जनादेश

भोपाल में भी शाहीन बाग! कहां और कैसे होगा न्याय? जदयू में अब खुलकर सिर फुटव्वल ! अभी खत्म नहीं हुआ खिचड़ी का महीना ! महिला कलेक्टर पर टिप्पणी से मचा बवाल बाग़ बगीचा चाहिए तो उत्तराखंड आइए ! यह लखनऊ का शाहीन बाग़ है ! ज्यादा जोगी मठ उजाड़ ! जगदानंद को लेकर रघुवंश ने लालू को लिखा पत्र कड़ाके की ठंढ से बचाती 'कांगड़ी ' यही समय है दही खाने का ! निर्भया के बहाने सेंगर को भी तो याद करें ! डॉक्टर को दवा कंपनियां क्या-क्या देती हैं ? एमपी के सरकारी परिसरों में शाखा पर रोक लगेगी ? एक थे सलविंदर सिंह मुख्यमंत्री पर जदयू भाजपा के बीच तकरार जारी वाम दल सड़क पर उतरे जाड़ों में गुलगुला नहीं गुड़ खाएं ! नए दुश्मन तलाशती यह राजनीति ! कलेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हो-सीबीआई

यह पोस्टर देख रहे हैं !

अंबरीश कुमार

यह पोस्टर देख रहे हैं .यह रवि और एकता ने बनाया है .यह बस्तर के जंगल का दृश्य है .माओवादियों के विरोध के बावजूद उनके गढ़ में जाकर ऐसा पोस्टर चस्पां कर देना किसी के बस की बात नहीं है .फोटो मैंने ही खींची थी .और इसके करीब घंटे भर बाद ही उधर माओवादियों ने हमला कर दिया .ये वही रवि और एकता है जो एक दशक से साफ़ हवा और पानी का सवाल उठा रहे हैं .समाज का काम कर रहे हैं .अच्छी नौकरी छोड़कर .वे हवा और पानी का सवाल उठाते हैं .वे जेल में है .साल भर की बच्ची बाहर है .वह हर कुछ देर बाद रोती है बिलखती है फिर थक हार कर सो जाती है .और अपना समाज भी सो जाता है .जानना चाहिए कौन है रवि और एकता . कुछ साल पहले मुझे दो सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के सिंगरौली में आमंत्रित किया ताकि बैगा आदिवासियों की बदहाली को देखूं और उसपर कुछ लिखूं .मैं सोनभद्र से शक्तिनगर गया तो रवि और एकता रास्ते में ही मिल गए .यह पहली मुलाकात थी दोनों उच्च शिक्षा लेने के बाद पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता की तरह सिंगरौली जैसी जगह में किसान मजदूरों के बीच काम कर रहे थे .यह बहुत जोखम भरा काम था क्योंकि बड़ी कंपनियों को यह पसंद नहीं था कि कोई उनके मजदूरों के अधिकारों को लेकर जागरूक करे .एकता कुछ समय ग्रीन पीस से भी जुड़ी पर फिर उसे छोड़ दिया .कुछ रपट लिखने और अनुवाद करने से जो पैसा मिलता उससे वे अपना खर्च चलाते .उन्हें अच्छी नौकरी के प्रस्ताव भी मिले पर उन्होंने समाज के काम को प्राथमिकता दी .रवि एकता के साथ बात करते करते हम मध्य प्रदेश के बैढन कस्बे की हरी-भरी पहाड़ियां पर आगे बढ़ रहे थे .इतनी हरी भरी पहाड़ियों देखकर लगता नहीं कि यह देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित अंचलों में शामिल है. रास्ते में पड़ने वाली कई नदियों का पानी पूरी तरह काला देखकर हैरानी हुई.पता चला यह कोयला खदानों के प्रदूषण की वजह से हुआ है.सिंगरौली का जिला मुख्यालय बैढन कोयले और बिजली घरों की फ्लाईऐश से घिरा हुआ है. सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट (निर्माणाधीन) से लेकर मझगवां, सिद्धिकलां,गहिल्गढ़ और खैराही में एस्सार समेत कई बिजलीघर अभी बन रहे थे .सासन प्लांट ने तो कोयला ले जाने के लिए करीब चौदह किलोमीटर लंबी खुली कन्वेयर बेल्ट लगा रखी है. यहां से उठने वाली कोयले की धूल पूरे इलाके में लोगों का जीना मुहाल कर देगी. कई आदिवासी परिवार इन योजनाओं के चलते यहां से जा भी चुके हैं.इसपर एक बड़ी रपट नवभारत टाइम्स में प्रकाशित भी हुई .यह अपनी रवि एकता से पहली मुलाक़ात थी .जिसकी वजह से इस अंचल के बारें में जानकारी मिली .हमें जेपी की बनाई छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का दौर याद आ गया .बोध गया आंदोलन से लेकर गंगा मुक्ति आंदोलन की बैठकें और शिविर भी .उसी समय पूर्णकालिक प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को देखा था .फिर अब देख रहा था .रवि और एकता को लखनऊ बुलाया ताकि उनसे आगे के बारे में बात की जाए .

इस बीच दक्षिण एशिया वर्ल्ड सोशल फोरम का एक बड़ा आयोजन कराने की जिम्मेदारी मित्र लोगों ने मुझे दी हालांकि अपनी कोई इच्छा नहीं थी और लखनऊ में कार्यकर्त्ता भी कम थे .बैठक हुई तो दफ्तर संभालने के लिए दो कार्यकर्ताओं की जरुरत थी खासकर सोशल फोरम का सेक्रेटेरियट का काम देखने और बैठको का आयोजन करने के लिए .फिर इन्ही दोनों ने जिम्मेदारी संभाली .कई दौरे भी हुए . काठमांडू भी गए सोशल फोरम की बैठकों में हिस्सा लेने .इस बीच इन्हें फिर दिल्ली में काम करने का प्रस्ताव मिला पर्यावरण जैसे मुद्दे पर ही पर दोनों ने सिंगरौली के आदिवासी किसान मजदूरों का साथ छोड़ने से मना कर कर दिया.ऐसी प्रतिबद्धता बहुत कम दिखती है .लोकसभा का चुनाव आया तो आदिवासी अंचल बस्तर के एक संसदीय सीट से सोनी सोरी चुनाव लड़ रही थी .आम आदमी पार्टी ने उन्हें चुनाव में खड़ा किया था .बस्तर के कुछ मित्रो का आग्रह था की कुछ कार्यकर्त्ता चुनाव प्रबंधन और प्रचार के लिए वहां पहुँच सके तो उनकी मदद हो जाएगी .सोनी सोरी का क्षेत्र बहुत ही दुर्गम इलाके में था .पुलिस के साथ माओवादी भी सोनी सोरी के खिलाफ थे .हमले आदि भी हो रहे थे .ऐसे में मैंने रवि एकता से पूछा कि क्या वे जा सकते हैं तो वे ख़ुशी से राजी हो गए .रायपुर से वे मेरे साथ ही गए .सोनी सोरी के घर उन्हें छोड़ा .फिर उनसे एक बार पूछा कि कोई डर हो तो बता दें क्योंकि मुझे आंध्र होते हुए दिल्ली लौटना था .पर वे वहीँ जमे रहे और चुनाव में काम भी किया .आदिवासियों के बीच उन्हें काम करने का अनुभव भी था .साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों को समझने की ललक भी रही .

खैर मैं लौट आया पर संपर्क बना रहा .इस बीच कुछ दिक्कतों के चलते उन्हें सिंगरौली छोड़ना पड़ा .वे अपने घर बनारस आ गए .पर पर्यावरण के मुद्दे पर ही यहां भी काम शुरू किया .शहर को साफ़ हवा मिले इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की .बीच में वे मिले भी और बताया कि हवा पानी के सवाल को ही उठा रहे हैं .इस बीच उन्हें एक बेटी हुई जिसकी अक्सर फोटो वे फेसबुक पर डालते .चंपक नाम रखा उसका .बहुत छोटी थी तो वे उसे अपने साथ कार्यक्रम में भी ले जाते .पर्यावरण के सवाल ही वे ज्यादातर उठाते रहे हैं इसलिए कभी थाना पुलिस जेल की नौबत नहीं आई .पर वाराणसी के शांतिमय प्रदर्शन में वे शामिल हुए और जेल भेज दिए गए .अमूमन प्रदर्शन करने वालों को शाम तक छोड़ दिया जाता है यही सोचकर वे गए थे पर इस बार ऐसा नहीं हुआ .दूध पीती बच्ची घर में और उसके मम्मी पापा यानी रवि एकता जेल में .इसे लेकर बहुत लोगों ने वाराणसी के जिला प्रशासन का ध्यान इस तरफ खींचा पर कोई असर नहीं .एक जमाना था चीफ जस्टिस भगवती का जो एक पोस्ट कार्ड को भी याचिका मानकर इंसाफ कर देते थे .एक समय यह है है कि अख़बार ,वेब साईट और चैनल इस दंपति और उस बच्ची की पीड़ा दिखा रहे हैं पर जिला प्रशासन पसीज नहीं रहा है .यह ठीक नहीं है .


Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :