जनादेश

बाबा रामदेव का ट्विटर पर क्यों हुआ विरोध ? जेएनयू के छात्र यूं नहीं सड़क पर हैं गुदड़ी के लाल थे वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई ध्यान से देखिये ,ये फोटो देश के महान गणितज्ञ की है ! नेपाल में शुरू हुआ चीन का विरोध जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें

बनारस में कौन होगा विपक्ष का उम्मीदवार ?

धीरेंद्र श्रीवास्तव 

लखनऊ.लोकसभा चुनाव को लेकर दिल्ली हो या दिलदारनगर, श्रीनगर हो या कन्याकुमारी, गुवाहाटी हो या ग़ाज़ीपुर, मुगलसराय हो या मुम्बई, हर जगह सियासी गलियारे में एक प्रश्न आम है कि कौन देगा इस बार के लोकसभा चुनाव में वाराणसी में अजेय स्थिति में खड़े प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को चुनौती ? उत्तर भी कामन है कि फिलहाल तक किसी भी प्रमुख दल की ओर से कोई नाम अधिकृत रूप में सामने नहीं आया है.हालांकि चर्चा प्रियंका गांधी ,मुरली मनोहर जोशी से लेकर शत्रुध्न सिन्हा तक की हो रही है .
इस वाक्य के समाप्त होने के साथ ही दूसरा प्रश्न उत्तर के साथ आता है कि इसका मतलब है कि वाराणसी के संभावित परिणाम से अवगत विपक्ष प्रधानमंत्री  मोदी को वाकओवर दे देगा.कुछ लोग कहते हैं कि स्थिति तो यही है लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि नहीं? प्रधानमंत्री मोदी को इस बार कांग्रेस नेत्री प्रियंका गाँधी चुनौती दे सकती हैं.चर्चा में चल रहे इस प्रश्न के जवाब में अपने सम्पूर्ण राजनीतिक काल में कांग्रेस के कट्टर विरोधी रहे लोकतंत्र सेनानी कुँवर सुरेश सिंह ने कहा, " अगर ऐसा हुआ और संयुक्त विपक्ष ने कांग्रेस नेत्री श्रीमती प्रियंका गाँधी को समर्थन दे दिया तो वाराणसी में प्रधानमंत्री  मोदी को हार का सामना करना पड़ सकता है।" वाराणसी में मतदान सातवें चरण में है.इसलिए चुनौती मिलेगी कि नहीं ? इसे लेकर बहस की पूरी गुंजाइश है जो चल भी रही है.
लोकसभा चुनाव की घोषणा के पहले तक यह माना जा रहा था कि  भाजपा के बागी नेता सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा इस बार वाराणसी से प्रधानमंत्री  मोदी को चुनौती देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. सिन्हा पटना साहिब से ही चुनाव मैदान में है.इसलिए उनकी ओर से चुनौती मिलने की बात लगभग समाप्त हो चुकी है.पिछले सप्ताह श्रीमती प्रियंका गाँधी रायबरेली गईं थीं.इस यात्रा के दौरान कुछ कांग्रेसजनों ने उनसे आग्रह किया कि वह रायबरेली से लोकसभा का चुनाव लड़ें.जवाब में उन्होंने कहा कि वाराणसी से क्यों नहीं? श्रीमती प्रियंका गाँधी ने यह बात तो रायबरेली में कही लेकिन इसे लेकर उछल पड़ी वाराणसी कि फिर तो मजा आ जाएगा.2014 के लोकसभा चुनाव में 76 हज़ार से भी कम रह गए कांग्रेसी भी इसे लेकर बनारसी अंदाज में बाँह चढ़ाने लगे कि तब प्रधानमंत्री अगली लोकसभा में नहीं जा पाएंगे.बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल श्रीवास्तव जैसे लोग तो श्रीमती प्रियंका गाँधी को आग्रह प्रस्ताव भी भेजने लगे कि वह वाराणसी से ही लोकसभा चुनाव लड़ें.61 हज़ार से नीचे रहने वाले बसपाई और 45 हज़ार 2 सौ 91 पर सिमट गए सपाई भी इसे लेकर बातचीत में उत्साहित नज़र आए.
गत चुनाव में 2 लाख 9 हज़ार 238 वोट पाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बार वाराणसी की तरफ मुड़कर भी नहीं देख रहे हैं.इसे लेकर एक प्रश्न वरिष्ठ स्तम्भकार व बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष  चंचल से.जवाब में उन्होंने कहा, " फिर तो जीत प्रियंका गाँधी के पास होगी. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि वाराणसी के मतदाताओं को अवसर मिलेगा कि वे स्वतन्त्रता आंदोलन में भारी कुर्बानी देने वाले परिवार की बेटी को लोकसभा में भेजकर वाराणसी से पहली बार महिला सांसद चुनने का रिकार्ड बनाएं.अभी तक इस सीट से किसी महिला को सांसद होने का अवसर नहीं मिला है.होगा क्या? यह तो 23 मई को पता चलेगा लेकिन इस सम्पूर्ण प्रश्न को भाजपाई खियाली पोलाव मानते हैं.इन लोगों का दावा है कि इस बार पहले से भी अधिक मतों से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जीतने वाले हैं.
देश को प्रधानमंत्री देने वाली यह सीट सात बार कांग्रेस के कब्जे में रही है.कांग्रेस की विजय यात्रा 1952 में बाबू रघुनाथ सिंह से शुरू हुई और 1962 तक चली.1967 में यहाँ से सीपीएम के कामरेड सत्य नारायण सिंह चुनाव जीते.1971 में कांग्रेस की ओर से शिक्षाविद श्री राजाराम शास्त्री जीते लेकिन 1977 में जनता पार्टी के श्री चन्द्रशेखर सिंह ने यह सीट फिर कांग्रेस से छीन ली.1980 से कांग्रेस की ओर से पूर्व रेलमंत्री पण्डित कमलापति त्रिपाठी और 1984 में  श्यामलाल यादव यहां से चुनाव जीते.1989 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में श्री अनिल शास्त्री जीते लेकिन इसके बाद चार बार लगातार इस सीट से बीजेपी जीतती रही.एक बार श्रीश दीक्षित के रूप में और तीन बार  शंकर प्रसाद जायसवाल के रूप में.
2004 में यहाँ से फिर कांग्रेस के श्री राजेश मिश्र जीते लेकिन 2019 में डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी मैदान में उतरे और फिर से इस सीट पर भाजपा काबिज हो गई.2014 में यहाँ श्री नरेन्द्र मोदी मैदान में उतरे और 3 लाख 71 हज़ार से जीते.इस बार भी प्रधानमंत्री श्री मोदी यहाँ से मैदान में हैं और विरोध में श्रीमती प्रियंका गाँधी की ओर से पूछे गए प्रश्न को छोड़ दिया जाए तो दूर दूर तक विपक्ष के नाम पर असमंजस की स्थिति व्याप्त है.
रोहनिया, वाराणसी उत्तरी, वाराणसी दक्षिणी, वाराणसी कैंट और सेवापुरी को लेकर बने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में एक भी सीट आरक्षित नहीं है लेकिन बहुचर्चित श्री चन्द्रशेखर रावण यहाँ से प्रधानमंत्री को चुनौती देने की बात कर रहे हैं.केवल वही नहीं, बीएसएफ का बर्खास्त जवान श्री तेज बहादुर यादव भी प्रधानमंत्री को चुनौती देने की बात कर सुर्खियों में है.

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Replied by bimlesh@gmail.com at 2019-04-03 03:24:57

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