नीतीश कुमार लापता हैं, पटना में लगे पोस्टर

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नीतीश कुमार लापता हैं, पटना में लगे पोस्टर

फज़ल इमाम मल्लिक 

 पटना .नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी बिहार में सियासत के केंद्र में है. विपक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू पर हमलावर है. नागरिकता संशोधन कानून बनाने में जदयू की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही है. संसद के दोनों ही सदनों में उसने विधेयक का समर्थन किया और उसके पक्ष में वोट दिया. बिहार में इससे जदयू में खलबली है. पार्टी के मुसलिम नेताओं के फोन बंद हैं. फोन कोई उठा भी रहा है तो वह तसल्लीबख्श जवाब नहीं दे रहा है. मुसलिम विधायकों व सांसदों के मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर वायरल है और लोगों से कहा जा रहा है कि वे इन नेताओं को फोन करें और नागरिकता संशोधन विधेयक पर जदयू के समर्थन पर सवाल करें. लेकिन ज्यादातर नेताओं ने अपने फोन बंद कर रखे हैं. जिला स्तर के कई नेताओं ने जदयू से इस्तीफा भी दे दिया है. पार्टी के विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी ने खुल कर इस कानून के विरोध में सड़कों पर आए. फिर प्रशांत किशोर और पवन वर्मा सरीखे नेताओं ने भी पार्टी के रुख की खुलेआम निंदा की. हालांकि इसके बाद पार्टी में संग्राम भी हुआ. पार्टी के कई नेताओं ने प्रशांत किशोर को बाहरी ठहरा कर उन्हें पार्टी छोड़ देने तक की सलाह दी. प्रशांत किशोर फिर नीतीश कुमार से मिले और मामला सेट हो गया. नीतीश के रवैये से उनके पक्ष में खड़े नेताओं को भी हैरान कर डाला और प्रशांत किशोर को बाहरी कहने वाले अपने ही बयानों से घिर कर गरेबान में मुंह छुपाने लगे. लेकिन कानून बनने के बाद एनआरसी पर भी घमासान है और नागरिकता संशोधन कानून पर भी. बिहार के कई शहरों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. मुसलमानों में गुस्सा है तो सभ्य समाज भी इस कानून पर सवाल खड़े कर रहा है. जदयू के मुसलिम नेताओं की परेशानी बढ़ गई है. विपक्ष भी हमलावर है लेकिन नीतीश कुमार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं. वे जल, जीवन और हरियाली के बहाने बिहार भ्रमण पर लगे हैं. लोगों के सवालों से भी कतरा रहे हैं और पार्टी के मुसलिम नेताओं से भी बच रहे हैं.  


नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बयानबाजी के बीच पटना में लगे पोस्टर से घमासान मचा है. सियासत भी तेज हो गई है. राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी पटना में लगे पोस्टर के मुद्दे को लेकर ट्वीट किया और नीतीश कुमार पर निशाना साधा. जिसका जवाब जदयू नेता संजय सिंह ने दिया.

पटना की सड़कों के किनारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लापता होने के पोस्टर जगह-जगह लगाए गए थे, जिसे लेकर पुलिस और प्रशासन भी सकते में है. अबतक यह पता नहीं चल पाया है कि इस तरह के पोस्टर किसने और क्यों लगाए हैं. इसे लेकर यह भी कयास लगाया भी लग रहा है कि किसी ने साजिश के तहत तो यह पोस्टर नहीं लगाए हैं. लेकिन पोस्टर सामने आने के बाद तेजस्वी ने ट्वीट किया कि मुंह पर ताला, कान पे जाला, आंख पे पट्टी, नहीं अता-पता, है वो लापता, #सीएबी_एनआरसी पर मौन, बूझो कौन.

जदयू ने इसका जवाब देने में देर नहीं लगाई. जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद को यह बताना चाहिए कि आखिर लापता कौन है. लापता का पोस्टर लगवाने से कोई लापता नहीं होता. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं और अपनी यात्राओं के साथ लोगों के बीच हैं. जल-जीवन-हरियाली यात्रा में हैं मुख्यमंत्री. अगर तेजस्वी की इच्छा है तो उक्त यात्रा में जाकर मुख्यमंत्री को सुन सकते हैं. हालांकि संजय सिंह ने केंद्र सरकार के काले कानून पर कुछ भी नहीं कहा. उन्होंने यह भी नहीं बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक पर जदयू ने लोकसभा और राज्यसभा में समर्थन क्यों किया. जदयू के सामने संकट खड़ा है और मुख्यमंत्री ही नहीं जदयू के बयानवीर भी इसे लेकर चुप हैं. मुद्दों से भटकाने में ही जदयू लगा है.


लोकसभा में जदयू के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और राज्यसभा में चर्चा के दौरान आरसीपी सिंह ने विधेयक के पक्ष में चर्चा किया था. लेकिन जयदू के बयानवीरों को समझ में ही नहीं आरहा है कि उन दोनों नेताओं ने किन मुद्दों पर विधेयक का समर्थन किया था. बस वे इतना ही कह रहे हैं कि मामला देश का है. लेकिन उनसे सवाल किया जा रहा है कि 2015 में जिन मुसलमानों ने उन्हें वोट देकर मुख्यमंत्री बनाया, उनके खिलाफ क्यों गए नीतीश कुमार. लालू यादव ने उन्हें पलटू राम कहा था, अब उनके वोटर भी नीतीश कुमार को पलटू राम कह रहे हैं. जदयू के कई मुसलमान विधायकों ने भी ढके-छुपे लफ्जों में पार्टी प्रमुख के फैसले का विरोध किया है. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को समझाने की कोशिश की है लेकिन उनका कहना है कि वे अपने क्षेत्र में जा नहीं पा रहे हैं और मुसलमान उनसे सवाल कर रहे हैं.


पटना में लगे पोस्टरों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर लापता बताया गया है. लिखा गया है कि वे अदृष्‍य मुख्‍यमंत्री हैं, जो पांच साल में एक बार शपथ ग्रहण समारोह में नजर आते हैं. एक में उन्हें अदृश्य मुख्यमंत्री बताया गया है. इन पोस्टरों पर आरजेडी नेता एज्या यादव ने कहा कि हमारी पार्टी इस तरह की ओछी हरकत नहीं करती है. राजद को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को इस मामले की जांच करनी चाहिए. पटना में लगे इन पोस्टरों में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के लापता होने की सूचना है. दूसरे पोस्टर में लिखा है कि उन्‍हें ढूंढने वाले का बिहार सदा आभारी रहेगा. एक अन्य पोस्टर में नीतीश कुमार को अदृश्य मुख्यमंत्री बताते हुए लिखा गया है कि वे पांच साल में केवल शपथ ग्रहण समारोह में नजर आते हैं.

इन पोस्टरों को लेकर प्रशासन भी सकते में है. हालांकि पटना नगर निगम के नूतन राजधानी अंचल के राजस्व पदाधिकारी ने नीतीश कुमार के खिलाफ पोस्टरबाजी के मामले में कोतवाली और शास्त्री नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. अधिकारी ने अज्ञात लोगों पर एफआइआर कराई है. पटना जंक्शन के आसपास, वीरचंद पटेल पथ सहित कई स्थानों पर पोस्टर लगाने पर संपत्ति विरुपण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराई है. इसी तरह राजस्व पदाधिकारी ने बेली रोड पर पोस्टर लगाए जाने के कारण शास्त्री नगर थाने में आवेदन दिया था.


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