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मलेरिया क्षेत्र में कोरोना असर बहुत कम ?

सुजाता चौधरी 

नई दिल्ली .सड़कों पर दिल्ली और नोएडा से आने वाले हुजूम को देखकर मन बहुत व्यथित था. लेकिन चिकित्सकों और साइंटिस्टों से बात करके मन को थोड़ा सुकून मिला. शायद आपके भी व्यथित मन को यह बात कुछ राहत पहुंचाए.दुनिया के नक्शे को देखिए. दुनिया में तीन क्षेत्र हैं -जो मलेरिया क्षेत्र कहलाते हैं. पहला अफ्रीका, दूसरा दक्षिण एशिया औऱ तीसरा दक्षिण पूर्व एशिया. इन तीनों क्षेत्रों में कोरोना का प्रकोप अपेक्षाकृत कम है ,जब कोरोना चीन से बाहर निकला तो डब्ल्यूएचओ ने चिंता व्यक्त की कि अगर यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया की घनी आबादी में प्रवेश करेगा तो महाप्रलय आ जाएगा .क्योंकि इन क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत कमजोर है और अगर बड़ी मात्रा में लोग बीमार पड़ेंगे तो मरने के सिवा और कोई दूसरा उपाय नहीं होगा. लेकिन कोरोना का कहर इन क्षेत्रों की अपेक्षा यूरोप और अमेरिका की धनी और उच्च जीवनशैली अपनाने वाले लोगों में अधिक फैल गया. इसके कुछ कारण हो सकते हैं .

एक कारण है ,इन क्षेत्रों में बहुत से कोरोना वायरस जो कोविड 19 से मिलते जुलते हैं , लेकिन कम घातक हैं, पहले से ही व्याप्त हैं .उनके खिलाफ इस क्षेत्र के लोगों में इम्युनिटी है जो कुछ हदतक कोविड 19 से भी बचाव कर सकते हैं.दूसरा कारण है ,इन क्षेत्रों की गर्म जलवायु .सूरज की रोशनी- वायरसों और जीवाणुओं को समाप्त करने का सबसे कारगर साधन है . जिन क्षेत्रों में सूर्य देवता की विशेष कृपा है,वहां कहर शायद कम हो.

तीसरा कारण है- मनुष्य में संक्रमण करते-करते वायरस बाद में कमजोर पड़ जाता है , उम्मीद है इन क्षेत्रों में आते-आते वायरस इतना कमजोर हो जाए कि उसकी घातक क्षमता हमें कम नुकसान पहुंचा पाएगी .लेकिन फिर भी बहुत जरूरत है सजग रहने की ,लोगों से बचकर रहने की और बहुत जरूरत है अपने इम्युनिटी को बढ़ाने की. शारीरिक व्यायाम करने की,पौष्टिक भोजन करने की और सबसे अधिक जरूरत है उन भाइयों और बहनों के लिए कुछ करने की जो लुट पिटकर महानगरों से आ रहे हैं .साभार फेसबुक से 


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