जनादेश

बाबा रामदेव का ट्विटर पर क्यों हुआ विरोध ? जेएनयू के छात्र यूं नहीं सड़क पर हैं गुदड़ी के लाल थे वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई ध्यान से देखिये ,ये फोटो देश के महान गणितज्ञ की है ! नेपाल में शुरू हुआ चीन का विरोध जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें

नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई

फज़ल इमाम मल्लिक

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यूं तो सीना ठोंक कर अपने को धर्मनिरपेक्ष बताने से नहीं चूकते और अपने हर भाषण में क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से किसी तरह का समझौता नहीं करने की बात कह कर अपनी पीठ खुद थपथपाते हैं. वे तीन सी यानी क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म के जीरो टॉलरेंस की बात कहने में किसी तरह की कोताही नहीं करते, यह अलग बात है कि उनके राज में अपराध चरम पर है, भ्रष्टाचार के मामले में भी वे पीछे नहीं हैं और सांप्रदायिक दंगों में तो बिहार ने देश में नया रिकॉर्ड बनाया है. आंकड़े इस बात का गवाह हैं. नीतीश कुमार इस बात को भी छाती ठोंक कर कहते रहे हैं कि उनके कार्यकाल में बिहार में सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए. लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़े उनके दावे को झुटला रहे हैं. एलआरसीबी के आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि इस मामले में बिहार सबसे आगे है. 

लगभग दो साल की देरी से जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में देशभर में दंगों की कुल 58,729 वारदातें दर्ज की गई. इनमें से 11,698 दंगे बिहार में हुए. इस बार एनसीआरबी की रिपोर्ट में सांप्रदायिक / धार्मिक दंगों के लिए अलग कॉलम बनाया गया था और उसे सामान्य दंगों से अलग रखा गया. आंकडों के मुताबिक 2017 में देश में कुल 723 सांप्रदायिक दंगे हुए. इनमें से बिहार में सांप्रदायिक दंगों की 163 घटनाएं हुईं, जो देश के किसी भी सूबे से ज्यादा है. इन दंगों से 214 लोग प्रभावित हुए. सांप्रदायिक दंगों के मामले में दूसरे स्थान पर कर्नाटक, तीसरे स्थान पर ओड़ीशा, चौथे स्थान पर महाराष्ट्र और चौथे स्थान पर झारखंड है. कर्नाटक में सांप्रदायिक हिंसा की 92 घटनाएं, ओडिशा में 91, महाराष्ट्र में 71 दर्ज की गईं. उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों की 34 घटनाएं हुई हैं. दिलचस्प बात यह है कि 2016 के मुकाबले अन्य राज्यों में इस तरह की वारदातें कम हुई हैं.

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में सांप्रदायिक हिंसा के मामले हरियाणा अव्वल था. वहां सांप्रदायिक हिंसा की 250 घटनाएं हुई थीं. लेकिन, इसमें काफी कमी आई और 2017 में हरियाणा में सांप्रदायिक हिंसा की महज 25 घटनाएं हुईं. इसी तरह झारखंड में 2016 में सांप्रदायिक हिंसा की 176 वारदातें दर्ज की गई थीं, जो 2017 में घट कर 66 पर आ गईं. लेकिन बिहार ने दूसरे राज्यों के मुकाबले इस मामले में बाजी मारी, 2016 में बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की 139 घटनाएं हुई थीं. लेकिन 2017 में बिहार में इसकी तादाद में इजाफा हुआ.


हालांकि 2016 से पहले भी सांप्रदायिक दंगों की तादाद बिहार में कम थी. 27 नवंबर, 2012 को लोकसभा में इसे लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने जो आंकड़े दिए उसके मुताबिक 2009 और 2010 में बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की 40-40 घटनाएं दर्ज हुई थीं, तो 2011 में सांप्रदायिक हिंसा की 26 घटनाएं हुई थीं. इसी तरह 2012 में भी सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं कम हुईं थीं. तब बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की 21 वारदातें हुई थीं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई थी. लेकिन 2013 में इसमें इजाफा हुआ और सांप्रदायिक हिंसा की 63 घटनाएं हुई थीं.

लेकिन हाल के दिनों में बिहार में धार्मिक उन्माद में इजाफा हुआ है. धार्मिक कार्यक्रमों में खुलेआम भड़काऊ गाने बजाए जाते हैं और आपत्तिजनक नारे लगते हैं. जिसकी वजह से हिंसा की घटनाओं में इजाफा हो रहा है. एनसीआरबी के आंकड़े भी इसकी तसदीक करते हैं. पिछले साल ही रामनवमी के वक्त बिहार के आधा दर्जन जिलों में सांप्रदायिक दंगे हुए थे और दंगों का तरीका एक जैसा ही था. रामनवमी का जलूस निकाला जाता और उसमें भड़काऊ गाने बजते जिसके बाद तनाव फैलता और फिर लोग बेकाबू होते और तोड़फोड़-रोड़ेबाजी शुरू होती. पिछले साल दुर्गा पूजा में मूर्ति विसर्जन के जुलूस के दौरान सीतामढ़ी में दंगा हो गया था, जिसमें एक बुजुर्ग की हत्या कर दी गई थी.

दंगे को लेकर मौके पर तैनात प्रशासन ने अपने लिखित बयान में इस बात का जिक्र किया था कि जुलूस में शामिल लोग बेहद आपत्तिजनक नारे लगा रहे थे. बाद में अफवाह उड़ी और फिर माइक से बाकायदा उकसाने वाले नारे लगाए गए और जिसके नतीजे में दंगा भड़का. इस साल पटना से सटे जहानाबाद शहर में दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के वक्त हिंसा हुई थी. कई धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की गई थी. दर्जनों दुकानें लूट ली गई थीं. कई जानें भी गईं. पूरे शहर में कई दिनों तक कर्फ्यू जैसे हालात थे. कुछ दिन के लिए इंटरनेट सेवा भी बंद करनी पड़ी थी. जहानाबाद की हिंसा भी मूर्ति पर पथराव कर उसे क्षतिग्रस्त करने की अफवाह से शुरू हुई थी और देखते ही देखते पूरा शहर जलने लगा. लेकिन प्रशासन ने पत्थरबाजी और मूर्ति टूटने की घटना से पूरी तरह इनकार किया और कहा था कि न मूर्ति पर पत्थर फेंका गया था और न ही मूर्ति टूटी थी.


सामाजिक संगठनों का मानना है कि बिहार में दंगे की घटनाओं में इजाफे के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व अन्य संगठनों का उभार जिम्मेदार है. पटना के डीएम दिवाकर कहते हैं कि हाल के सालों में धार्मिक कार्यक्रमों में आक्रामकता बढ़ी है. पिछली रामनवमी में पटना में नंगी तलवारें लेकर रामनवमी का जुलूस निकली थी. इससे साफ है कि भाजपा अब पहले जैसी नहीं है. वह बिहार में खुद को मजबूत बनाने में लगी है और दंगे व दो समुदायों में तनाव से उसे मजबूती मिलती है. इस साल 18 मई को राज्य पुलिस के स्पेशल ब्रांच ने बिहार के सभी जिलों के डीएसपी को आरएसएस सहित दूसरे संगठनों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने को कहा था.

इस पत्र में आरएसएस के साथ ही उससे जुड़े बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण समिति, धर्म जागरण समन्यव समिति, हिंदू राष्ट्र सेना, राष्ट्रीय सेविका समिति, शिक्षा भारती, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, दुर्गा वाहिनी, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय रेल संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ, हिंदू महासभा, हिंदू युवा वाहिनी और हिंदू पुत्र संघ का जिक्र किया गया था. एसपी ने इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए तत्वरित कार्रवाई करने को कहा था. इन संगठनों के बारे में पुलिस इसलिए भी जानकारी जुटा रही थी, क्योंकि कई दंगों में इन संगठनों की संलिप्तता सामने आई थी.

बिहार में सांप्रदायिक दंगों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला किया और कहा कि बिहार के कथावाचक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हार्दिक बधाई. उनके अथक पलटीमार प्रयासों से देशभर में बिहार को दंगों में प्रथम स्थान मिला है. हत्या, हिंसक अपराधों में दूसरे और दलितों के विरुद्ध अपराध में भी बिहार अग्रणी रूप से दूसरे स्थान पर है. पंद्रह साल से गृह विभाग उन्हीं के जिम्मे है. लेकिन बढ़ती घटनाओं के बावजूद बिहार सरकार इसे लेकर चिंतित नहीं है. सरकार सब कुछ ठीक होने का दावा कर रही है.

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :