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जगदानंद को लेकर रघुवंश ने लालू को लिखा पत्र

फजल इमाम मलिक 

पटना .विधानसभा चुनाव से पहले राजद में घमासान है. पार्टी गुटों में बंट गई है. हालांकि अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी शुरू हो गई है लेकिन विवाद तो जग-जाहिर हो चुका है. राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी के नए-नए बने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. रघुवंश सिंह लंबे समय से नीतीश कुमार के लिए भी बल्लेबाजी कर रहे हैं. फिर उन्होंने नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल करने की वकालत कर विवाद को नए सिरे से जन्म दे दिया है. पार्टी के अंदर जो कुछ भी चल रहा है उसे लेकर उन्होंने लालू यादव को पत्र भी लिखा है और उनका समर्थन शिवानंद तिवारी ने भी किया है. रघुवंश प्रसाद सिंह ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा कर जगदानंद को बैकफुट पर ला दिया है. जगदानंद सिंह ने तेजस्वी यादव को महागठबंधन का नेता बता कर उन्हें बतौर मुख्यमंत्री पेश किया था. लेकिन रघुवंश सिंह के बयान से उनकी पहल को धक्का लगा है. सियासी गलियारे में हालांकि चर्चा इस बात को लेकर है कि रघुवंश प्रसाद सिंह अपनी पार्टी के अंदर जगदानंद सिंह के बढ़ते कद से परेशान हैं. जगदानंद सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना रघुवंश प्रसाद सिंह को रास नहीं आरहा है. उनकी पीड़ा यह है कि ऐसा बिना विचार-विमर्श के किया गया. रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपनी नाराजगी का इजहार खुल कर किया है. बाकायादा राजद प्रमुख लालू यादव को उन्होंने पत्र लिखा और पार्टी में संगठनात्मक चुनाव और जमीनी स्तर की हकीकत को उन्होंने सामने रखा. लालू यादव को लिखे अपने पत्र में रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी की तरफ से तय किए गए कार्यक्रम पर अमल नहीं करने का आरोप भी लगाया है. रघुवंश सिंह ने लिखा कि 2020 बिहार में चुनाव का साल है. राजद के लिए भी वजूद को बचाने के लिए निर्णायक है यह चुनाव. उन्होंने पार्टी के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे में पार्टी संघर्ष और कार्यक्रम से पीछे कैसे हट सकती है. बिना देर किए हर स्तर पर समितियों और वर्ग संगठन के गठन और उसपर लगातार चर्चा की जरूरत है. एनडीए लगातार राजद पर हमलावर है. लेकिन उन हमलों का जवाब नियमित तौर पर नहीं दिए जारहा है और यह गलत है. रघुवंश प्रसाद सिंह ने जगदानंद सिंह के साथ-साथ तेजस्वी के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े किए हैं. तेजस्वी की कार्यशैली को आईना दिखाते हुए लालू यादव को रघुवंश प्रसाद सिंह ने जिस तरह पत्र लिखा है वह राजद की अंदरूनी खींचतान को सतह पर ले आया है. अब देखना होगा कि लालू यादव रघुवंश को कैसे शांत करते हैं.


जाहिर है कि इस लेटरवार के बाद जगदानंद सिंह और रघुवंश प्रसाद आमने सामने आ गए हैं. रघुवंश प्रसाद खुद को तवज्जो नहीं दिए जाने से गुस्से में हैं. रघुवंश प्रसाद और जगदानंद सिंह की बन नहीं रही है. इसलिए उन्होंने पार्टी की कार्यशाली पर भी सवाल उठाया है. रघुवंश प्रसाद ने साफतौर पर कहा कि जगदानंद सिंह हमारे मालिक हैं क्या, बस लालू यादव हमारे नेता हैं.


वैसे यह सवाल भी उठ रहा है कि रघुवंश प्रसाद सिंह की मंशा कुछ और है. वे सारी कवायद राज्यसभा जाने के लिए कर रहेंते हैं. राज्यसभा की कई सीटें खाली हो रहीं हैं और राजद को कम से कम दो सीटों पर जीतना तय माना जा रहा है. यानी राजद के दो सदस्य राज्यसभा जाएंगे, इसमें किसी तरह का अगर-मगर नहीं है.

लालू यादव के साथ लंबे समय तक सियासत करने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह और जगदानंद सिंह पार्टी कद्दावर नेता हैं. जगदानंद सिंह फिलहाल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और तेजस्वी के साथ उनका तालमेल भी बन गया है. लेकिन यह बात रघुवंश प्रसाद सिंह को पसंद नहीं आई. अब उनकी नजर राज्यसभा पर है लोकसभा चुनाव दो लाख 34 हजार से ज्यादा वोटों से वे हार गए थे. इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें शिकस्त हुई थी. रघुवंश बाबू ने लगातार दो लोकसभा चुनावी में हार के बाद अब यह मान लिया है कि राज्यसभा जाने से ही उनकी राजनीति बची रह सकती है. इसलिए वे पार्टी में ही अलग पार्टी लाइन चला रहे हैं. पार्टी के लिए यह ठीक नहीं है. वैसे भी रघुवंश प्रसाद सिंह कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे पार्टी की फजीहत हुई है. बाद में उन्हें अपना बयान वापस लेना पड़ा है. देखना यह है कि लालू प्रसाद उनके पत्र का जवाब देते हैं या नहीं. बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होना है इसलिए हो सकता है कि उन्हें चुप करने के लिए लालू यादव राज्यसभा भेज दें. फिलहाल लालू यादव ने पत्ते नहीं खोले हैं. 

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