जनादेश
कोरोना के साइड इफेक्ट्स

संजय वर्मा 

कोरोना के साइड इफेक्ट्स... !दो ही दिनों में दफ्तर याद आने लगा है . अगर लंबे समय तक घर बैठना पड़ा तो क्या होगा .इसराइली लेखक युवाल नोहा हरारी कहते हैं - बहुत जल्द आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स की वजह से एक बहुत बड़ी आबादी बेरोजगार हो जाएगी . दुनिया में पहली बार एक नए क्लास का जन्म होगा - 'यूजलेस क्लास' ! हालांकि बेरोजगारी के बावज़ूद इन लोगों को खाने कमाने की चिंता नहीं होगी क्योंकि सरकार को कंप्यूटर कंपनियों से टैक्स के रूप में बहुत बड़ी रकम मिलेगी उससे इन लोगों को हर महीने मुफ्त तनख्वाह मिलेगी , ताकि उपभोक्ता के रूप में इनकी आवश्यकता बनी रहे . लेकिन घर पर बेकार बैठने की वजह से इनमें से कई लोग अपना मानसिक संतुलन खो बैठेंगे. आने वाले समय में अपना भावनात्मक और मानसिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी.


हम इंसान सिर्फ पैसों के लिए काम नहीं करते. काम हमारी पहचान से जुड़ गया है और ज्यादातर लोगों के आत्मसम्मान का एकमात्र जरिया है. इसलिए जैसे ही लोग रिटायर होते हैं ,पर्याप्त पैसा होने के बावजूद भी बीमार पड़ जाते हैं . हम आमतौर पर शिकायत करते हैं कि हमारे पास काम ज्यादा है आराम नहीं मिल रहा ,पर कोरोना की वजह से घर बैठे लोग शायद समझ पाएंगे कि उन्हें कितना काम और कितना आराम चाहिए .

इस फालतू समय में यह भी सोचा जा सकता है कि काम हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है ? क्या वजह है कि हम अपने परिचय में नाम के साथ ही अपना काम बताते हैं . क्या सचमुच हम अपने काम से प्यार करते हैं ? या कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारे काम की उलझनें हमे जिंदगी के बड़े सवालों से आंख चुराने का मौका देती हैं. यह ठीक वैसा ही है जैसे बाहर के शोर से बचने के लिए दफ्तर के अंदर लगातार कोई संगीत बजा दिया जाता है . एक छोटा शोर बाहर के बड़े शोर की काट होता है . क्या काम भी वैसा ही है .सोचिए .युवाल नोआह हरारी बहुत दिलचस्प बातें कहते हैं. कुछ समय पहले उनकी किताबों पर मैंने ग्लोबल हेराल्ड टीवी के लिए प्रोग्राम किया था समय न कट रहा हूं तो सुन लीजिए.

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