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फल खाएं पर मौसम को देख कर

 पूर्णिमा अरूण

शरीर के गठन के लिए आवश्यक भोजन तत्व मुख्यतः अन्न और दूध-घी से प्राप्त हो जाते है लेकिन सूक्ष्म स्तर पर जरूरी लवण(मिनरल्स) व विटामिन्स कंद-मूल-फल से भी प्राप्त होते हैं. इनके बिना शरीर की भीतरी क्रियाएं पूरी नहीं हो सकती. कंद-मूल तो रोज ही भोजन में शामिल रहते हैं लेकिन फल का खाना आमतौर पर रोज़ रोज़ नहीं हो पाता है . सेहत के लिए फ्रिकमंद जन जरूर इनके नियमित सेवन का ध्यान रखते हैं. अन्यथा फल बीमार होने या उपवास के दिन ही खाए जाते हैं. फिर भी सेहत के मद्देनजर मौके बेमौके मौसमी फल खाना हमारी भोजन परम्परा में एक आम आदत समझी जाती रही है. यह बात अलग है कि आज के अर्थतंत्र में मौसमी फल भी आमजन की पहुँच से बाहर हुए जा रहे हैं.

आज के बसंती मौसम में बेर और रसभरी ऐसे दो फल हैं जिनकी बहार रहती है, चाहे कुछ दिनों की ही क्यों न हो. यह दोनों फल पौष्टिकता से इतने भरपूर हैं कि इन्हें खाने से चूकना नहीं चाहिए. बेर बहुत तरह के होते हैं, जंगली बेर, छोटे भूरे-लाल बेर, हरे-पीले बड़े बेर. सभी में औषधिय गुण रहते हैं. इनके सेवन से मिलने वाले लाभ की लम्बी सूची है. यह अपच को ठीक करता है. छाँछ के साथ बेर खाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है. यकृत(लीवर) को ठीक रखता है. भूख को भी नियत्रित करता है. इसकी प्रोटीन पेट भरे होने का एहसास कराती है. धमनियों में जमा होने वाले वसा को रोकने वाले तत्व इसमें मौजूद हैं, इसलिए हृदय के लिए अच्छा है. लौह तत्व व फासफोरस होने से खून की कमी नहीं होने देता. विटामिन ए व बी के अलावा विटामिन सी भरपूर होने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बनाए रखता है. इसका सेवन तनाव, अवसाद, अनिन्द्रा के साथ-साथ पार्किन्सन से भी बचाव करता है. इसके केल्सियम व फोस्फोरस तत्व हड्डियों को मजबूती देते हैं. बेरी की पत्ती का उपयोग एक्जिमा,दाद व बालतोड़ का घाव ठीक करने में किया जाता है.

रसभरी भी गुणों से भरी है. आमजन इसे मकोय के नाम से भी जानते हैं. यह बेर की तरह जंगली भी होती है. इसमें उपस्थित तत्व अनेक रोगों से बचाते हैं. विटामिन ए होने से आँखों के लिए हितकारी है. शरीर की सूजन को कम करती है इसलिए जोड़ों के दर्द और गठिया के लिए उत्तम औषधी है. केल्सिमम व फोस्फोरस सही मात्रा में होने से हड्डियों को मजबूती मिलती है. खराब कॉलेस्ट्रॉल को कम करती है. बवासीर, श्वास रोग, हिचकी को ठीक करती है. रसभरी के फल के अलावा फूल, पत्ती, तना व जड़ का भी औषधिय उपयोग किया जाता है. करीब करीब ऐसे ही गुण आजकल आने वाले संतरे में भी हैं. लम्बे उपवास को इसके जूस से तोड़ने से आँखे ठीक होती हैं. पोटेशियम होने से हृदय के लिए अच्छा है. इसकी फली के ऊपर सफेद रेशे लगे होते हैं. अकसर इनको उतार कर खाया जाता है, यह ठीक नहीं. सफेद रेशे फाइबर का काम करते हैं जिनसे पेट साफ हो जाता है. संतरे के छिलके का उपयोग त्वचा निखारने के लिए किया जाता है.

वातदोष वालों को फल लवणभास्कर चूर्ण के साथ ही खाने चाहिए. कफदोष वालों को त्रिकटु छिड़क कर और पित वालों को खट्टे फल नहीं सेवन करने चाहिए. रात्रि में भी फल खाना सेहतमंद नहीं है. फल व सब्जी का जूस एक साथ मिला कर नहीं पीना चाहिए. जूस तैयार करके तुरन्त ही पी लेना ठीक है. बाजार के डिब्बा बन्द जूस प्रीजर्वेटिव मिले होने से नुकसान करते हैं. जूस नए चलन में फलों के नए नए रूप रंग बहुत आकर्षित करने लगे हैं जिनमें कीवी, स्ट्रॉबेरी, चेरी, ड्रेगनफ्रूट, एवाकाडो आदि न जाने कितने नाम जुड़ते चले जा रहे हैं. यह सभी विदेशी फल है जिन्हें देशीय बनाने की जद्दोजहद की जा रही है. इस वज़ह से जो मौसमी फल खाएं जाते थे वो नज़रअन्दाज हो रहे हैं. सेहत के हिसाब से तो अपने इलाके के मौसमी फल ही खाएं जाने चाहिए.

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