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गुर्जर-मीणा विवाद में फंसा पांचना बांध

विनोद पाठक

जयपुर.राजस्थान के करौली जिले में बना पांचना बांध रबी की फसल के साथ फिर चर्चाओं में है. सवाईमाधोपुर की तहसील गंगापुर और करौली की तहसील नादौती क्षेत्र के 36 गांव पांचना बांध से पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. पानी के अभाव में गेहूं और सरसों की फसल खराब होने का अंदेशा है, लेकिन दो जातियों, गुर्जर और मीणा, के बीच विवाद के चलते बांध पिछले डेढ़ दशक से बंद पड़ा है.

1978-79 में जनता पार्टी की सरकार के समय करौली और सवाईमाधोपुर के मांड क्षेत्र में सूखे से निपटने के लिए पांच नदियों भद्रावती, बरखेड़ा, अटा, माची और भैसावर के संगम पर पांचना बांध का प्लान बना था. उस वक्त तत्कालीन केंद्रीय सिंचाई मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी के प्रयासों से बांध का काम शुरू हुआ. अमेरिका के आर्थिक सहयोग से पत्थर और मिट्टी से पांचना बांध को बनाया गया. यह राजस्थान का मिट्टी का एकमात्र बांध है. बांध 1989 में बनकर तैयार हुआ. 1997 में गंगापुर, नादौती, भरतपुर के बयाना को जलापूर्ति के लिए कैनल निर्माण शुरू हुआ, जो 2003 में बनकर तैयार हो गई. दो साल पानी मिलने से सूखाग्रस्त मांड क्षेत्र में 11 हजार 960 हैक्टेयर क्षेत्र में हरियाली लौट आई और किसानों का जीवन खुशहाल हो गया. हालांकि, उनकी यह खुशी ज्यादा दिन नहीं चली. 2006 में राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान पांचना बांध से जलापूर्ति सिंचाई विभाग ने बंद कर दी. दरअसल, बांध क्षेत्र में 12 गांव गुर्जर बाहुल्य हैं और वो नहीं चाहते थे कि मीणा बाहुल्य मांड क्षेत्र में पांचना बांध से पानी जाए.

करौली के स्थानीय पत्रकार एस. चतुर्वेदी कहते हैं कि पांचना बांध का पानी मांड क्षेत्र में जाने के लिए कैनल बनी हुई है, लेकिन आसपास के गुर्जर बाहुल्य गांवों तक पानी ले जाने की व्यवस्था नहीं है, क्योंकि यह ऊंचाई पर स्थित हैं. गुर्जरों की मांग है कि पहले उन्हें पांचना का पानी मिले. जब विवाद शुरू हुआ, तब नीरज के. पवन करौली के कलेक्टर थे. उन्होंने उस समय आश्वासन दिया था कि इन गांवों को पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट सिंचाई परियोजना बनाई जाएगी. सरकार ने इस परियोजना पर काम भी शुरू किया, लेकिन वो भी अधूरी पड़ी है. एस. चतुर्वेदी का कहना है कि यदि लिफ्ट सिंचाई परियोजना शुरू भी हो जाए तो भी झगड़ा खत्म नहीं होगा, क्योंकि बांध की भराव क्षमता 2100 एम.सी.एफ.टी है. इससे दोनों क्षेत्रों की जलापूर्ति नहीं हो सकती है. मौजूदा समय में हिंडौन क्षेत्र के किसान भी पांचना बांध से पानी की मांग करने लगे हैं. इसलिए चंबल का पानी पांचना बांध में लाने की मांग उठ रही है, जिससे सभी को पानी मिल जाए. उन्होंने बताया कि केवल अप्रैल में श्रीमहावीरजी के मेले के समय जरूर बांध से पानी छोड़ा जाता है, उसके अलावा तो पूरे साल पानी बांध में ही सूख जाता है. पानी न जाने से कैनल भी कई जगह टूट गई है.

हाल में टिवटर पर पांचना बांध खोलो ट्रेंड कर रहा था. बांध का पानी छोड़ने की मांग कर रहे ट्राइबल आर्मी के संस्थापक हंसराज मीणा का कहना है कि करीब 60 हजार ट्वीट पांचना बांध का पानी खोलने की मांग के समर्थन में किए गए. रबी की फसल का समय है और मांड क्षेत्र के किसानों को पानी नहीं मिल रहा है. किसानों को पानी नहीं मिलने से फसलें सूख जाएंगी, लेकिन राजनीति के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है. हंसराज ने राज्य सरकार को इस स्थिति के लिए दोषी ठहराया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री नहीं चाहते कि बांध से पानी छोड़ा जाए. यहां तक मंत्री के कार्यालय से मुझे कहा गया कि आप इस मसले में न पड़ो. हंसराज ने कहा कि यदि समस्या का हल नहीं हुआ तो आदिवासी आंदोलन करेंगे.

इस पूरे मामले पर राज्य के गुर्जर नेता हिम्मत सिंह गुर्जर का कहना है कि कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और किरोड़ीलाल मीणा की राजनीति के कारण यह मुद्दा सुलझ नहीं रहा है, जबकि वर्तमान में तो बांध के आसपास के गांव ही चाहते हैं कि पानी छोड़ा जाए, क्योंकि उनके खेत डूबे हुए हैं. यदि सही तरीके से इस मुद्दे को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बताया जाए तो मुद्दा सुलझ सकता है. उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी पहल करके विवाद को सुलझा सकते हैं. उन्होंने कहा कि विवाद का हल निकलना चाहिए, ताकि किसानों का भला हो सके.फिलहाल तो दो जातियों की लड़ाई में फंसी इस समस्या का समाधान नजर नहीं आ रहा है. हर साल की तरह इस बार भी मांड क्षेत्र के 36 गांव बिना पांचना बांध के पानी के ही रहेंगे.

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