जनादेश

कभी बंगलूर के लालबाग वाले एमटीआर का भी स्वाद लें ! हालात कहीं और गम्भीर तो नहीं हो रहे हैं ? सब बंद नहीं,बेहतरी के भी कई द्वार खुले ट्रंप को प्रेस कांफ्रेंस सीधी चुनौती देते हैं पत्रकार ! भोजन दिव्य हो भव्य नहीं कोरोना के बाद किस हाल में होंगे हम दक्षिण एशिया में कोरोना का बड़ा स्त्रोत बन गया तब्लीगी जमात शिवराज भाई नमस्कार दूध ,घी और रसगुल्ला जब पानी ही नहीं तो हाथ कहां से धोएं अलबर्ट कामू की पुस्तक दि प्लेग वे तो चार्टर्ड प्लेन से आ गए इंदौर से सबक लीजिए ,बाहर मत निकालिए ऐसे सेनेटाइज करते हैं मजदूरों को मलेरिया क्षेत्र में कोरोना असर बहुत कम ? काम किसका नाम किसका पीएम के नाम दूसरे फंड की जरुरत क्या थी पैदल चला मजलूमों का कारवां ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां! डरते डरते जो भी किया उसका स्वागत !

नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई

सुनीलम 

भोपाल .गैस पीड़ितों के लिए संघर्ष करने वाले साथी भाई अब्दुल जब्बार अब हमारे बीच नहीं रहे. भोपाल में 2 दिसम्बर 1984 को यूनियन कार्बाइड संयंत्र से जहरीली गैस रिसने से एक ही रात में 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. हादसे की रात से ही जब्बार भी ने पीड़ितों के बीच जाकर मदद का काम शुरू कर दिया था. हादसे के एक वर्ष बाद उन्होंने भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन बनाया और संघर्ष का सिलसिला आगे बढ़ाया. उन्होंने पीड़ितों के हक के लिए न्यायालयीन लड़ाई लड़ी.शाहजहानी पार्क इस बात का गवाह है कि जहां 1986 से हर मंगलवार और शनिवार को पीड़ित इकट्ठा होकर अपनी आवाज बुलंद करते रहे. उन्होंने प्रभावितों को आर्थिक तौर पर सक्षम बनाने के लिए स्वाभिमान केंद्र चलाया जहां सिलाई, कढ़ाई जरी का काम एवं कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाता है.यह केंद्र साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल है. यहां हिन्दू मुस्लिम महिलाएं न सिर्फ एकसाथ प्रशिक्षण लेती हैं बल्कि साथ खाने में भी परहेज नहीं करती. इस केंद्र से 8 हजार से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं. 35 साल के अपने संघर्ष के दौरान उनका साथ देने वाले 20 हजार से ज्यादा लोगों को उन्होंने बिछुड़ते हुए देखा. सोचा था हर बार की तरह गैस त्रासदी की बरसी पर 3 दिसम्बर को शाहजहानी पार्क में उनसे मुलाकात होगी.पर अब वे कभी नही मिलेंगे.

मेरी आखिरी बार उंसके अस्पताल में डॉ रानू ने यह कहते हुए कराई थी कि वे अपना ख्याल नहीं रखते ,आप समझाइए ,खूब लंबी बात हुई थी.उन समय यह मालूम नहीं था कि वही अखिरी बात होगी .

उनका संघर्ष की प्रेरणा हमारे साथ होगी.जब्बार भाई ने पूरा जीवन गैस पीड़ितों की सेवा और संघर्ष में लगा दिया. अदालत से लेकर सड़क तक तक वे हर दिन हर पल गैस पीड़ितों की चिंता करते रहे. भोपाल का ही नहीं दुनिया का हर व्यवस्था परिवर्तन में विश्वास रखने वाला व्यक्ति उनको जानता और मानता था.जब्बार भाई और उनके साथियों के संघर्ष की बदौलत गैस पीडितों को बहुत कुछ सुविधाएं और मुआबजा मिला ,हालांकि कभी भी जब्बार भाई सन्तुष्ट नहीं हुए ,रुके नहीं ,थके नहीं ,अनवरत संघर्ष करते रहे.हम सभी साथियों की जिम्मेदारी है कि हम उनके द्वारा किये गए सभी कार्यों को आगे बढ़ाएं.दिसम्बर के कार्यक्रम को जब्बारभाई के याद में ऎतिहासिक बनाएं.संघर्ष के साथी को आखिरी सलाम .किसान संघर्ष समिति- जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय और सभी समाजवादी साथियों की ओर से भावभीनी श्रीधानजली ,जब्बार भाई अमर रहे.

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