जनादेश

बाबा रामदेव का ट्विटर पर क्यों हुआ विरोध ? जेएनयू के छात्र यूं नहीं सड़क पर हैं गुदड़ी के लाल थे वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई ध्यान से देखिये ,ये फोटो देश के महान गणितज्ञ की है ! नेपाल में शुरू हुआ चीन का विरोध जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें

भाषा को रामनामी से मत ढकिये !

चंचल 

वाराणसी .काशी विश्वविद्यालय के वर्तमान समेत पिछले तीनो कुलपतियों के सोच से निर्मित छात्रों का चरित्र सामने आने लगा है . कल एक खबर मिली कि संस्कृत विभाग के कुछ छात्र कुलपति आवास पर धरना दे रहे थे कि उनके विभाग में एक मुसलमान फिरोज खान की नियुक्ति गलत की है . एक मुसलमान भारतीय प्राच्य बिद्या ,और संस्कृत कैसे पढ़ा सकता है ? कितने शर्म की बात है कि एक पढ़ालिखा विश्व विद्यालय का छात्र , यह बात बोल रहा है . अब ज्ञान ,विद्या , और भाषा मजहब के खांचे में जाकर खड़ी हो गई है . यह कुंठित सोच पोंगा पंथी सोच की पोषक है जिसने सबसे ज्यादा सनातन का ही नुकसान किया है .दस हजार हिंदुओं के बीच गर एक मुसलमान आ जाय तो दस हजार हिन्दू एक पल में टाट बाहर और मलेक्ष घोषित .

मित्र ! संस्कृत का कद मत घटाइए , यह ज्ञान विज्ञान की एक मजबूत भाषा है इसे मात्र चंदन और रामनामी से मत ढकिये . इसके प्रचार प्रसार में उठिये . आज भी इस देश मे एक गांव ऐसा है जहां केवल संस्कृत बोली जाती है . इस गांव में सारी जातियां हैं .आप संस्कृत को तबाह करने पर तुले हैं . इसी विश्व विद्यालय में एक महान विद्वान रहे हैं डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी उन्होंने रहीम के संस्कृत और ज्योतिष ज्ञान की जो तारीफ की है उसे पढ़िए . रहीम ने संस्कृत का प्रचार किया ठीक उसी तरह जैसे फिराक साहब ने उर्दू का .देश बनाइये दोस्त . छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़िये मत .

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