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जदयू में अब खुलकर सिर फुटव्वल !

डा लीना 

पटना .जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में चल रहा मतभेद खुल कर सामने आ गया है . दिल्ली चुनाव में गठबंधन पर जेडीयू के मुखिया नीतीश कुमार से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग करने वाले पार्टी महासचिव पवन कुमार वर्मा और इससे पहले सीएए-एनआरसी के खिलाफ आवाज उठाने वाले जदयू नेता प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को दो टूक जवाब दे दिया. नीतीश ने कहा कि जिसे जहां जाना है चला जाए, मेरी शुभकामनाएं साथ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों के बयान से जनता दल यूनाइटेड को मत देखिए. 

जेडीयू के असंतुष्ट नेता पार्टी महासचिव पवन कुमार वर्मा ने सीएए-एनआरसी और दिल्ली चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन पर पार्टी अध्यक्ष मुखिया नीतीश कुमार से मंगलवार को सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की थी, अपनी 'विचारधारा स्पष्ट' करने के लिए कहा था. उन्होंने देश को चलाने में भगवा दल के तरीके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'निजी आशंकाओं' का जिक्र भी किया था. कड़े शब्दों में लिखे गए अपने दो पन्नों के खुले पत्र में वर्मा ने कहा था कि बिहार के बाहर दिल्ली विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ पार्टी के गठबंधन से वह 'बेचैन' हैं. उन्होंने भगवा दल पर 'बड़े पैमाने पर सामाजिक बंटवारे के एजेंडा' पर चलने का आरोप लगाया. पत्र में बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील मोदी की 'एकतरफा घोषणा' पर भी उन्होंने हैरानी जताई कि राज्य में 15 मई से 28 मई के बीच राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का कार्य होगा जबकि नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ हैं.

इस मामले पर नीतीश कुमार ने गुरुवार को साफ तौर पर कहा कि किसी के पास कोई मुद्दा है तो पार्टी के भीतर चर्चा कर सकता है लेकिन सार्वजनिक बयान हैरान करने वाला है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के बयान से जनता दल यूनाइटेड को मत देखिए. कुछ चीजों पर हमारा स्टैंड साफ होता है. एक भी चीज को लेकर कन्फ्यूजन में नहीं रहते हैं. मगर किसी के मन में कोई बात है तो आकर विमर्श करना चाहिए, बातचीत करनी चाहिए, उसके लिए पार्टी के बैठक में चर्चा करनी चाहिए. मगर इस तरह का बयान देना आश्चर्य की बात है. ये कोई तरीका है? इन बातों को छोड़ दीजिए. मुझे फिर भी सम्मान है, लेकिन उनको जहां अच्छा लगे वे जाएं, मेरी शुभकमाना है.'

इससे एक दिन पहले वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी प्रशांत और पवन वर्मा को चेताया था. जदयू ने इनके बयानों को अनुशासनहीनता माना. बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था कि वे इस मसले पर मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से बात करेंगे. पवन हों या प्रशांत, इनकी जदयू के निर्माण में कोई भूमिका नहीं है. अगर उन्होंने किसी जगह जाने का मन बना लिया है तो स्वतंत्र हैं. उनके बयानों को देख कर लगता है कि वे दूसरी पार्टी के संपर्क में हैं. दिल्ली में जदयू-भाजपा और लोजपा का गठबंधन हो गया तो गलत क्या है? सीएए पर पार्टी का स्टैंड साफ है. 

जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर भी सीएए के विरोध में आवाज उठाते रहे हैं. प्रशांत किशोर ने बुधवार को फिर ट्वीट कर गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला. प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया,' नागरिकों की असहमति को खारिज करना किसी भी सरकार की ताकत का संकेत नहीं हो सकता. अमित शाह जी, अगर आप नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का विरोध करने वालों की परवाह नहीं करते हैं, तो आप इस कानून पर आगे क्यों नहीं बढ़ते? आप सीएए और एनआरसी को उसी क्रोनोलॉजी में लागू करने का प्रयास करें, जो आपने राष्ट्र के लिए इतनी बड़ी घोषणा की है!

नीतीश कुमार के दो टूक पर पवन कुमार वर्मा ने गुरुवार को कहा कि पत्र का जवाब मिलने पर मैं आगे की योजना तय करूंगा.

गौरतलब है कि पिछले सात साल में  राज्य के पाँच बड़े  नेता नीतीश का साथ छोड़ चुके हैं. इनमें शरद यादव, उदय नारायण चौधरी, जीतन राम मांझी, वृषिण पटेल और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. 

शरद यादव  2017 में नीतीश के भाजपा से हाथ मिलाने को वोट पर डाका बताया और जदयू से निकल गए. उदय नारायण चौधरी भी शरद यादव के साथ ही जदयू से अलग हुए. 2005-2015 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे चौधरी को भी जदयू का एनडीए में शामिल होना मंजूर नहीं था. उपेंद्र कुशवाहा ने 2013 में नीतीश का साथ छोड़ा और रालोसपा बनाई. वृषिण इन दिनों रालोसपा में हैं. 

अब देखना यह है कि पवन कुमार वर्मा के पत्र का जवाब मिलने पर आगे की योजना तय करने की बात क्या इस सूची में कुछ नये नाम शामिल करेगी ?


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