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कलेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हो-सीबीआई

फज़ल इमाम मल्लिक

पटना .बिहार में नीतीश कुमार के सुशासन के दावों की कलई खोल कर रक दिया है सीबीआई ने. भ्रष्टाचार से लेकर गवर्नेंस पर भाषणों में ज्ञान बघारने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज में सरकार किस तरह काम करती रही है, सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के हलफनाम ने इसे साफ कर दिया है. नीतीश कुमार पंद्रह सालों में किस तरह सरकार चला रहे थे, इस एक हलफनामे से उनके चेहरे की चमक को धुंधला कर डाला है. सीबीआई ने एक-दो नहीं बल्कि राज्य के पच्चीस डीएम के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की है. शेल्टर होम में अमानवीय बर्ताव व बच्चे-बच्चियों के यौन शोषण को लेकर सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपी और सुशासन के पंद्रह सालों में बदहाल बिहार का सच सामने रखा है. 

इस सच में नीतीश कुमार के फरेब और पाखंड की अक्कासी होती है. सीबीआई ने राज्य के सत्रह शेल्टर होम की जांच के बाद जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है उसमें नीतीश कुमार के कई मुंहलगे और चहेते अफसरों पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की है. हालांकि सीबीआई ने ‘तोंद वाले अंकल’ और ‘मूंछ वाले अंकल’ का उल्लेख नहीं किया है. नेताओं को सीबीआई बचा ले गई है क्योंकि बिना सरकार के संरक्षण में इतने बड़े पैमाने पर देह व्यापार का धंधा चल ही नहीं सकता था. 


कहा जा सकता है कि सीबीआई ने साफ कर दिया है कि शेल्टर होम में बिहार सरकार की देखरेख में देह-व्यापार का धंधा फलफूल रहा था. सीबीआई ने पच्चीस डीएम के साथ-साथ 46 अफसरों पर कार्रवाई करने को कहा है. बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार इन अफसरों और अपने चहेते डीएम के खिलाफ कार्रवाई करेंगे क्या. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के मुजरिमों को बचाने के लिए नीतीश कुमार और उनकी पुलिस ने कम पाखंड नहीं किया था. केस को कमजोर किया था. पाक्सो की धाराएं भी नहीं लगाईं गईं थी. मामला सुप्रीम कोर्ट नहीं जाता तो सच सामने नहीं आता. 

सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की है. हालांकि अफसरों का नाम सामने नहीं आया है. इस मामले में 14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है. सीबीआइ के दायर हलफनामे के मुताबिक बिहार के 17 शेल्टर होम में बच्चों से यौन शोषण और प्रताड़ना के मामले में राज्य के 25 जिलाधिकारी और 46 दूसरे सरकारी अफसरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है. अब सीबीआइ की अनुशंसा पर सरकार उन पर क्या कार्रवाई करती है, यह देखने वाली बात होगी. 

सीबीआइ ने बिहार के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर इन सभी सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है. इसके साथ ही प्रदेश के 52 स्वंयसेवी संस्थाओं को काली सूचि में डालने को कहा है और उनका रजिस्ट्रेशन रद करने की भी अनुशंसा की गई है. सीबीआइ ने ये सारी जानकारी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए अपने हलफनामे में दी है, जिसमें कहा गया है कि जांच एजंसी ने सभी 17 शेल्टर होम्स की जांच पूरी कर ली है, जिसमें अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आई है. इससे संबंधित रिपोर्ट अदालतों में दायर की जा चुकी है. सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ के एसपी देवेंद्र सिंह ने वकील के माध्यम से अपना हलफनामा दायर किया. हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 नवंबर, 2018 को उन्हें मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के अतिरिक्त बिहार के सोलह दूसरे शेल्टर होम की जांच करने का आदेश दिया था और उन्होंने जांच की.


 पटना के नारी गुंजन, कैमूर के ज्ञान भारती, गया के सेवा कुटीर और मधुबनी के एक शेल्टर होम की भी जांच की. यहां संचालकों के खिलाफ सबूत तो नहीं मिले, लेकिन अफसरों की लापरवाही सामने आई. इसलिए अफसरों पर कार्रवाई की बात कही है. सीबीआई ने चिल्ड्रेन होम फॉर ब्वायज, गया के साथ-साथ दो डीएम, एक सरकारी अधिकारी और तेरह चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के सदस्य व प्राइवेट व्यक्तियों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है. इसके अलावा सीबीआई ने इन शेल्टर होम और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की हैः 1.चिल्ड्रेन होम फॉर ब्वायज, भागलपुर- दो डीएम, तीन सरकारी अधिकारी और छह गैरसरकारी व्यक्ति.  2. शॉर्ट स्टे होम, मुंगेर- यहां पर अधिकारियों को इंस्पेक्शन के संबंध में विशेष निर्देश दिए जाने की जरूरत है. 3. चिल्ड्रेन होम फॉर ब्वॉयज, मुंगेर- एक डीएम और दो गैरसरकारी लोगों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश. 4. शॉर्ट स्टे होम, पटना - एक डीएम, दो सरकारी अधिकारी और तीन संस्थाओं, 5. कौशल कुटीर, पटना- एक सरकारी अधिकारी, 6. चिल्ड्रेन होम फॉर ब्वॉयज, मोतीहारी- दो डीएम, 7. शॉर्ट स्टे होम, मोतीहारी- पांच डीएम, पांच सरकारी अधिकार और एनजीओ की एक सखी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की गई है. 


इनके अलावा कैमूर के स्टेहोम और सात डीएम व ग्यारह सरकारी अधिकारी, मधेपुरा के स्टेहम और एक डीएम व पांच सरकारी अधिकारी और अररिया के आब्जर्वेशन होम, एक डीएम और पांच सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश सीबीआई ने की है. इनके अलावा चार शेल्टर होम के खिलाफ सबूत तो नहीं मिला लेकिन वहां अफसरों की लापरवाही दिखी. इनमें मधुबनी, पटना व कैमूर की स्पेशलाइज्ड अडॉप्शन एजेंसी व गया की सेवा कुटीर शामिल हैं. इन चार शेल्टर होम के लिए तीन जिलाधिकारी और तेरह सरकारी अधिकारी व सत्रह संस्थाओं को काली सूची में डालने की सिफारिश की गई है. 


जाहिर है कि इसके बाद सियासी भूंचाल मचना ही था. विपक्ष ने सीबीआई के इस हलफनामे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा. रालोसपा के राषट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने तो इसे सरकार की बड़ी नाकामी बताया. उन्होंने नीतीश कुमार के सुशासन और विकास के दावों पर सवाल उठाया और कहा कि जिस प्रदेश के 38 में से 25 जिलाधिकारी को शेल्टर होम यौन शोषण में सीबीआई दोषी मान कर उन पर कार्रवाई करने की सिफारिश कर रही हो, उससे समझा जा सकता है कि बिहार में अघोषित जंगल राज है और उसका मुखिया इसे बढ़ावा दे रहा है. कुशवाहा ने मुख्यमंत्री के सुशासन और सिद्धांतों पर ज्ञान बांटने पर तंज कसते हुए कहा कि यह अद्भुत है. 


कुशवाहा ने तो यहां तक कहा कि कार्रवाई जिलाधिकारियों और दूसरे अफसरों पर नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर होनी चाहिए. अपने अंतरात्मा की दुहाई देने वाले नीतीश कुमार अब चुप क्यों हैं, उनके राज में बिहार के पच्चीस जिलाधिकारी बच्चियों-बच्चों के साथ दुष्कर्म और दूसरे तरह के घिनौने काम में शामिल पाए जाते हैं और उनकी अंतरात्मा सोई हुई है, इसे कहते हैं बेशर्मी की इंतहा. उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्रीजी की नैतिक जिम्मेदारी कुछ बनती है या नहीं. सीबीआई का हलफनामा नीतीश कुमार के पंद्रह साल के शासन पर रिपोर्ट कार्ड है, जिसमें सरकार का सुशासन मुंह चिढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है और गरीब व लाचार बच्चे व बच्चियों की आहें और सिसकियां सुनाई दे रहीं हैं.

राजद और कांग्रेस ने सीबीआइ को जांच का दायरा बढ़ा कार्रवाई करने की मांग की है. राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा है कि वर्तमान सरकार के संरक्षण में इतना बड़ा कांड हुआ है. इसीलिए पूरी सरकार पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में बिहार में रोज घोटाला हो रहा है. कांग्रेस नेता अवधेश सिंह ने सीबीआई को जांच का दायरा बढ़ाकर कार्रवाई करनी चाहिए. इस मामले में शामिल कोई भी हो, बचना नहीं चाहिए. हम लोगों ने तो विधानसभा में भी इस मामले को उठाया था. फोटो साभार द प्रिंट 

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