क्‍या दिल्‍ली में फिर 'आप' की सरकार...

शंकर गुहा नियोगी को भी याद करें नौकरी छीन रही है सरकार मौसम बदल रहा है ,खाने का जरुर ध्यान रखें किसान विरोधी कानून रद्द करने की मांग की क्या बिहार में सत्ता के लिए लोगों की जान से खेल रही है सरकार कांकेर ने जो घंटी बजाई है ,क्या भूपेश बघेल ने सुना उसे ? क्या मुग़ल काल भारत की गुलामी का दौर था? अधर में लटक गए छात्र पत्रकारों के बीमा का दायरा बढ़ाए सरकार बिहार चुनाव से दूर जाता सुशांत का मुद्दा सड़क पर उतरे ऐक्टू व ट्रेड यूनियन नेता किसानों के प्रतिरोध की आवाज दूर और देर तक सुनाई देगी क्या मोदी के वोटर तक आपकी बात पहुंच रही है .... खेती को तबाह कर देगा कृषि विधेयक- मजदूर किसान मंच दशहरे से दिवाली के बीच लोकतंत्र का पर्व बेनूर हो गई वो रुहानी कश्मीरी रुमानियत सिविल सर्जन तो भाग खड़े हो गए चंचल .. चलो भांग पिया जाए क्यों भड़काने वाले बयान देते हैं फारूक अब्दुल्ला एक समाजवादी धरोहर जेपी अंतरराष्ट्रीय सेंटर को बेचने की तैयारी

क्‍या दिल्‍ली में फिर 'आप' की सरकार...

नई दिल्‍ली. देश की राजधानी दिल्‍ली के विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को वोटिंग हुई, आगामी मंगलवार को इसके नतीजे सामने आएंगे. लेकिन अगर बात एग्जिट पोल की करें तो ऐसा साफ तौर पर लग रहा है कि दिल्‍ली जनता ने केजरीवाल सरकार को दुबारा सरकार बनाने के लिए ग्रीन सिग्‍नल दे दिया है. आम आदमी पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है. जानकार तो यह भी कहते हैं कि आम आदमी पार्टी 60 से अधिक सीटों पर जीत का परचम लहराएगी. ऐसा लग रहा है कि दिल्‍ली की जनता ने केजरीवाल सरकार के काम और चुनावी वादों पर पूरी तरह से मुहर लगाई है.

भाजपा को लग सकता है बड़ा झटका
चुनावी सर्वे और एग्जिट पोल यह तो साफ तौर पर बताते हैं कि आप आदमी पार्टी की स्पष्ट बहुमत की सरकार बनेगी. रिपोर्ट के मुताबिक आप को 46 से 54 सीटें तक मिल सकती हैं. कांग्रेस का आंकड़ा 0-3 के बीच कुछ भी हो सकता है. बीजेपी को 16 से 25 सीटें हाथ लग सकती हैं.  यह तो एग्जिट पोल और सर्वे का औसत है.  लेकिन सर्वे केंद्र में सत्तारूढ़ दल के लिए डरावनी तस्वीर पेश करता है कि उसके लिए 16 सीटें पाना भी मुश्किल होगा. आपको 54 सीटों के आस-पास और कांग्रेस को शून्य से तीन सीटें तक मिल सकती हैं. भाजपा को अधिकतम 38 फीसदी के आसपास वोट मिल सकते हैं, जबकि आप के खाते में 56 फीसदी वोट आने का अनुमान है.

ये है पिछला गणित
2015 के विधानसभा चुनाव में आप को 67 सीटें और 54.3 फीसदी वोट मिले थे. जबकि भाजपा को 3 सीटों के साथ 32.3 फीसदी वोट हाथ लगे थे. कांग्रेस को वोट तो 9.7 फीसदी मिले थे पर एक भी सीट हाथ नहीं लगी. इसके पहले के 2013 के विधानसभा चुनाव में आप को 29.5 फीसदी वोट और 34 सीटें मिलीं थीं. भाजपा को 34 फीसदी वोट और 28 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को 24.6 फीसदी वोट और 8 सीटें हाथ लगी. वही अगर,  2014 के लोकसभा चुनाव में आप को 32.9 फीसदी वोट तो मिले लेकिन खाता भी नहीं खुला.  यही नहीं, कांग्रेस को भी 15.2 फीसदी वोट मिले और उसका भी खाता नहीं खुला.  भाजपा ने 46.4 फीसदी वोट पाकर सभी सात की सातों सीटें हथिया ली. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने सातों सीटें जीतीं. उसका वोट बढ़कर 56.6 फीसदी हो गया. वहीं आप और कांग्रेस का खाता नहीं खुला.  लेकिन इन्हें क्रमशः 18 और 22.5 फीसदी वोट मिले थे. 

  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :