत्नी को चुनाव जितवा ही दिया .इसके अलावा  भाजपा को एक सीट का अपना नुकसान भी हो गया .बिहार उपचुनाव में एनडीए को तगड़ा झटका लगा है. राज्य की 5 विधानसभा सीटों में से एनडीए सिर्फ एक सीट जीत पाई है. नाथनगर सीट पर जेडीयू के लक्ष्मी कांत मंडल ने कब्जा जमाया है. वह भी केवल 5112  मतों से. नाथनगर सीट ने राजग की लाज बचाई है. वहीं, किशनगंज सीट पर असदुद्दीन  ओवैसी की पार्टी  एआईएमआईएम प्रत्याशी ने बीजेपी को रौंदकर जीत दर्ज कर ली है. मसलन ओवैसी के  बिहार में अपने पांव जमा लेने की शुरुआत कर दी है. कमरुल होदा की जीत को इसी चश्में से देखा जा रहा है. कमरुल होदा को 70469 और भाजपा की राजग उम्मीदवार स्वीटी सिंह को 60258 मत मिले है.


          इनके अलावा सिमरी बख्तियारपुर व बेलहर में आरजेडी की लालटेन की लौ   जीत मिलने से और तेज हो गई है.  राजद कार्यकताओं के  उत्साह का ठिकाना नहीं है. जीत तो नाथनगर सीट पर भी लग रही थी. वोटों की उठापटक अंतिम चरण की गिनती तक चली. मगर राजद की रबिया खातून आखिरकार पांच हजार मतों से  शिकस्त खा गई. हालांकि राजद नेताओं का आरोप है कि डीएम-एसडीओ ने नीतीश कुमार के इशारे पर धांधली कर परिणाम बदलवा दिया. रबिया खातून को 50824  और लक्ष्मीकांत मंडल को 55936  मत मिले. इनका खेल निर्दलीय अशोक कुमार ने बिगाड़ दिया.  इन्हें 12466 वोट मिले. वैसे नोटा ने भी जीत-हार में अहम भूमिका निभाई. नोटा में कुल 3879 वोट पड़े. जदयू की सीट बरकरार रही. यहां के विधायक अजय मंडल के सांसद बनने से यहां उपचुनाव हुआ है.

           वहीं बेलहर सीट और दरौंदा सीट के मतदाताओं ने भाई-भतीजावाद और पति-पत्नीवाद  को नकार दिया. यहां से जदयू ने लालधारी यादव को उम्मीदवार बनाया था. ये यहां के विधायक गिरधारी यादव के भाई है. गिरधारी यादव के सांसद बनने से यहां उपचुनाव हो रहा है. यहां से बिता चुनाव हारे राजद के रामदेव यादव ने जीत दर्ज कराई है. ये इस सीट से तीसरी दफा विधायक निर्वाचित हुए है. इन्हें 61939 तो लीलाधारी यादव को 37740 मत हासिल हुए है. मसलन 24 हजार मतों से राजद ने राजग को शिकस्त दी है.


        दरौंदा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी कर्णजीत सिंह  ने 12 हजार वोटों से जीत हासिल कर जदयू को करारा झटका दिया है. यहां से जदयू ने अजय सिंह को चुनाव लड़ाया . ये सिवान की जदयू  सांसद कविता सिंह  के पति है. उधर, समस्तीपुर लोकसभा सीट पर एलजेपी प्रत्याशी प्रिंस राज ने जीत दर्ज की है. सिमरी बख्तियारपुर से भी राजद के जफर आलम ने 71435 मत लाकर जदयू के अरुण कुमार को 15 हजार से भी ज्यादा वोट से पराजित कर दिया. अरुण कुमार को 55927 मत मिले है. 

          गौरतलब है कि बिहार की समस्तीपुर लोकसभा सीट के साथ नाथनगर, सिमरी बख्तियारपुर, दरौंदा, बेलहर और किशनगंज विधानसभा सीटों  पर 21 अक्टूबर को मतदान हुआ था. इस दौरान एनडीए की ओर से जेडीयू ने 4 और बीजेपी ने एक विधानसभा सीट पर अपने-अपने प्रत्याशी खड़े किए थे. वहीं, एनडीए की सहयोगी एलजेपी ने समस्तीपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा. उधर, महागठबंधन में आरजेडी ने 4 सीटों तो कांग्रेस ने एक विधानसभा सीट के साथ एकमात्र लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा. कांग्रेस को तो सफलता नहीं मिली. मगर राजद ने 5  विधानसभा सीट में से दो सीटें झटक ली. एक निर्दलीय, एक जदयू और एक अवैसी कि पार्टी  एआईएमआईएम के हिस्से गई है. इससे एक बात जाहिर हुई कि राजद के माई समीकरण अभी बरकरार है.

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