जीजी परीख ,जिनमें गांधी दिखाई देते हैं.

दुनिया के सबसे बड़े कोविड टीकाकरण की शुरुआत पत्रकार पर भड़के नीतीश कुमार डिंपल यादव का जन्म दिन मनाया गया हिंदुत्व का नया चेहरा बनते योगी ! किसानों के समर्थन में उतरी कांग्रेस अमेरिकी पार्लियामेंट पर हमला और भारत बर्फ़ पर गाड़ी और याद आई नानी ! तितलियों का काम भी हम ही करेंगे ? किसान कानून-खतरे में सुप्रीम कोर्ट की साख डेमोक्रेटिक पार्टी ट्विटर, फ़ेसबुक के सामने बौनी पड़ गई ! ब्लू लैगून की ब्रुक शील्ड्स याद है ? मध्य प्रदेश में ये क्या हो रहा है ? आज खिचड़ी है लूसी कुरियन परिचय की मोहताज नहीं वूमेन हेल्पलाइन को बंद करने पर सरकार से जवाब तलब रूपेश सिंह हत्याकांड पर सीएम नीतीश सख्त महान दल समाजवादी पार्टी के साथ कभी छुपा कर पढ़ते थे कुशवाहा कांत की किताबें समाजवादी युवा घेरा कार्यक्रम आयोजित हुआ बेतिया माडल के चर्चे

जीजी परीख ,जिनमें गांधी दिखाई देते हैं.

डा सुनीलम 

आज डॉ जीजी परीख जी का 97 वां जन्म दिवस है. मैंने मुंबई जाने का टिकट कटाया हुआ था लेकिन कोरोना से संक्रमित होने के कारण नहीं जा सका. जीजी से मिलना   प्रेरणादायी और ऊर्जा दायक होता है. देश और दुनिया की जानकारी भी बढ़ती है. 97 वर्ष की उम्र में जीजी की याददाश्त, उत्साह और कार्य क्षमता ज्यों की त्यों कायम है, जो सभी को आश्चर्यचकित करती है. ऐसे समय में जब बुजुर्गों को सलाह दी गई है कि वे घर के बाहर न निकलें , जीजी तारा (पनवेल) तो जाते ही है, युसूफ मेहर अली के नए कार्यालय से लेकर पुणे तक जाने में तथा लोगों से मिलने जुलने में कोई संकोच नहीं करते.

 21वर्ष पहले 12 जनवरी को मुलताई के कार्यक्रम में शामिल होने पर जाते समय नागपुर रेलवे स्टेशन पर गिर गए थे तमाम हड्डियां टूट गई तब से आज तक जीजी के पैर से रोज मवाद निकाला जाता है, ड्रेसिंग भी होती है. सभी जीजी को ऑपरेशन कराने की सलाह देते हैं पर जीजी सबसे एक ही बात करते हैं कि मैं खुद पर खर्च नहीं करना चाहता. इसलिए वे ऑपरेशन नहीं कराते हैं. जो उनसे कहता है कि वह पैसा देने को तैयार है .उससे कहते हैं.जनता वीकली युसुफमेहेर अली सेंटर या अन्य कार्यों के लिए मुझे दे दो.

 जीजी ने अपने कमरे में टीवी नहीं है परंतु अखबार के माध्यम से देश और दुनिया से जुड़े रहते हैं. सुबह 3:00 से 4:00 के बीच उठ जाना, किताबें पढ़ना, ईमेल पर पत्रों के जवाब देना उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा है.

कोरोना लॉक डाउन  के पहले तक रोजाना क्लिनिक में इलाज

करने के लिए बैठते थे.

 पूरा जीवन केवल खादी के कपड़े और खादी ग्रामोद्योग की वस्तुओं का इस्तेमाल करते रहे हैं.

     जब 16 साल के थे तब 1942 के कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए थे. आंदोलन के दौरान जब कॉलेज बंद कराया तब उसके बाद गिरफ्तारी हो गई.  भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजों की 10 महीने जेल काटी. इमरजेंसी के समय पत्नी मंगला बेन और बेटी सोनल के साथ जेल काटी. 1946 से शुरू हुई जनता वीकली को आज भी सतत रूप से प्रकाशित कर रहे हैं. 65 वर्ष पहले युसूफ मेहर अली सेंटर की स्थापना की. आज 11 राज्यों में इसकी इकाइयां कार्य कर रही है.


 जीजी ने समाजवादियों का जीवन कैसा होना चाहिए इसका आदर्श देश और दुनिया के सामने रखा है. जीजी किसी भी सार्वजनिक कार्य के लिए पैसा इकट्ठा करने की अद्भुत क्षमता और कौशल रखते हैं. वे खुद को भिखारी  मानते हैं तथा वे सदा चंदा जुटाने की मुहीम में लगे रहते हैं. चंदा जनता वीकली ,यूसुफ मेहेर अली सेंटर से लेकर प्रवासी श्रमिकों को मदद देने ,कच्छ से लेकर केरल तक के आपदा पीड़ितों के लिए हो सकता है.

 साधन की शुचिता को लेकर कोई भी समझौता नहीं करते. जीजी ने देखा कि युसूफ मेहर अली सेंटर के तारा केंद्र में 50 हजार लोग आते हैं तब उन्होंने  आने वाले लोगों को गांधी विचार से जोड़ने के लिए सेवाग्राम की तरह बा और बापू  की कुटिया  ज्यों की त्यों युसूफ मेहर अली सेंटर में बनवा दी. युसूफ मेहर अली सेंटर  6 स्कूल और 2 अस्पताल संचालित करता है. केंद्र के ग्रामोद्योग उत्पाद मुंबई में खासे लोकप्रिय है. जिसमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय घानी का तेल और साबुन है. जीजी एस एम जोशी फाउंडेशन तथा खादी ग्रामोद्योग अभियान के संयोजक है.

      जीजी ने समाजवादी  रचनात्मक कार्य करने वाली संस्थाओं को जोड़कर 'हम समाजवादी संस्थाएं' का गठन किया है. जी जी की प्रेरणा से देश में हजारों युवा रचनात्मक कार्यों से आज  जुड़े हुए हैं. जीजी आजकल स्कूल ऑफ सोशलिज्म कांडीखाल (उत्तराखंड) में स्थापित करने के लिए प्रयासरत है.

 जीजी युसूफ मेहर अली के मित्र रहे. मधु दंडवते और सुरेंद्र मोहन जी उनके सबसे करीबी दोस्त  थे. जॉर्ज फर्नांडिस के साथ भी वे बड़ौदा डायनामाइट कांड में  सह अभियुक्त रहे.

 जीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को स्थापित और तिरोहित होते देखा है. समाजवादी आंदोलन के उतार और चढ़ाव के साक्षी और भागीदार रहे हैं. इतने सबके बावजूद भी उनके मन में कभी निराशा पैदा नहीं हुई.  जीजी के साथ के अधिकतर साथियों का निधन हो चुका है.

 वे अपने साथियों के परिवारों के साथ आज भी जुड़े रहते हैं. फिलहाल जीजी के संपर्क के तीन साथियों की मौत की खबर उन्हें कल ही  मिली है . इस सब के बावजूद भी वे स्थिरप्रज्ञ की स्थिति  में रहकर निर्विकार भाव से अपने काम में हर क्षण लगे रहते हैं. 

जी जी सबसे ज्यादा लगाव हिन्द मज़दूर सभा और राष्ट्र सेवा दल से है. वे मानते हैं कि इन दोनों संगठनों के इर्द गिर्द ही समाजवादी आंदोलन को फिर से खड़ा किया जा सकता है. जी जी की प्रेरणा से गत 205 दिनों से चल रहे बहुजन संवाद पर आज हम जीजी के युवा साथीयों  से 'परिवर्तन के लिए रचना और संघर्ष' विषय पर चर्चा करेंगे. आज जीजी के बारे में अधिक जानने के लिए शाम के 6:00 बजे बहुजन संवाद में जरूर जुड़ियेगा.जीजी शतायु हों ! यह कामना आज के दिन मैं और मेरे सभी साथी कर रहे हैं.

  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :