जनादेश

ढोरपाटन का वह शिकारगाह ! इस मौसम में भिंडी ,अरबी और कटहल से बचें ! किसान संगठनों ने किया ग्रामीण भारत बंद का एलान जमानत नियम है, जेल अपवाद फिर सौ दिन ? हनीट्रैप का खुलासा करने वाला अखबार निशाने पर कौन हैं ये राहुल बजाज ,जानते हैं ? पानी किसी एक देश का नहीं होता अदरक डालिए साग में अगर कफ से बचना है तो जंगल ,पहाड़ और शिकार ! चलो सोनपुर का मेला तो देखें ! फिर दिखी हिंदी मीडिया की दरिद्रता ! मोदी को ठेंगा दिखाती प्रज्ञा ठाकुर ! गुर्जर-मीणा विवाद में फंसा पांचना बांध तो जेडीयू ने भी दिखाई आंख ! महाराष्ट्र छोड़िए अब बंगाल और बिहार देखिए ! सांभर झील बनी मौत की झील जो आपसे कहीं सुसंस्कृत है! भाजपा और तृणमूल दोनों का रास्ता आसान नहीं कश्मीरी नेताओं का यह कैसा उत्पीडन ! शुक्रिया ,पोगापंथ से लड़ने वाले नौजवानों !

शुक्रिया ,पोगापंथ से लड़ने वाले नौजवानों !

चंचल 

वाराणसी . काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)में डॉ फिरोज खान की नियुक्ति मामले में धार्मिक भेदभाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. पर इसका काशी में ही पुरजोर विरोध हुआ है .कल भी आज भी .काशी विश्वविद्यालय के असल  युवाजनों ने पूरी ताकत से अल्पज्ञानी पोंगा पंथ का विरोध करके देश और दुनिया को यह संदेश दे दिया कि काशी वाकई सर्वविद्या की राजधानी है . देश और दुनिया की सारी भाषाएं यहां फलती फूलती हैं . कोई भी भाषा किसी जाति विशेष की रखैल नही हैं , जो भी इससे प्यार का इजहार करेगा यह उससे लिपट कर मन को दीप्त कर देगी । और फिर उर्दू और संस्कृत ? ये सब भाषाएं सहोदर हैं बगैर एक दूसरे को थामे चल ही नही सकती .

उस पोंगापंथी से कहो अपने घर मे तीन सतर संस्कृत बोल कर अपनी बीवी से प्यार करले . या सड़क पर चार सतर हिंदी बोल ले जिसमे फारसी से लेकर उर्दू तक न मिला हो.भाषा की जाति तय करनेवालों अपनी भाषा की तौहीन कर रहे हो . भाषा की परिधि को मत खराब करो .उसे फैलने दो. कमबख्तों . तुम्हारी कथाओं में तोता , कौवा , सियार मुर्गा तक संस्कृत बोलता और समझता रहा ,आज तुम उसे इंसान के पास तक नही जाने देना चाहते ?एनएसयूआई  , आइसा के अलावा भी युवा संगठन हैं समाजवादी युवजन सभा खत्म है क्या ? इलाहाबाद में तो जिंदा ही नही , सड़क को गर्म किये खड़े हैं ।

आप सब को धन्यवाद.(चंचल बीएचयू छात्रसंघ  के पूर्व अध्यक्ष रहे है ).

विरोध प्रदर्शन जारी 

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. आंदोलित छात्रों ने जहां अब न्यायालय जाने का ऐलान किया है तो वहीं बीएचयू में ही छात्रों को एक अन्य गुट फिरोज खान के समर्थन में उतर आया है.संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में अल्पसंख्यक प्रोफ़ेसर की नियुक्ति के समर्थन में छात्रों ने वी आर विथ यू फिरोज़ खान, संस्कृत किसी की जागीर नहीं जैसे पोस्टर लेकर मार्च निकाला. शोध छात्र विकास सिंह ने बताया कि महामना के मूल्यों को कुछ छात्र तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की जहां हर धर्म के लोग शिक्षा ग्रहण कर सकें.

वहीं बीएचयू परिसर में ही दूसरे विभाग के छात्र फिरोज का विरोध कर रहे हैं. विरोध में धरने पर बैठे शोध छात्र चक्रपाणि ओझा ने बताया हमारा विरोध सनातनी संस्कृत को पढ़ाने को लेकर है. यहां सभी छात्र यज्ञोपवित के बाद आते हैं. हमारी मांग नही मांगी गई तो कोर्ट जाएंगे. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद के बाद बुधवार को प्रियंका गांधी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी की एक टीम वीसी राकेश भटनागर से मुलाकात की. पूर्व विधायक अजय राय ने बताया कि वीसी राकेश भटनागर ने बताया निययुक्ति कि प्रक्रिया पारदर्शी है.

हालांकि विश्वविद्यालय ने पिछले हफ्ते में दो बार बयान जारी किए हैं, जिसमें कहा गया है , "धर्म से अलग बीएचयू सभी को समान शिक्षा और शिक्षण के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है.


---------------------------------

और संस्कृत पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर अली !

पंकज चतुर्वेदी 

गोरखपुर .गोरखपुर के पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय में 32 सालों से अधिक समय तक संस्कृत पढ़ाने वाले और संस्कृत विभाग के प्रमुख रह चुके प्रोफेसर असहाब अली अभी 2011 में ही सेवानिवृत हुए हैं.प्रोफेसर असहाब अली ने इंटरमीडिएट परीक्षा में संस्कृत में टॉप किया था, इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन संस्कृत में किया और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन में उनका स्पेशलाइजेशन वेदों पर रहा है. पीएचडी उन्होने वैदिक और इस्लामिक मिथकों के तुलनात्मक अध्यन पर किया है. प्रोफेसर असहाब अली मूल रूप से महराजगंज के जमुनिया गांव के रहने वाले हैं.उन्होंने 1977 में यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू किया था.

उन्होंने कहा कि उनके विद्यार्थी जीवन में और उनके टीचर रहते हुए कभी भी ऐसी बात नहीं आई कि मुसलमान संस्कृत से जुड़ा हुआ है तो एक बुरी बात हो गयी. बल्कि इसमें मुझको प्रोत्साहित ही किया जाता रहा है. वह कहते हैं कि लोग मुझे उत्साहित करते थे और ये उत्साहवर्द्धन तब और हुआ जब मैं अध्यापक हो गया. विवि में 6 साल तक असिस्टेंट प्रॉक्टर रहा. विवि के सभी अध्यापकों को मैं जानता था. सबसे मित्रवत और बड़े लोगों से मैं गुरुवत मिलता था.जब 32 साल में गोरखपुर में एक मियां के कारण हिन्दू धर्म भृष्ट नहीं हुआ तो बनारस के पोंगा पंडित क्यों डर रहे हैं?अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तो उसकी मेयो कालेज की तरह शुरुआत के बाद ही 1880 से संस्कृत विभाग है.इन दिनों वहां के प्रोफेसर मोहम्मद शरीफ इलाहबाद से पढ़ें हैं. संस्कृत में पीएचडी, डी लिट् हैं.

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :