झांकी स्टेट्स को मंजूरी नहीं

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झांकी स्टेट्स को मंजूरी नहीं

आलोक कुमार 

पटना. सन् 1955 से ही राजपथ पर नियमित रूप से गणतंत्र दिवस परेड की शुरूआत हुई और विधिवत झांकियों की भी.सभी झांकियां 8 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करती हैं रायसीना हिल से शुरू होकर राजपथ, इंडिया गेट से गुजरती हुई लाल किला तक जाती है.1955 में लाल किले के दीवान-ए-आम में गणतंत्र दिवस पर मुशायरे की परंपरा शुरू हुई.

बता दें कि राजपथ पर निकलने वाली झांकी स्टेट्स पर किसी भी सरकार की नहीं चलती है.इसके लिए बाजाप्ता झांकियों की मंजूरी के लिए रक्षा मंत्रालय में सेलेक्शन कमेटी है. तीन स्तर पर जांच होती है. राष्ट्रीय एकता, अंतरराष्ट्रीय स्तर की ब्रांडिंग और मनोहारी दृश्यों वाली झांकियों को ज्यादा महत्व दिया जाता है. 



बिहार सरकार ने कमेटी के पास अपने वर्ष 2020 का जल-जीवन-हरियाली की थीम का प्रस्ताव पिछले साल सितंबर महीने में ही रक्षा मंत्रालय के पास भेजा था.रक्षा मंत्रालय ही गणतंत्र दिवस परेड का नोडल मंत्रालय है.मंत्रालय की ओर से सूचित किया गया कि बिहार का प्रस्ताव गणतंत्र दिवस की परेड के लिए पहले से तय क्राइटेरिया को पूरा नहीं करता है. बिहार के अधिकारियों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की कमेटी ने पर्यावरण के लिए बिहार की पहल की सराहना की लेकिन झांकी के प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया.

इसके बाद वर्ष 2021 में फिर से जल-जीवन-हरियाली की थीम पर झांसी स्टेट्स को नामंजूर कर दी दी गयी.इसके चलते दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान इस बार बिहार की झांकी नहीं दिखेगी. राज्‍य की जल जीवन हरियाली थीम पर अनुमति नहीं मिली. दूसरे विषय पर झांकी की मांग केंद्र की ओर से हुई, लेकिन बिहार सरकार दूसरे विषय के लिए तैयार नहीं हुई. 

दरअसल, बिहार की ओर से इस बार प्रस्ताव दिया गया था कि वह जल-जीवन-हरियाली अभियान को केंद्र में रख अपनी झांकी तैयार करेगा.गणतंत्र दिवस परेड में किस राज्य की झांकी को अनुमति मिलेगी, इसे तय करने के लिए रक्षा मंत्रालय के अधीन एक कमेटी है.कमेटी के स्तर पर झांकी के विषय को मंजूरी मिलती है.रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत कमेटी ने जल-जीवन-हरियाली अभियान को केंद्र के जलशक्ति मंत्रालय का विषय बता दिया.यह भी कहा कि यह विषय राज्य सरकार का नहीं हो सकता है.इस वजह से जल-जीवन-हरियाली अभियान पर झांकी बनाए जाने को अनुमति नहीं दी जा सकती है. बिहार सरकार कोई दूसरा प्रस्ताव दे.राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वह इस विषय को छोड़कर किसी अन्य विषय पर झांकी तैयार नहीं करेगी.



रक्षा मंत्रालय की कमेटी ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान दिखाई जाने वाली झांकी के संबंध में नियमों का हवाला देते हुए बिहार सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में यह कहा कि राज्य सरकार को अपने यहां की सांस्कृतिक विशेषता, इतिहास व धरोहर आदि पर झांकी का प्रस्ताव देना है. इस क्रम में यह नसीहत भी दी गई कि वह चाहे तो जैन या बुद्ध धर्म से संबंधित कोई झांकी तैयार कर ले.

बिहार की झांकी का प्रस्ताव लेकर बैठक में पहुंचे अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय की कमेटी को कहा कि बिहार देश में इकलौता राज्य है जिसने पर्यावरण की समस्या को समझ कर इतने बड़े अभियान की शुरूआत की है. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यात बिल गेट्स जब बिहार आए थे तो उन्होंने जल-जीवन-हरियाली अभियान की न सिर्फ सराहना की बल्कि दिल्ली में कई जगहों पर इस अभियान की खूब चर्चा की.झांकी के लिए तय मानदंडों में एक मानदंड अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर किसी मुद्दे की ब्रांडिंग का है.इस आधार पर जब जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रस्ताव पर अनुमति की बात कही गई तो कमेटी ने यह कह दिया कि राज्य सरकार का यह विषय ही नहीं हो सकता.



यहां उलेख्य है कि गणतंत्र दिवस की परेड वह मौका होता है जब देश के विभिन्न राज्य, देश-विदेश के लोगों को अपने प्रदेश की कला, संस्कृति, समृद्ध विरासत और विकास को झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं.इसके साथ ही केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय भी अपने विभागों की बड़ी उपलब्धियों को झांकी के माध्यम से दिखाते हैं.वर्ष 2016 में बिहार की झांकी आखिरी बार राजपथ पर दिखी थी.उस वर्ष गांधी की चंपारण यात्रा पर झांकी आधारित थी.


इसके बाद झांकियों के चयन के लिए रक्षा मंत्रालय की तरफ से बनाई गई विशेषज्ञ कमेटी ने बिहार की झांकी को रिजेक्ट करने का सिलसिला जारी रखा है.इस तरह पांच साल से स्टेट्स को मंजूरी नहीं मिल रही है.

वर्ष 2017 में बिहार ने प्राचीन शिक्षा संस्थान बिक्रमशिला पर झांकी भेजी थी लेकिन उसे भी मंजूर नहीं किया गया था.वर्ष 2018 में मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार की झाकियों में कुछ खास थीम नहीं थी, जिसकी वजह से झाकियों को रिजेक्ट कर दिया गया.वर्ष 2019 में शराबबंदी की थीम पर बनी झांकी स्टेट्स को मंजूरी नहीं मिली.वर्ष 2020 में जल-जीवन-हरियाली की थीम पर झांसी स्टेट्स को नामंजूर कर दी दी गयी.वर्ष 2021 में फिर से जल-जीवन-हरियाली की थीम पर झांसी स्टेट्स को नामंजूर कर दी दी गयी.


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