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तो जेडीयू ने भी दिखाई आंख !

फज़ल इमाम मल्लिक 

पटना .एनआरसी के मुद्दे को लेकर बिहार की सियासत में उबाल आ गया है. एनडीए के दो प्रमुख दलों के बीच इसे लेकर तलवारें खिंच गईं हैं. बयान दिए जा रहे हैं. एक-दूसरे पर हमले हो रहे हैं. विपक्ष इसका मजा ले रहा है. एनआरसी पर संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिए बयान के बाद बिहार में दोनों सहयोगी दलों ने आस्तीनें चढ़ा लीं है. घमासान जारी है और इस तूतू-मेंमें को देखते हुए विपक्ष चुटकी ले रहा है कि एक साथ रहकर यह कैसा विरोध है. हालांकि बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सफाई जरूर दी और ट्वीट किया कि बिहार के व्यापक हित में भाजपा-जदयू साथ रहें, लेकिन दूसरे राज्यों में हम अलग चुनाव लड़ते रहे हैं. दोनों दल संसद के भीतर और बाहर राष्ट्रीय मुद्दे पर अलग-अलग राय भी प्रकट करते रहे हैं. यह दो दलों का विलय नहीं, सिर्फ मुद्दा आधारित गठबंधन हुआ है, तो मत भिन्नता स्वाभाविक है. जो लोग इसे मन-भेद साबित करना चाहते हैं, उन्हे समझना चाहिए कि जब गठबंधन को प्रभावित किए बिना धारा 370 और राम मंदिर जैसा जटिल मुद्दा सुलझ सकता है, तब हम आगे भी जो मुद्दे आएंगे, उसका समाधान निकालते रहेंगे.

सुशील मोदी ने कहा कि भाजपा-जदयू गठबंधन का रिश्ता लगभग बीस साल पुराना है. दोनों दल कुछ मुद्दों पर मतभेद के बावजूद विकास के रोडमैप पर पूरी तरह एकमत हैं. इससे गरीबी दूर करने में मदद मिली और पिछड़ों को न्याय मिला. इसी गठबंधन की बदौलत बिहार का विकास हुआ. एनडीए सरकार में राज्य का बजट 36000 करोड़ से बढ़कर एक लाख 77 हजार करोड़ तक पहुंचा है, तो क्या यह बिना आपसी समझदारी के ही संभव हुआ है. दोनों दलों का टकराव अमित शाह के बयान के बाद हुआ. एनआरसी के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इसे देश भर में लागू किया जाएगा. अमित शाह के इस एलान के बाद ही जदयू ने अपना रुख साफ किया. पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने शाह के इस एलान पर पलटवार किया था. भाजपा ने भी जवाब देने में देर नहीं की. भाजपा ने दो टूक कहा कि उसे एनआरसी के मुद्दे पर किसी की सलाह की जरूरत नहीं है.


भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन के मुताबिक एनआरसी को लेकर भाजपा का स्टैंड सबको पता है. जिन्होंने हमारे साथ गठबंधन किया उन्हें भी मालूम है कि भाजपा देश में एनआरसी लागू करेगी. ऐसे में हमें किसी से विचार करने की कोई जरूरत नहीं हैं. शाहनवाज के इस बयान को नीतीश कुमार के लिए साफ संदेश माना जा रहा है. शाहनवाज ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत से बाहर जाना चाहिए. इस पर तो हर भारत से मोहब्बत करने वाले इसके पक्ष में होंगे. अपने देश के गरीबों कि चिंता करनी चाहिए. बांग्लादेशी अपने मुल्क से मोहब्बत करें. हम अपने मुल्क से करें.


शाहनवाज ने कहा कि बिहार के अंदर जदयू से गठबंधन हैं. संबंध अच्छे हैं. नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. लेकिन जदयू अलग पार्टी है. उनका निशान, उनके नेता, उनका विचार और संविधान अलग है. गठबंधन का मतलब यह नहीं है कि वे भाजपा के सारे विचारों से सहमत हों या जदयू के विचारों से भाजपा सहमत हो यह जरूरी नहीं है.


शाहनवाज हुसैन के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी मुंह खोला. लंबे समय तक चुप रहने के बाद गिरिराज सिंह ने एनआरसी के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी और कहा कि एक देश एक कानून और एक नागरिकता यही हिंदुस्तान की पहचान है. गिरिराज सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि एनआरसी है हिंदुस्तान की मांग है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलने के बाद काफी दिनों से गिरिराज सिंह चुप थे. लेकिन अब उन्होंने एनआरसी के समर्थन में ट्वीट किया है.

एनआरसी को लेकर अमित शाह का एलान के बाद जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा था कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा. पीके ने कहा था कि पंद्रह राज्यों मैं गैर भाजपा मुख्यमंत्री हैं और इन राज्यों की आबादी देश की जनसंख्या का लगभग 55 फ़ीसद है ऐसे में इन राज्यों की राय एनआरसी के लिए काफी अहमियत रखती है. बिहार में साथ-साथ चल रहे दोनों दल अब एनआरसी पर आमने-सामने हैं. हालांकि इस टकराव को लेकर आम राय यह है कि दोनों दल अपने-अपने वोटरों को ध्यान में रख कर ही इस तरह के बयान दे रहे हैं. न नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ेंगे और न ही भाजपा उन्हें छोड़ेगी.


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