जनादेश
अंतिम विदा की तस्वीर

अंकित सिंह 

ये अंतिम विदा की तस्वीर है, एक पिता की अपने बच्चो से.पिता जिसने लगभग 100 से ज्यादा कोरोना मरीजों का उपचार किया.पिता अस्पताल गए, फिर कभी नहीं लौटे.अपने देश की गंदगी साफ करते-करते उसकी चपेट में आ गए और फिर मृत्यु.डॉक्टर एच. अली नाम है इनका, ये आज इंडोनेशिया के हीरो हैं.

कभी-कभी ईश्वर कितना निष्ठुर हो जाता है ना, ये बच्चे कितना समझते होंगे?इनके लिए पिता जैसे रोज अस्पताल जाते होंगे वैसे ही उस दिन भी गए होगे, लेकिन उस दिन पिता पुनः नहीं लौटे, उन्होंने 100 के करीब कोरोना मरीजों को देखा.गेट से खड़े होकर अपने बच्चों को देख रहे थे, उनके पास जाने से भी डर रहे थे, ये कैसा वायरस है जिसने अपनों को अपनों से दूर कर दिया है.उन्होंने जाते हुए अपने बच्चों को इंडोनेशयाई भाषा मे यही बोला था- जल्द मिलेंगे, माँ के साथ रहना.वो जल्द अब इन बच्चों के जीवन मे नही आएगा, ये बच्चे सीढ़ियों पे बैठे बस इंतज़ार करते रहेंगे अपने पिता का.

कभी-कभी लगता है, ईश्वर इतना निर्दयी कैसे हो सकता है?आप अब जहाँ भी हैं- नमन पहुँचे हमारा, आप अपने देश के योद्धा थे.ये "थे" शब्द कितना खतरनाक होता है ना?

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