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वर्षा वर्मा की एक 'दिव्‍य कोशिश'

अखंड प्रताप सिंह

लखनऊ. राजधानी और आसपास के क्षेत्र के ऐसे असहाय गरीब निराश्रित लोग जो सड़कों पर रहने के लिए मजबूर हैं,  जो तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हैं.  ऐसे लोगों को सरकारी अस्पताल में एडमिट कराने से लेकर नहलाना-धुलाना,  अपने हाथों से खाना खिलाना और उनकी सेवा तब तक करना जब तक वह पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो जाते हैं, जब वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाते हैं तो उनको लखनऊ के ही किसी शेल्टर होम में ले जा कर वहां रखवाना.  ये सब सुनने में ही कितना दुरूह कार्य लगता है पर यह सब बहुत ही बखूबी से लगातार तमाम वर्षों से जो व्यक्ति करता आ रहा है,  उसका नाम है वर्षा वर्मा. वर्षा वर्मा अपनी संस्था एक दिव्य कोशिश के नाम से यह सब करती हैं वो भी बिना किसी सरकारी सहायता लिए. 

वर्षा वर्मा को बचपन से ही ये जुनून था और यह सब करके उन्हें बहुत आत्म संतुष्टि मिलती है. बिना किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के वो हर रोज़ उसी ज़ज़्बे के साथ इस मिशन पर लग जाती हैं. उनकी संस्था द्वारा डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हर शुक्रवार को कैंसर पीड़ितों को कच्चा राशन 35 परिवारों को दिया जाता है जिसमें आटा, दाल,  चावल,  चीनी,  चायपत्ती,  बिस्किट,  तेल,  साबुन जैसी रोजमर्रा के जरूरत की सामग्रियों को तीमारदार तक पहुंचाया जाता है. 

संस्था द्वारा ऐसे परिवार जिनके पास दाह संस्कार के लिए पैसा नहीं होता है या कुछ डेस्टिट्यूट जिनका कोई नहीं होता है उन लोगों का वर्षा वर्मा और दीपक महाजन द्वारा अपने हाथों से अंतिम संस्कार कराया जाता है. यह अंतिम संस्कार विद्युत मशीन द्वारा कराया जाता है ताकि समाज के लिए एक मिसाल बन सके कि किसी के मरने के बाद पेड़ों को भी बचाया जा सके.

यही नहीं इनकी संस्था द्वारा लोगों की मदद से सरकारी स्कूलों में कॉपी रबड़ पेंसिल कटर पेंसिल बॉक्स स्केल जैसी सामग्री भी वितरित कराई जाती है. कुछ ऐसे बच्चे जो पढ़ने में बहुत ही काबिल हैं परंतु उनके परिवार के पास पैसे की कमी के चलते एडमिशन नहीं कराया जाता है,  ऐसे बच्चों का पता लगाकर उनके साल भर की फीस का इंतजाम करके उनका एडमिशन भी करवाया जाता है और उनको आगे समाज के लिए कुछ करने के लिए प्रेरणा भी दी जाती है. संस्था द्वारा साल में दो से तीन बार ब्लड डोनेशन कैंप भी आयोजित कराए जाते हैं, जिससे साल भर जरूरतमंदों को ब्लड पहुंचाया जा सके. संस्था के जन्मदिन पर हर साल ग्रीनवुड अपार्टमेंट में ब्लड डोनेशन कैंप कराया जाता है. इसके अलावा कुछ ऐसे परिवार जो अपने दैनिक कार्यों को करने में सक्षम नहीं हैं, उनके घर को साफ सुथरा रखने से लेकर नहाने धोने और उनके घर टिफिन भी पहुंचाने का कार्य इस संस्था द्वारा किया जाता है. 

वर्षा वर्मा का कहना है जब वे टीनएज मे थीं तो स्कूल से आने के बाद घंटा दो घंटा सरकारी अस्पतालों में जाकर छोटी-मोटी सेवाएं देती थी उसी को अब बड़े रूप में कर पा रही हैं. उनका कहना है समय रहते मैंने इस चीज को जान लिया था कि असली सुख पैसा कमाने, होटल बाजी, लंबी-लंबी कारों और बड़े वाले मकानों में नहीं है बल्कि असली सुख और सच्ची पूजा इस तरह की सेवा में ही महसूस होती है.

अपने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए उनका कहना है कि यदि ईश्वर ने चाहा तो मैं एक ऐसा शेल्टर होम बनाना चाहती हूं जहां पर मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला या पुरुष रह सकें और जहांअपने हाथों से हम लोग उनकी सेवा कर सकें. विडंबना यह है कि पूरे लखनऊ में मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों के लिए कोई भी शेल्टर होम नहीं है. वर्षा वर्मा कहती हैं 'ईश्वर मुझे इतना सक्षम बनाये कि किसी भी व्यक्ति की कोई भी परेशानी हो तो मैं उसे दूर करने में सहायक हो सकूं'.

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