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सांभर झील बनी मौत की झील

विनोद पाठक

जयपुर .राजस्थान के तीन जिलों जयपुर, अजमेर और नागौर में फैली भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की सांभर झील पिछले दो सप्ताह से सैकड़ों प्रवासी पक्षियों की कब्रगाह बनी हुई है. मीडिया में खबरें आने के बाद जिम्मेदार जागे तो हैं, लेकिन कार्यवाही खानापूर्ति वाली ही है. 25 हज़ार से भी अधिक बेजुबान पक्षियों की मौत के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने टीमें भेजी हैं, लेकिन पक्षियों की मौत के सटिक कारण को अभी तक खोजा नहीं जा सका है. राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसे गंभीर और बेहद लापरवाही से भरा हुआ मामला मानते हुए राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

सांभर झील का नजारा डराने वाला है. झील में जहां देखो, वहां रेत और नमक के टीलों पर मृत पक्षी और उनके अवशेष दिख रहे हैं. मृत पक्षियों में सबसे ज्यादा 3200 नार्दन सावलर हैं, जिन्होंने रतन तलब, शाकम्भरी माता मंदिर झपोक डेम, गुढ़ा साल्ट के इलाके को अपना बसेरा बना रखा था. 2600 केंटिश प्लोवर, 1000 रफ, 600 को-मनकोट-ब्लैकविंग और 600 ब्लैक विंग स्टील्ट रिंग सहित कई देशी प्रजातियों के पक्षियों की मौत सबसे ज्यादा हुई है. सबसे चर्चित विदेशी फ्लेमिंगों भी मौत की नींद सो गए हैं. अधिकांश प्रवासी पक्षी तो 6000 किलोमीटर दूर साइबेरिया तक से सर्दियों की शुरुआत में सांभर झील आते हैं. आलम यह है कि समय पर नहीं पहुंचने के आदी हो चुके राज्य के अधिकारी पिछले कई दिनों से जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर मृत पक्षियों को जमीन में दफना रहे हैं, ताकि कीचड़ में सड़ चुके इन पक्षियों से इन्फेक्शन ना हो जाए.

सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि जो पक्षी शुरुआत में मरे, वो दलदल में दबे हैं और उनमें मेगट्स (कीड़े) लग गए, जिन्हें खाने से दूसरे पक्षी मर रहे हैं, यानी पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू नहीं है. हालांकि, पक्षी विशेषज्ञों की मानें तो घटना हाइपर नकट्रेमिया, यानी पानी में सोडियम की अत्यधिक मात्रा होने के कारण नशा होने से हुई है. विडंबना यह है कि वन विभाग के पास तो इसकी जांच के लिए एक्सपर्ट, लैब और संसाधन तक नहीं है. यह भी माना जा रहा है कि जहां घटना हुई है, झील के उस एरिया में पानी काफी अरसे से नहीं आया था. नमक काफी गाढ़ा हो गया. बारिश में पानी आया तो इससे नमक जहरीला बन गया. अचानक यह सब कैसे हो गया? इसका सही-सही जवाब किसी के पास नहीं है. जांच के लिए अब भोपाल, कोयम्बटूर, बरेली और देहरादून में सैंपल भेजे गए हैं. रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है.

जयपुर जिला कलेक्टर जगरूप सिंह का कहना है कि हमने मामले की जांच के लिए मृत पक्षियों के अवशेष देश की अलग—अलग लैबों में भेजे हैं. संदेह है कि जब ये पक्षी यहां आये थे, तब पहले से ही मर चुके पक्षियों को इन्होंने खाना शुरू कर दिया था, जिसके चलते उनमे लगे मेगट्स कीड़े से यह हुआ है. रेस्क्यू ओपरेशन को अब और तेज कर दिया गया है. घटना के दस दिन बाद राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई सांभर झील पहुंचे. जब उनसे पक्षियों की मौत का कारण पूछा गया तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब दिया, सरकार काम कर रही है.

90 स्क्वायर किलोमीटर में फैली संभार झील के 40 फीसदी हिस्से में नमक उत्पादन होता है, जबकि इसके 60 फीसदी हिस्से को पीने के पानी के उपयोग में लिया जाता है. सांभर साल्ट से जुड़े लोगों की मानें तो यहां की प्रयोगशाला में केवल नमक से उत्पादन और नमक की गुणवत्ता की ही जांच की जा सकती है. पानी दूषित या संक्रमित हुआ है, इसकी जांच यहां सांभर साल्ट की प्रयोगशाला में संभव नहीं है. ऐसे में बीमारी फैलने की संभावना से इस झील के करीब 22 किलोमीटर के दायरे में लोगों की चिंताए बढ़ने लगी है. वैसे झील में पक्षियों के मरने से इस पूरे झील के पानी के दूषित और संक्रमित होने का खतरा बन गया है.

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