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एक थे सलविंदर सिंह

गिरीश मालवीय 

नई दिल्ली .नही ये डीएसपी देविंदर सिंह नही है.ये है पंजाब पुलिस के एसपी सलविंदर सिंह. शायद आप इन्हें पहचान नही पा रहे होंगे.खैर मैं ही बता देता हूँ कि यह एसपी सलविंदर सिंह साहब पठानकोट के आतंकियों को अपनी गाड़ी में बिठा कर पठानकोट के पास तक ले गए थे .सलविंदर सिंह का कहना था कि आतंकवादियों ने उन्हें घने जंगल में फेंक दिया और उनकी नीली बत्ती लगी आधिकारिक एसयूवी लेकर फरार हो गए। बाद में आतंकी इसी एसयूवी में सवार होकर पठानकोट पहुंचे ओर पठानकोट में आर्मी बेस कैम्प पर हमला हुआ.


एसपी का कहना है कि वह पठानकोट के पास स्थित एक धार्मिक स्थल पर दर्शन के लिए जा रहे थे, जहां वो नियमित दर्शन के लिए जाते रहे हैं. वहां से लौटते हुए पाकिस्तान से आए छह आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया था. एसपी के बयान से उलट उस धार्मिक स्थल की देखभाल करने वाले सोमराज का कहना है कि 31 दिसंबर को उन्होंने पहली बार एसपी को वहां देखा था.एक बात और है कि एसपी ने अपने निजी वाहन पर नीली बत्ती का प्रयोग क्यों किया था, जबकि ऐसा करना गैरकानूनी है. इसी नीली बत्ती की वजह से कई चेक पोस्टों पर पुलिस ने उनके वाहन की तलाशी नहीं ली?

इन सबके बारे में सलविंदर सिंह और उनके कुक मदन गोपाल से एनआईए ने लंबी पूछताछ की थी ओर यह भी पाया गया कि उनके ड्रग माफिया से सम्बंध थे.एनआईए के जांचकर्ता आखिर तक इस गुत्थी में उलझे रहे कि आखिर आतंकवादियों ने एसपी सलविंदर और उनके साथियों को क्यों छोड़ दिया, जबकि उन्होंने एक दूसरी गाड़ी को अगवा किया तो उसके ड्राइवर की हत्या कर दी थी?


लेकिन कुछ दिनों बाद आश्चर्यजनक रूप से एनआईए ने सलविंदर सिह को उस पठानकोट केस में क्लीन चिट दे दी थी. अब उस एनआईए को कौन लीड कर रहा था हम नही जानते? लेकिन इतना जानते है कि पठानकोट मामले की जाँच के लिए डोभाल साहब ने पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए न्योता दिया था और सलविंदर साहब की पेशी भी उनके सामने करवाई थी.बहरहाल 2019 में गुरदासपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक सलविंदर सिंह को किसी दूसरे केस में भ्रष्टाचार और रेप के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई ओर सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया

एनआईए के जांचकर्ताओं जितने हम लोग तो जहीन नही है, लेकिन यह समझ जरूर रहे हैं कि यदि डीएसपी देविंदर सिह आतंकियों को दिल्ली ले जाते हुए गिरफ्तार नही होते तो देश को पठानकोट जैसा हमला दुबारा झेलना पड़ता .हालांकि जैसे सलविंदर सिंह बरी हुए वैसे ही देविंदर सिह भी बरी हो जाते.

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