जनादेश
हाउसिंग में मंदी का असर सब पर है-विजय आचार्य

अखंड प्रताप सिंह

एसोचैम यानी एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड जोर शोर से अपनी रजत जयंती और इस अवसर पर एक अवार्ड समारोह आयोजित करने की तैयारियों में लगा है.   इस अवसर पर हमने सोचा क्यों ना इसके अध्यक्ष विजय आचार्य से बातचीत की जाए. फिर हमने संस्था के सेक्रेटरी जनरल आलोक शरन और अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में विजय आचार्य से विस्तृत बातचीत की- 


विजय आचार्य एक लोकप्रिय और बहुआयामी प्रतिभा के धनी कानूनी सलाहकार हैं जिनको उपभोक्ता संरक्षण एवं सामाजिक उन्नयन के प्रति समर्पित प्रबंधन के विभिन्न विधाओं में महारत हासिल है. उपभोक्ता जागरूकता के क्षेत्र में इन्हें राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है. पढ़िये उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

-प्रदेश के विकास में एसोचेम की क्या भूमिका है?
*जैसा कि सभी जानते हैं कि जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य होने के नाते हमारा प्रदेश सबसे बड़ा बाजार भी है. एसोचेम का फोकस उद्योगों के विकास में सहयोग देना है. हम लोग जो भी इंडस्ट्रियल पालिसी आती है उसपर सरकार को अपने सुझाव देते हैं. इस क्षेत्र में जो भी समस्याएं आती हैं उस पर सरकार को विचार करने के लिए अपना फीडबैक भी देते हैं.

-क्या आप लोगों का संवाद केंद्र सरकार के साथ भी होता है या सिर्फ प्रदेश सरकार तक ही सीमित है?
* ज्यादातर प्रदेश सरकार के साथ ही मीटिंग होती है. प्रदेश के औद्योगिक विकास आयुक्त से हम लोगों का लगातार कोआर्डिनेशन और इंटरैक्शन होता रहता है और वो इस पर गौर करते हैं. केंद्र सरकार के साथ भी हमारा इंटरेक्शन होता है पर कम. वैसे बजट के लिए भी हम लोग अपने सुझाव देते हैं.

-आपको इन दोनों सरकारों से किस तरह की मदद मिल रही है?
* उद्योगों के विकास के लिए योगी सरकार काफी प्रयास कर रही है. जबसे सरकार आई है कई पॉलिसीज आईं हैं उसको रिव्यु कर के इम्पलीमेंट भी कर रही है. योगी सरकार के आने के बाद दो इन्वेस्टर समिट हो चुके हैं और अभी काफी बड़े स्तर पर डिफेंस एक्सपो आयोजित करने की तैयारियां चल रही हैं.

- ऊर्जा के क्षेत्र में क्या हो रहा है?
* बिजली आपूर्ति में थोड़ा सुधार तो हुआ है. इसके अलावा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी काफी काम हो रहा है. 

-प्रदेश में किस तरह के उद्योगों के विकास की  संभावना ज्यादा दिखती है? 
* कृषि पर आधारित उद्योगों का उत्तर प्रदेश में काफी स्कोप है. विशेषकर फ़ूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र काफी संभावनाएं हैं. 

-प्रयास तो ठीक हैं पर उत्तर प्रदेश में नए उद्योग तो आ नहीं रहे हैं?
* सरकार ऐसी पॉलिसीज ला रही है जिसका असर दिखेगा. एमएसएमई पर सरकार का बहुत फोकस है. मार्केट के भी बहुत चैलेंजेज हैं. वैसे यूपी में बड़ी इंडस्ट्रीज आनी चाहिए. पर सबसे बड़ी समस्या ये है कि बाज़ार में पैसा नहीं है जिससे विकास में वो तेजी नहीं आ पा रही है.

-तो बाज़ार में पैसा न होने के क्या कारण हैं?
* बाज़ार में पैसा न होने का एक सबसे बड़ा कारण नोटबन्दी है. दूसरा कॉमपलिआन्सेस काफी जटिल हो गई हैं जिससे छोटे व्यापारी काफी प्रभावित हो रहे हैं.

-तो फिर विकास होगा कैसे?
* जब तक इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा नहीं खर्च होगा तब तक ठीक तरह से विकास नही होगा. हाउसिंग सेक्टर में जबरदस्त मंदी है और इससे जुड़ी लगभग सौ से ज़्यादा इंडस्ट्रीज भी तबाह हो गईं हैं. इनके डूबने से बाकी सारी इंडस्ट्रीज पर भी काफी फ़र्क़ पड़ा है. डिमांड न होने की वजह से स्टील सहित कई इंडस्ट्रीज बन्द हो रही हैं. 

-अपने देश में जीडीपी इतनी क्यों गिरती जा रही है?
* एक तो नोटबंदी का काफी असर रहा है. दूसरा जीएसटी इम्प्लीमेंटेशन को लोग समझ नही पा रहे हैं. देश के विकास में अनआर्गनाइज्ड सेक्टर बहुत बड़ी मार्केट कवर करता था जिसको आर्गनाइज्ड होने में इन पॉलिसीज को अडॉप्ट करने में काफी परेशानी हो रही है. जीडीपी गिर रही है इसीलिये इंडस्ट्रीज नहीं आ पा रही हैं और एग्जिस्टिंग इंडस्ट्रीज सर्वाइवल के लिए स्ट्रगल कर रही हैं. हाउसिंग सेक्टर में मंदी का ही असर सब पर है.

-हाउसिंग सेक्टर का कैसा भविष्य देख रहे है आप?
* सरकार इस सेक्टर को उबारने की कोशिस तो कर रही है. एनबीसीसी ने अनफिनिश्ड फ्लैट्स को फिनिश्ड करने का काम भी शुरू कर दिया है. 

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