जनादेश
काली मिर्च जिसने बदल दी दुनिया

अंबरीश कुमार 

जड़ी बूटी और मसालों पर चर्चा चल रही है तो काली मिर्च इसमें सबसे ऊपर है जिसने दुनिया बदल दी .एक दौर वह था जब व्यापारी समुद्री यात्री इस मसाले को केरल से से लेकर दूसरे देशों में जाते और महंगे दाम में बेचते .दरअसल इस काली मिर्च की गंध ,स्वाद और अन्य गुणों के सामने कोई मसाला टिकता भी नहीं है .जब यूरोप तक यह मसाला पहली बार पहुंचा तो इसके स्वाद ने तहलका मचा दिया .वह दौर था जब स्वाद तंतु को मसालों का ज्यादा स्वाद लगा भी नहीं था .इसे महंगे दामों पर यूरोप में लोग लेने लगे और हर तरह के व्यंजन में इस्तेमाल करने लगे .मांसाहारी लोगों को यह खूब भाया .यही वजह है कि इसे ज्यादा दाम देकर यूरोप में लोगों ने लिया और काला सोना भी कहा .पर व्यापारी और समुद्री यात्रा कितना ले जाते .लिहाजा खुद यूरोपीय भी निकले तो दूसरे भी .कभी कालीकट जाएं तो एक समुद्र तट है कप्पाड .कई लोक कपाट भी कहते हैं .दिन था बीस मई 1498 ईस्वी जब वास्को डिगामा वहां उतरा और भारत में राजनैतिक उथल पुथल शुरू हुई .आज भी वह स्मारक वहां मौजूद है .काली मिर्च के कारोबार और उपनिवेशवाद की कहानी भी उसी दिन से शुरू हुई .इतिहास में फिर कभी पर काली मिर्च ही तो थी जो सभी को भारत की धरती पर विदेशियों को ले आई .इस काली मिर्च के बिना आप आज कोई व्यंजन खासकर मांसाहारी तो सोच भी नहीं सकते हैं .

आयुर्वेद में तो इसे  एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल माना ही जाता है .और भी स्वास्थ्य प्रणालियों में इसके गुण बताएं गए हैं .यह प्रतिरोधक ताकत बढाता है .कोरोना के दौर में चाय के साथ भी दो तीन दाने काली मिर्च ,अदरक और तुलसी रामबाण माना जाता है .अंग्रेज सुबह के नाश्ते में जो उबला अंडा लेते थे उसपर नमक के साथ इसे भी बुरक कर जरुर डालते . एक दौर वह नही था जब स्वाद बढाने वाली  काली मिर्च का चलन करेंसी की तरह था.अब तो कई देश काली मिर्च उगाते है पर केरल के तटीय अंचल की काली मिर्च सबसे बेहतर मानी जाती है .कालीकट में मैंने इसकी मंडी भी देखी जो अद्भुत थी .पर फिलहाल आप रोज दो चार दाना काली मिर्च का जरुर लें .इससे भूख बढ़ेगी .यह चर्बी को घटाती भी है इसलिए वजन भी ठीक रखेगी .सर्दी जुकाम में यह बहुत लाभदायक है .कफ को नियंत्रित भी करती है .

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