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वाम दल सड़क पर उतरे

डा लीना

पटना. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा ग्रामीण मजदूरों व किसान संगठनों के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल व ग्रामीण भारत बंद के दौरान 8 जनवरी को बिहार में मिला जुला असर दिखा. राजधानी पटना सहित अन्य जिला केंद्रों पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, ग्रामीण मजदूरों, किसान संगठनों और वाम दलों के नेता हड़ताल/बंद के समर्थन में सड़क पर उतरे और अपनी एकजुटता जाहिर कर केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ़ विरोध जताया.

बंद के दौरान समर्थकों का मुख्य निशाना ट्रेन परिचालन रहा. सडकों पर बंद समर्थकों ने जुलूस निकाल कर केंद्र सरकार विरोधी नारे लगाए. हड़ताल एवं ग्रामीण इलाकों में बंद के चलते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर अधिकतर बैंकों में काम नहीं हुआ. सड़क यातायात और ट्रेन सेवा बाधित रही. सभी जिलों में श्रमिक संगठनों और वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.


केंद्र की मोदी सरकार की विनिवेश, निजीकरण और श्रम सुधार नीतियों के खिलाफ बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का बिहार में कहीं व्यापक असर देखा गया तो कहीं पर कम रहा. वहीं वाम दलों के नेताओं ने राज्य में हड़ताल और बंद को पूरी तरह सफल बताया है. पटना की सड़कों पर परिचालन यथावत था लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाली तो कई इलाकों में यातायात परिचालन बाधित हुआ. वही बैंक सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा. कई बैंकों में ताले लटके रहे. इससे लेन देन बाधित हुआ.


देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर, राज्य स्थायी समिति के सदस्य राजाराम, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, मधु आदि नेता भी सड़क पर उतरे.  ऐपवा ने भी देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में अलग से जुलूस निकालकर हड़ताल का समर्थन किया. राजधानी पटना में आइसा व अन्य छात्र संगठनों ने छात्र हड़ताल की घोषणा की थी, जिसका बर्बरता से दमन करने का आरोप भी लगा है. वाम दलों का आरोप है कि कालेज आफ कामर्स में छात्र हड़ताल करा रहे आइसा व अन्य छात्र संगठनों के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया तथा उनपर झूठे मुकदमे थोप दिए. हालांकि बाद में दबाव पड़ने पर रिहा किया गया. पटना के डाकबंगला चौराहा पर संयुक्त सभा हुई, जिसकी अध्यक्षता सीटू के गणेश शंकर सिंह ने संबोधित किया. सभा को खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा, सरोज चैबे, शशि यादव,  रणविजय कुमार तथा अन्य संगठनों के नेताओं और सीपीआई व सीपीएम के राज्य सचिव ने संबोधित किया. धीरेन्द्र झा ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश में जनता एक तरफ है और भाजपा दूसरी तरफ. संविधान एक ओर है और दूसरी ओर मनुस्मृति है. आज पूरा देश मोदी सरकार की फासीवादी, मजदूर-किसान विरोधी व नागरिकता विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क पर है. बौखलाई भाजपा कहीं पुलिस से हमले करवा रही है, कहीं नकाबपोश गुंडे भेजकर हमला करवाया जा रहा है. भाजपा व आरएसएस के लोग कान खोलकर सुन लें, उनकी धमकियों व दमन से यह आंदोलन अब रूकने वाला नहीं है. यह सरकार मंदी का तो इलाज नहीं करती, लेकिन श्रम कानूनो में संशोधन करके मजदूर वर्ग के हकों पर लगातार हमला कर रही है. आशाकर्मियों की नेता शशि यादव ने कहा कि आज बिहार की हजारों आशाकर्मी हड़ताल पर हैं. केंद्र व राज्य की सरकारों ने उनके साथ विश्वासघात किया है. आज बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं आशाकर्मियों की बदौलत चल रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें 1000 रु. मानेदय भी नहीं देना चाहती है. रसोइया संघ की महासचिव सरोज चैबे ने कहा कि विद्यालय रसोइयों को न्यूनतम वेतनमान नहीं देना न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन है. ऐक्टू से संबद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसेाइया संघ व आल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन ने इसके पहले बुद्ध स्मृति पार्क से जुलूस निकाला, जिसका नेतृत्व सरोज चौबे के अलावे संघ की सचिव सोना देवी, माधुरी गुप्ता, रीता देवी आदि ने किया. प्रदर्शन में आंगनवाड़ी सेविका-सहायकिायें भी बड़ी संख्या में शामिल थीं.


जहानाबाद में माले कार्यकर्ताओं ने ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में जहानाबाद स्टेशन से कारगिल चौक तक मार्च किया. गया में प्रखंड मुख्यालयों व चट्टी बाजारों पर मार्च निकाल गया. पटना ग्रामीण के विभिन्न इलाकों में अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले खेत-खलिहानों में बंद का आह्वान किया गया, जिसका व्यापक असर देखा गया. आरा, अरवल, सिवान, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, नालंदा, नवादा, गोपालगंज, कटिहार आदि तमाम जगहों पर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में भाकपा-माले कार्यकर्ता सड़क पर उतरे.

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