जनादेश
सिंगापुर से सीखने की जरुरत है

डेल फिशर

सिंगापुर में कुल कोरोना वायरस के संक्रमण के 266 मामले हुए हैं. एक भी मौत नहीं हुई है और संक्रमण दर दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत धीमी है.कोरोनावायरस से निपटने के लिए सिंगापुर द्वारा किए जा रहे प्रयास को पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल के रूप मे पेश किया जा रहा. इस सप्ताह के शुरू होने तक, पूरे सिंगापुर में कोरोना वाइरस के कुल 266 मामले थे और और एक भी मौत नहीं हुई थी साथ हीं कोरोनॉयरस की संक्रमण दर सिंगापुर मे दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत धीमी है.

इस प्रकार की त्वरित और असरदार प्रतिक्रिया में जिस चीज़ ने सबसे पहले सिंगापुर की मदद की. वह थी 2002-03 के सार्स प्रकोप के दौरान हुए अनुभव और इसके बाद इन हालत से निपटने की पूर्व तैयारी. 2003 के कटु अनुभव से को पहले से हीं पता था इसका बुनियादी ढांचा इस तरह के महामारी वाले प्रकोप के लिए तैयार नहीं था. इसलिए, इसके बाद के वर्षों के बाद आइसोलेशन सेंटर वाले कई अस्पताल बनाए गए थे और अधिक नकारात्मक दबाव (निगेटिव प्रेसर) वाले कमरे भी तैयार किए गये थे. इनके अलावा ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए एक विशेष कानून भी बनाया गया.


फरवरी 2020 में सिंगापुर ने फिर से एक बार यह स्पष्ट कर दिया था कि इस वायरस से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणाम काफ़ी भयावह होने की संभावना थी. हमें यह पता था कि क्योंकि हम देख रहे थे कि चीन में क्या हुआ है? इस वायरस ने 150 करोड़ की आबादी वाले देश को इसके घुटनों पर ला खड़ा किया था.


दक्षिण पूर्व एशिया के बाकी देश- ताइवान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया आदि  भी इस आशंका से ग्रस्त तो थे पर साथ हीं अपनी तैयारी भी कर रहे थे. इन देशों के मन में इस बारे में कोई भ्रम नहीं था कि यह वायरस क्या और कितना विनाश फैला सकता है. परंतु, अभी भी दुनिया के अन्य हिस्से के देश पूरी तैयारी नहीं कर रहे थे.

हमने इस मामले को संभालने के लिए अलग से क्या किया. इस पर अगर नज़र डालें तो मुझे लगता है कि सिंगापुर का सबसे बड़ा सकारात्मक कदम था कि रोगियों को समुदाय में वापस नहीं लाया गया. चीन ने भी ऐसा नहीं किया. वुहान के दो बड़े अस्थायी अस्पतालों में 50000 बिस्तरों वाले अस्पताल बनाए गये और उन्हें पूरी तरह संक्रमण मुक्त होने तक वहीं रखा गया. ये वास्तविक रुप से बीमार लोगों के लिए बने अस्पताल नहीं थे, बल्कि इनमें उन हल्के मामले वाले मरीज थे जिन्हें ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में मामूली इलाज के बाद घर भेज दिया जाता है.


होम क्वॉरंटीन कतई भी आसान नहीं है. इस दौरान आप अपने परिवार के साथ भी नहीं घुल-मिल सकते. आपके पास अपना अलग शौचालय होना चाहिए. आप को किसी भी आगंतुक से भी नहीं मिलना होता है. यदि आप संक्रमित लोगों को घर पर हीं रखने जा रहे हैं, तो आपको वास्तव में यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वे इसे किसी अन्य को ट्रांसफर ना कर पाएं.सिंगापुर में हम उन लोगों को समाज से काट देना बेहतर समझते हैं और वायरस से स्पष्ट रूप से मुक्त होने तक उन्हें कड़ी देख रेख में रखते हैं. हल्के मामलों वाले लोगों को भी अस्पतालों में रखा जाता है. हमारे पास सभी पॉज़िटिव रोगियों को एक साथ रखने के लिए पर्याप्त स्थान उप्लब्ध है.



यदि आप लोगों की देखभाल उनके घर पर हीं करने जा रहे हैं, तो आप कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे सेल्फ़ आइसोलेशन के नियमों का पालन कर रहे हैं या नही? क्या आप उनके फोन की ट्रैकिंग कर रहे हैं? क्या आप नियमित रूप से उनकी पर्याप्त जांच सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं? क्या लोगों को नियमों का पालन ना करने से रोकने के लिए पर्याप्त दंड विधान हैं?

सिंगापुर में कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए अलग टीमें हैं, जो किसी भी संक्रमित व्यक्ति के सभी संपर्कों की पहचान करती हैं और उन्हें आगाह करती हैं. अक्सर इन लोगों में शुरुआती लक्षण हीं होते हैं फिर भी और हम उन्हें अस्पताल ले जा कर उनकी जांच करने की पूरी व्यवस्था करते हैं.


सिंगापुर हमारे परीक्षण के नियम काफ़ी लचीले और विस्तृत हैं. हमारे कुल परीक्षणों में से 1 प्रतिशत से कम हीं सकारात्मक मामले होते हैं, इसलिए यह दर्शाता है कि हम कितने अधिक परीक्षण कर रहे होते हैं.


यदि किन्हीं लोगों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं, तो उन्हें होम क्वॉरंटीन में डाल दिया जाता है और इसके लिए भी काफ़ी सख्त नियम है. एक दिन में दो बार, आपको एक एसएमएस मिलेगा और आपको एक लिंक पर क्लिक करना होगा जो यह बताएगा कि आपका फोन कहां है. यदि आप धोखा देने के लिए किसी और के साथ अपने फोन को घर छोड़ देते हैं, तो सरकार के पास ऐसा तंत्र भी है की इसके प्रतिनिधि गाहे-बेगाहे आपके घर भी आ धमके. नियमों की अवमानना के दंड बहुत कठोर हैं.


हम हमेशा से सामुदायिक संपर्क के स्तर पर काफ़ी मजबूत रहे हैं. हमारे द्वारा भेजे गए संदेश कुछ इस प्रकार होते हैं: यदि आप बीमार हैं, तो घर पर हीं रहें. यदि आप बीमार हैं और कोविड-19 रोगी के साथ संपर्क कर चुके हैं, तो परीक्षण के लिए अवश्य आएं. यदि आप घर में नहीं रह सकते हैं और आपको बाहर जाना है, तो मास्क अवश्य पहनें. यदि आप खांसी करते हैं, तो आपकी कोहनी के सहारे खांसी करें. भीड़ से बचें, विशेष रूप से कमरों के अंदर होने वाली भीड़-भाड़ से.


बाकी सभी के लिए हमारा संदेश होता है कि हम सामाजिक दूरी बनाए रखें. रेस्तरां और बार मालिकों से कहा जाता है कि अपने व्यवसायों में लोगों की संख्या को कम करने का प्रयास करें. लोग पहले से हीं जानते हैं कि उन्हें क्या करना है और उन्हें पता होता है कि अगर कोई लॉकडाउन होता है, तो सबकुछ बंद हो जाने वाला है जिससे उनके व्यवसाय और आमदनी को काफ़ी हानि हो सकती है. हर कोई हमारे संदेश समझता है और स्वीकार करता है. सब जानते हैं कि जब लोग आदेशों का पालन नही करते तो क्या होता- हम उन्हें जबरन बंद कर देते हैं.


हमारे द्वारा की जाने वालेई मैसेजिंग हमेशा बहुत रणनीतिक रही है. यह एक क्रॉस-मिनिस्ट्रियल टास्क फोर्स की तरह है . हम इसे केवल एक स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं मानते बल्कि इसे पूरे सरकार से संबंधित मुद्दा मानते हैं. प्रधानमंत्री जी स्वयं हर दो हफ्ते में टेलीविजन पर संदेश देते हैं. टास्क फोर्स का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति अब एक जाना-माना चेहरा बन चुका है. मैसेजिंग की प्रक्रिया आमतौर पर आधिāकारिक लोगों की एक छोटी संख्या तक हीं सीमित होती है.


इस पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता है. सरकार में लोगों का पहले से ही बहुत विश्वास है, जिससे काफी मदद मिलती है.

सरकार के स्तर पर भी निरंतर संदेश दिए जाते हैं- इसमे वे नवीनतम संख्या के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं और बताते हैं कि अन्य देशों में क्या हो रहा है और सिंगापुर में क्या करने की आवश्यकता हो सकती है.हमने कार्टून के माध्यम से भी एक जन जागरूकता अभियान बनाया है. यह एक वैकल्पिक माध्यम है जिससे काफ़ी लोग जुड़ सकते हैं. ये संदश बहुत लोकप्रिय हैं, इन्हें ऑनलाइन 1 मिलियन से भी अधिक बार देखा गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन अब इनका कई अन्य भाषाओं में अनुवाद करवा रहा है.



हम यह बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि बच्चे इस संक्रमण के प्रति बहुत संवेदनशील नहीं हैं या वे सिर्फ़ हल्के रूप से रोग ग्रस्त होते हैं, इसलिए स्कूलों को बंद करने का कोई वास्तविक कारण नहीं है. यदि आप स्कूल बंद करते हैं, तो उन्हें फिर से खोलने के लिए क्या परिस्थितियां अनुकूल मानी जाएंगी?सिंगापुर में, हम हमेशा चाहते हैं कि जीवन सामान्य रूप से आगे बढ़े. हम चाहते हैं कि व्यवसाय, चर्च, रेस्तरां और स्कूल सब खुले रहें. सफलता का असल मकसद भई यही है. आवश्यकतानुसार किए जाने वाले संशोधनों के साथ सब कुछ आगे बढ़ता रहता है, और यह सिलसिला तब तक जारी रहता है जब तक इस रोग के लिए कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं होता.


परीक्षण के सन्दर्भ में हमारी न्यूनतम सीमा काफ़ी कम है. पहले सप्ताह के लिए, हमने केवल वुहान या हुबेई प्रांत के लोगों का परीक्षण किया, फिर हमने पिछले 15 दिनों के भीतर चीन में रहने वाले किसी भी व्यक्ति का परीक्षण किया.जनवरी के अंत तक, हमारे सभी सार्वजनिक अस्पताल परीक्षण के लिए तैयार थे. फिर हमने स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ा दिया. हमने श्वसन संबंधी बीमारी के साथ अस्पताल में आने वाले हर एक उस व्यक्ति का परीक्षण किया, जो किसी भी कोविड-19 रोगी के संपर्क में आया था.


अब, यह दायरा और भी अधिक उदार हो गया है. यदि आप एक अस्पताल के कर्मचारी हैं और आपको थोड़ी भी ठंड लग रही है तो हम आपका टेस्ट करेंगे. लेकिन अगर आप किसी सामान्य व्यक्ति हैं जिसका किसी भी ज्ञात रोगी के साथ संपर्क में नहीं हैं और केवल हल्के लक्षण हैं, तो हम आपको घर भेज देंगे. आप को एक चिकित्सा प्रमाण पत्र मिलेगा जो आपको अगले पांच दिनों के लिए काम से दूर घर पर रहने की अनुमति देता है. यदि आप एक अस्थाई कार्यकर्ता हैं, तो इसके साथ ही वित्तीय सहायता भी दी जाती है.

इन सबमे कुछ अधिक खास नही है. हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, हम बस इसे अच्छी तरह से और पूरी कुशलता से करते हैं.जटिल राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले बड़े देशों में इन चीजों को सम्यक रूप से करना निश्चित रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि लोगों को अपनी भूमिकाएं अधिक स्पष्टता के साथ जानने की जरूरत है.मिसाल के तौर पर, संपूर्ण राष्ट्र से संपर्क करना राष्ट्रीय सरकार के कार्यक्षेत्र में आना चाहिए, लेकिन राज्य स्तर प्रासंगिक चीजों के बारे में राज्य सरकारों को बात करनी चाहिए.यह वास्तव में सही संदेश प्रसारित करने के लिए नेतृत्त्व के एक टीम के रूप व्यवस्थित होने का मामला है. जब ऐसा हो जाएगा तब लोग अधिक सहज महसूस करेंगे और नियमों का पालन करने की अधिक संभावना होगी.द प्रिंट से साभार लिया यह लेख एक क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत The Conversation से फिर से प्रकाशित किया गया है. 


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