जनादेश

अंफन ने बदली सुंदरबन की तस्वीर और तकदीर बबीता गौरव से कौन डर रहा है अख़बार से निकले थे फ़िल्मकार बासु चटर्जी देश में कोरोना तो बिहार में होगा चुनाव ? बुंदेलखंड़ लौटे मजदूरों की व्यथा भी सुने ! बिहार को कितनी मदद देगा केंद्र ,साफ बताएं एजेंसी की खबरें भरते हिन्दी अखबार ! दान में भी घालमेल ! मंच पर गांधी थे नीचे मैं -पारीख पार्टी और आंदोलन के बीच संपूर्ण क्रांति इसलिए पांच जून एक यादगार तारीख है ! माफिया की शुरुआत कांग्रेस ने की तो सपा ने आगे बढ़ाया बिहार में कोरोना से पच्चीस से ज्यादा मरे साइकिल दिवस पर शहीद हुई एटलस साइकिल ! नब्बे में मद्रास का वह समुद्री तूफ़ान एक थे जॉर्ज फर्नांडीज ! स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बिना राय लिए किए फैसले ! तेंदूपत्ता तुड़ाई में कोरोना कहर कोरोना के दौर में चुनाव की तैयारी ! बस्तर की इमली खाई है कभी ?

नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई

सुनीलम 

भोपाल .गैस पीड़ितों के लिए संघर्ष करने वाले साथी भाई अब्दुल जब्बार अब हमारे बीच नहीं रहे. भोपाल में 2 दिसम्बर 1984 को यूनियन कार्बाइड संयंत्र से जहरीली गैस रिसने से एक ही रात में 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. हादसे की रात से ही जब्बार भी ने पीड़ितों के बीच जाकर मदद का काम शुरू कर दिया था. हादसे के एक वर्ष बाद उन्होंने भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन बनाया और संघर्ष का सिलसिला आगे बढ़ाया. उन्होंने पीड़ितों के हक के लिए न्यायालयीन लड़ाई लड़ी.शाहजहानी पार्क इस बात का गवाह है कि जहां 1986 से हर मंगलवार और शनिवार को पीड़ित इकट्ठा होकर अपनी आवाज बुलंद करते रहे. उन्होंने प्रभावितों को आर्थिक तौर पर सक्षम बनाने के लिए स्वाभिमान केंद्र चलाया जहां सिलाई, कढ़ाई जरी का काम एवं कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाता है.यह केंद्र साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल है. यहां हिन्दू मुस्लिम महिलाएं न सिर्फ एकसाथ प्रशिक्षण लेती हैं बल्कि साथ खाने में भी परहेज नहीं करती. इस केंद्र से 8 हजार से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं. 35 साल के अपने संघर्ष के दौरान उनका साथ देने वाले 20 हजार से ज्यादा लोगों को उन्होंने बिछुड़ते हुए देखा. सोचा था हर बार की तरह गैस त्रासदी की बरसी पर 3 दिसम्बर को शाहजहानी पार्क में उनसे मुलाकात होगी.पर अब वे कभी नही मिलेंगे.

मेरी आखिरी बार उंसके अस्पताल में डॉ रानू ने यह कहते हुए कराई थी कि वे अपना ख्याल नहीं रखते ,आप समझाइए ,खूब लंबी बात हुई थी.उन समय यह मालूम नहीं था कि वही अखिरी बात होगी .

उनका संघर्ष की प्रेरणा हमारे साथ होगी.जब्बार भाई ने पूरा जीवन गैस पीड़ितों की सेवा और संघर्ष में लगा दिया. अदालत से लेकर सड़क तक तक वे हर दिन हर पल गैस पीड़ितों की चिंता करते रहे. भोपाल का ही नहीं दुनिया का हर व्यवस्था परिवर्तन में विश्वास रखने वाला व्यक्ति उनको जानता और मानता था.जब्बार भाई और उनके साथियों के संघर्ष की बदौलत गैस पीडितों को बहुत कुछ सुविधाएं और मुआबजा मिला ,हालांकि कभी भी जब्बार भाई सन्तुष्ट नहीं हुए ,रुके नहीं ,थके नहीं ,अनवरत संघर्ष करते रहे.हम सभी साथियों की जिम्मेदारी है कि हम उनके द्वारा किये गए सभी कार्यों को आगे बढ़ाएं.दिसम्बर के कार्यक्रम को जब्बारभाई के याद में ऎतिहासिक बनाएं.संघर्ष के साथी को आखिरी सलाम .किसान संघर्ष समिति- जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय और सभी समाजवादी साथियों की ओर से भावभीनी श्रीधानजली ,जब्बार भाई अमर रहे.

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :