जनादेश

भोपाल में भी शाहीन बाग! कहां और कैसे होगा न्याय? जदयू में अब खुलकर सिर फुटव्वल ! अभी खत्म नहीं हुआ खिचड़ी का महीना ! महिला कलेक्टर पर टिप्पणी से मचा बवाल बाग़ बगीचा चाहिए तो उत्तराखंड आइए ! यह लखनऊ का शाहीन बाग़ है ! ज्यादा जोगी मठ उजाड़ ! जगदानंद को लेकर रघुवंश ने लालू को लिखा पत्र कड़ाके की ठंढ से बचाती 'कांगड़ी ' यही समय है दही खाने का ! निर्भया के बहाने सेंगर को भी तो याद करें ! डॉक्टर को दवा कंपनियां क्या-क्या देती हैं ? एमपी के सरकारी परिसरों में शाखा पर रोक लगेगी ? एक थे सलविंदर सिंह मुख्यमंत्री पर जदयू भाजपा के बीच तकरार जारी वाम दल सड़क पर उतरे जाड़ों में गुलगुला नहीं गुड़ खाएं ! नए दुश्मन तलाशती यह राजनीति ! कलेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हो-सीबीआई

यह दो हजार बीस का युवा आक्रोश है !

अंबरीश कुमार 

नई दिल्ली .देश के मेघावी छात्र सड़क पर हैं .वे फैज की नज्म गा रहे हैं 'हम देखेंगे .' संविधान की प्रस्तावन पढ़ रहे हैं .कभी देखा है आपने किसी विश्वविद्यालय में छात्रों को संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए .ये कोई फिसड्डी छात्र नहीं हैं .ये नब्बे फीसद से ज्यादा नंबर लाने वाले छात्र हैं .ये जिन कालेजों से आते हैं वहीँ से देश के सबसे ज्यादा आईएएस ,आईपीएस,प्रबंधक ,इंजीनियर आदि निकलते हैं .ये ही कल देश पर राज करेंगे जो आज संविधान को हाथ में लिए सड़क पर उतर चुके हैं .इनका नेतृत्व छात्राओं के हाथ में हैं .इन्हें कोई बरगला नहीं सकता .ये झांसे में नहीं आने वाले .ये देश का भविष्य हैं .ये अहिंसक आंदोलन कर रहे हैं .इन्हें दबाना आसान नहीं है .इनसे संवाद करना होगा .

हमने चौहत्तर का ऐतिहासिक छात्र युवा आंदोलन देखा है . हिस्सा भी लिया .उससे पहले 1967 के युवा आक्रोश के बारे में सुना और पढ़ा भी .वह आंदोलन नक्सलबाड़ी से निकला और बंगाल ,अविभाजित बिहार के साथ आसपास तक फ़ैल गया .कांग्रेस की सरकार थी खूब दमन हुआ .खूब लिखा गया .मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी  ने ‘हजार चौरासी की मां 'लिखा .उन्होंने इस आंदोलन को  एक मां की नजर से देखा.खैर इसके बाद चौहत्तर का छात्र आंदोलन हुआ जो गुजरात से शुरू हुआ और बिहार ,उत्तर प्रदेश तक फ़ैल गया .बाद में जय प्रकाश नारायण ने आंदोलन की कमान संभाली .यह आंदोलन मेस में समोसे और खाने की फ़ीस बढाने के विरोध में शुरू हुआ था .इसे ध्यान रखियेगा तब कुछ समझ पाएंगे .और शुरू हुआ था ज्यादा पढ़ाई वाले इंजीनियरिंग कालेज से .जो बढ़ा और ऐसा बढ़ा कि इंदिरा गांधी जैसी ताकतवर प्रधानमंत्री को सत्ता से जाना पड़ा .तब जब उन्होंने 1971में पकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया था .वह दौर था जब अमेरिका का सातवां बेडा भी उन्हें डरा नहीं पाया और वापस लौट गया .ऐसी इंदिरा गांधी को सत्ता से हटना पड़ा .वह आंदोलन कोई बहुत बड़ा नहीं था .न ही किसी बड़े मुद्दे से शुरू हुआ .उस दौर में जेपी जब पहली बार लखनऊ आए और गांधी भवन में बैठे तो दर्जन भर लोग आए थे शुरू में .अब महाश्वेता देवी जैसी कोई मां नहीं है ,जेपी जैसा कोई अभिभावक नहीं है .पर लाखों की संख्या में छात्र युवा तो हैं .उन्हे सुना है कभी .चेन्नई के आईआईटी के किसी छात्र से बात कर देखिए नहीं तो दिल्ली के सेंट स्टीफेंस की किसी छात्रा को सुन लीजिए ,वे क्यों मांग रही हैं आजादी ? अब तक सौ से ज्यादा कैंपस तक कैसे पहुंच गए इंकलाबी फैज अहमद फैज .वह भी बिना किसी नेतृत्व के .जबकि 

वह चौहत्तर था पर यह दो हजार बीस है .एक पीढ़ी का फर्क आ चुका है .भूगोल को देखें तो चौहतर का आंदोलन भी इतना व्यापक तो नहीं था .उस आंदोलन का असर बिहार में ज्यादा था पर अपील देश भर में थी . वह कोई बहुत पढ़े लिखे मेधावी छात्रों का था भी नहीं . तब भी समाज का बड़ा तबका इंदिरा गांधी सरकार के समर्थन में था और इमरजेंसी लगने के बाद बड़े गर्व से बताता था कि देखिए ट्रेन समय पर चलने लगी है .अपराध कम हो गया है .ये उस दौर के मुहावरे थे जैसे आज का मुहावरा 'टुकरा टुकरा गैंग 'है .आजादी का नारा है जिसे आईटी सेल ने कश्मीर से जोड़ दिया .अब खुराफात वाला दिमाग तो अलग ही होता है .वह बिना इंटरनेट के ऐसी अफवाह फैला देता है कि लोग गणेश जी को दूध पिलाने चले जाते हैं .कभी छपाक फिल्म में हिंदू मुसलमान करा देता है .और वो लोग यकीन करते हैं जो सुनी सुनाई बातों पर ही चलते भी हैं .ऐसे लोगों को कुछ ध्यान देना चाहिए .

खैर पहले उस आंदोलन को जाने .चौहत्तर के जेपी आंदोलन की दो धारा थी एक दलीय और दूसरी निर्दलीय .छात्र युवा संघर्ष वाहिनी निर्दलीय थी .जो दलीय थे उनमें से लालू ,नीतीश ,पासवान आदि निकले निर्दलीय में बहुत से लोग पत्रकार बन गए बहुत से एक्टिविस्ट ही रहे .पर निर्दलीय धारा ने भी बदलाव के बड़े काम किए .लोग उच्च शिक्षा छोड़कर जेपी की काल पर आंदोलन से जुड़े .बोधगया का आंदोलन बड़ा आंदोलन था मठ के खिलाफ .हजारों एकड़ भूमि को मठ के चंगुल से छुड़ाकर बांटा गया हाशिए के लोगों में .गंगा मुक्ति आंदोलन के चलते गंगा पर पानी की जमीदारी खत्म हुई .आज भी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी से जुड़े लोग देश के विभिन्न हिस्सों में बदलाव की राजनीति में है .गुमनाम है पर काम कर रहे है .और दूसरी धारा के नीतीश ,पासवान आज भी सत्ता में है .ये सब उसी छात्र आंदोलन से निकले .पर छात्रों का मौजूदा आंदोलन दमन और उत्पीडन से निकला है .वह पुलिस के दमन से तेज हुआ तो छात्र छात्राओं पर हुए बर्बर हमले से और फ़ैल गया .जो आजादी का नारा जेएनयू में लगता था वह सौ से ज्यादा परिसर में पहुंच गया . 

ये ' आजादी ' वाला नारा कौन कौन कहां कहां लगा रहा है इसे देखना चाहिए .यह देश के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे मेघावी छात्र हैं .इनमें आईआईटी ,मद्रास ,मुंबई ,कानपुर समेत कई कैंपस हैं .आईआईएम अमदाबाद ,मुंबई समेत प्रबंधन के शीर्ष कालेज के छात्र हैं .पांडिचेरी विश्वविद्यालय ,हैदराबाद का उस्मानिया विश्वविद्यालय ,केरल के विश्वविद्यालय .उत्कल रमादेवी विश्वविद्यालय ,ओड़िसा .रविंद्रभारती विश्वविद्यालय ,बंगाल .जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय छात्र परिषद ,हिमाचल विश्वविद्यालय .मुंबई विश्वविद्यालय ,टाटा इंस्टीट्यूट ,कर्नाटक के कई विश्वविद्यालय ,चंडीगड़ पंजाब विश्वविद्यालय ,पटना विश्वविद्यालय,असम के सभी कालेज विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं .अब आइये दिल्ली में .दिल्ली का सबसे आभिजात्य कालेज है सेंट स्टीफेंस जिसमें 98 .99 फीसदी वालों का प्रवेश होता है .इनमें ज्यादातर आईएएस .आईपीएस ,डाक्टर ,शीर्ष नेताओं के बच्चे पढ़ते हैं .कोई छात्र  संघ है ही नहीं जो राजनीति की बात करे .फिर भी कल यहां के छात्र नारा लगा रहे थे ,हमें चाहिए आजादी .किससे आजादी तो मनुवाद से आजादी ,जातिवाद से आजादी ,भेदभाव से आजादी .यह भी ध्यान रखें वर्ना आईटी सेल कमजोर बुद्धि वालों को पहले निशाना बना देता है फ़ौरन कश्मीर पकिस्तान पहुंचा देगा .पर इस नारे से पहले उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया .ये छात्र संविधान पढ़ रहे हैं .यह मैंने इससे पहले के किसी आंदोलन में कभी नहीं देखा .दूसरा इस आंदोलन की कमान छात्राओं के हाथ में है .इसकी शुरुआत जामिया में हुई हिंसा ,जेएनयू और एएमयू की हिंसा से ज्यादा तेज हुई है .जामिया में जो पुलिस ने किया उसका विरोध देश के अग्रणी शिक्षा संस्थाओं में ही नहीं विदेशों के बड़े शिक्षा संस्थाओं में भी हुआ .ब्रिटेन ,अमेरिका ,कनाडा ,पकिस्तान ,आस्ट्रेलिया जैसे बहुत से देशों के पढने वाले छात्र सडक पर उतर आए .जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई तो अमेरिका में छात्रों का प्रदर्शन हुआ जिसमें एक का नेतृत्त्व आंनद कुमार ने किया जो बाद में प्रोफ़ेसर बने .पर तब भी ऐसा व्यापक आक्रोश देश विदेश में देखने को नहीं मिला .यह अभूतपूर्व है .यह दो हजार बीस का छात्र युवा आक्रोश है .यह दमन के खिलाफ खड़ा हो गया है .वे फोटो देखी आपने जो पहले जामिया से आई .किस बर्बरता से पुलिस ने छात्र छात्राओं को पीटा .डराया ,धमकाया और गाली दी .यह फ़ैल गया देशभर में .यह इंटरनेट का दौर है .इसे दबाना आसान नहीं है .और देश के आर्थिक हालात ने युवाओं में असुरक्षा की जो भावना भर दी है .उससे कैसे उन्हें उबारेंगे .बेहतर होगा संवाद कीजिए .

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :