जनादेश

ढोरपाटन का वह शिकारगाह ! इस मौसम में भिंडी ,अरबी और कटहल से बचें ! किसान संगठनों ने किया ग्रामीण भारत बंद का एलान जमानत नियम है, जेल अपवाद फिर सौ दिन ? हनीट्रैप का खुलासा करने वाला अखबार निशाने पर कौन हैं ये राहुल बजाज ,जानते हैं ? पानी किसी एक देश का नहीं होता अदरक डालिए साग में अगर कफ से बचना है तो जंगल ,पहाड़ और शिकार ! चलो सोनपुर का मेला तो देखें ! फिर दिखी हिंदी मीडिया की दरिद्रता ! मोदी को ठेंगा दिखाती प्रज्ञा ठाकुर ! गुर्जर-मीणा विवाद में फंसा पांचना बांध तो जेडीयू ने भी दिखाई आंख ! महाराष्ट्र छोड़िए अब बंगाल और बिहार देखिए ! सांभर झील बनी मौत की झील जो आपसे कहीं सुसंस्कृत है! भाजपा और तृणमूल दोनों का रास्ता आसान नहीं कश्मीरी नेताओं का यह कैसा उत्पीडन ! शुक्रिया ,पोगापंथ से लड़ने वाले नौजवानों !

मेरे मित्र टीएन शेषन !

विनीत नारायण

भारत में पहली बार चुनाव सुधार लागू करने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और मेरे घनिष्ठ मित्र  टीएन शेषन के अभी हुए निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजली . श्री बाँकेबिहारी जी अपने चरणों में उन्हें स्थान दें . यद्यपि वो आयु में मुझ से 22 वर्ष बड़े थे पर हमारी मित्रता समान स्तर पर थी .भारत में चुनाव सुधार का ऐतिहासिक कार्य करके उन्होंने विश्व भर में नाम कमाया . उस अभियान का अनौपचारिक दफ़्तर कालचक्र समाचार ट्रस्ट का हमारा दिल्ली दफ़्तर ही था. जहां वो अक्सर बैठकों के लिए आते थे . उनके इस अभियान में हमने भी योगदान दिया .

देश को जगाने के उद्देश्य से 1994 से 1996 के बीच उनके साथ मैंने भी चुनाव सुधारों पर देश भर में सैंकड़ों जन सभाओं को संबोधित किया . हम दौनों सुबह जल्दी के प्लेन से दिल्ली से निकलते तो कभी मुम्बई, हैदराबाद, भुवनेश्वर जैसे शहरों में एक एक दिन में कई सभाओं को सम्बोधित करते . हम विश्वविध्यालयों के छात्रों, चेम्बर ओफ़ कामर्स, बॉर काउन्सिल, प्रेस कॉन्फ़्रेन्स और शाम को एक विशाल जन सभा को सम्बोधित करके रोज़ दिल्ली लौट आते थे .

जनता में उन्हें देखने सुनने का बड़ा उत्साह था . हवाई अड्डे से जब हमारी कारों का लंबा क़ाफ़िला बाहर निकलता तो हज़ारों लोग उनकी एक झलक पाने को बेताब रहते . चूँकि 1993 में मैंने राजनीतिक भ्रष्टाचार और आतंकवाद के विरूद्ध जैन हवाला कांड उजागर करके देश में एक बड़ी जंग छेड़ दी थी , तो उन्होंने ही प्रस्ताव रखा क्यों न हम दौनों साथ साथ देश में जन सभाएँ करें . हमारी जनसभाओं में , बिना राजनीतिक हथकंडों अपनाए या खर्चे किए , स्वतः ही भारी भीड़ उमड़ती थी .

उनकी बढ़ती लोकप्रियता और निरंकुश स्वभाव को देखकर प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने अचानक एक सदस्यी चुनाव आयोग में दो सदस्य और जोड़ दिए . तब शेषन युगल छुट्टी पर अमरीका में थे . उन्हें बहुत झटका लगा . फ़ोन पर उन्होंने मुझसे आगे की रणनीति पर लंबी बात की . जब वो भारत लौटे तो अपने घर एक बंद कमरे में मेरे कंधे पर सिर रखकर ख़ूब रोए थे . बोले “नरसिंह राव ने मेरे साथ बहुत धोका किया “.


शेषन, किरण बेदी, के जे एलफ़ोंज और मैं....

जब जनवरी 1996 में जैन हवाला कांड में देश के 115 ताक़तवर नेता और अफ़सर चार्जशीट हो गये तो मेरे दिल्ली दफ़्तर के बाहर विदेशी टीवी चैनलों की क़तार लग गयी , जो मुझे इंटर्व्यू करने आते थे . उसी गहमा गहमी के बीच किरण, एलफ़ी और शेषन सारा दिन मेरे दफ़्तर में बैठक करते थे . हम लोग एक देशव्यापी अभियान शुरू करने की योजना बना रहे थे . कभी कभी इन बैठकों में मुम्बई के बहुचर्चित म्यूनिसिपल कमिश्नर जी आर खेरनार भी शामिल होते थे . जिन्होंने दाऊद की अवैध संपत्तियों पर बुल्डोज़र चलाये थे .

हमारी योजना थी कि शेषन चेन्नई से, एल्फी त्रिवेंद्रम से, किरण अमृतसर से, खेरनार मुम्बई से और मैं कलकत्ते से अलग अलग रथों पर सवार होकर निकलें और मार्ग में जन सभाओं को सम्बोधित करते हुए भारत के केंद्र नागपुर में आकर मिलें और तब देश में एक वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था दें . ये चिंतन बैठकें हफ़्तों चली .बाहर पत्रकार उत्सुकता में भीड़ लगाए खड़े रहते थे . पर हमारी वार्ता गोपनीय रहती क्योंकि जबतक कुछ तय न हो हम प्रेस से कुछ साझा नहीं करना चाहते थे . पर बात बनी नहीं. क्योंकि मेरे अलावा ये चारों सरकारी अफ़सर थे और देश में क्रांति लाने लिए अपनी नौकरी दांव पर लगाने को तय्यार नहीं थे .

बाद में शेषन मेरी सलाह के विरूद्ध आडवाणी जी के विरूद्ध गांधीनगर से लोकसभा चुनाव लड़े . एल्फी को मोदी जी ने हाल ही में सांसद और पर्यटन मंत्री बनाया था . किरण पुदुच्चेरी की उपराज्यपाल है और मैंने इसके बाद 1996 से 2000 तक भ्रष्टाचार विरूद्ध अपना संघर्ष जारी रखा और सर्वोच्च न्यायपालिका का भ्रष्टाचार उजागर करने में कई वर्ष जोखिम भरा संघर्ष किया . जिसमें मुझे 18 महीने भूमिगत रहना पड़ा क्योंकि मुझपर जम्मू कश्मीर में अदालत की अवमानना का मुकदमाँ थोप दिया गया . फिर मुझे देश छोड़कर भी भागना पड़ा . फिर संत श्री रमेश बाबा की प्रेरणा से 2002 में मैंने ब्रज सेवा का संकल्प ले लिया .शेषन युगल मेरी इस नयी ब्रज सेवा यात्रा से अभिभूत थे . प्रायः हम फ़ोन पर बात करते थे .


एक बार वो, उनकी पत्नी , मेरी पत्नी मीता नारायण और मैं मुम्बई में फिल्मफेअर अवार्ड में गए . पूरे फ़िल्म जगत के सितारे भारी तादाद में मौजूद थे .लता मंगेशकर जी हमारे साथ ही अगली पंक्ति में बैठी थी. तभी अचानक शत्रुघ्न सिन्हा शेषन को चुपचाप उठाकर मंच के पीछे ले गये . वहाँ उन्हें सिल्क का धोतीकुर्ता पहनाया . सर्प्राइज़ आइटम की तरह जब शेषन हलके हलके थिरकते हुए मंच पर अवतरित हुए तो पीछे से गाना बज रहा था ,“ तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त “ . देश में एक ग़ुस्सैल और कठोर छवि वाले शेषन को इस मस्ती में देखकर फ़िल्मी दुनियाँ के सितारे भी मस्त हो गए और सब ताली की थाप देकर झूमने लगे .

वो, उनकी पत्नी श्रीमती जया शेषन और मैं उनके द्वारा स्थापित ‘देशभक्त ट्रस्ट’ के न्यासी भी थे . हम दोनों ने अपनी अपनी पुस्तकों में एक दूसरे का उल्लेख किया है .अभी कुछ वर्ष पहले जब मैं आईआईटी चेन्नाई में छात्रों को सम्बोधित करने गया था तब उनके घर भी गया था . दोनों बड़े स्नेह से मिले थे . तब एक चमत्कारिक आध्यात्मिक घटना भी घटी थी जो मैं कभी भूल नहीं पाउँगा . हम दोनों परिवारों ने 1994 से 1996 के उस दौर में मिलकर अनेक धार्मिक उत्सव और यात्राएँ साथ साथ की थीं .अब तो उनकी केवल स्मृतियाँ शेष रह गयीं .

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