जनादेश

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लाक डाउन में तस्मानिया

शैलेंद्र प्रताप सिंह 

आज तस्मानिया से अपने वतन को मेरी वापसी का दिन था पर वहां लाक डाउन है , मेलबर्न से दिल्ली की एअर इंडिया की उड़ान निरस्त है , सो वापसी का अभी सवाल नही उठता . कब सब खुलेगा , पता नहीं . तब तक मुझे यहीं लांचेस्टन तस्मानिया का ही लुत्फ लेना है .

यहां भी बडा सा घर है , पिछले साल बेटी दामाद ने न्यूज़ीलैंड से यहां आते ही यह घर खरीद लिया था . पत्नी भी यहीं है सो करीब करीब आधा परिवार यहां , आधा वहां है . लगता है मै तो बस मंचूक की तरह हूं.भवाली में अचानक एक सुबह मन किया था कि गांव में होली मनाकर तस्मानिया 15-20 दिन के लिये टहल आऊं . बेटी ने टिकट भेज दिया . रेल सहित मेरे सारे टिकट / यात्रा का जिम्मा बेटी के पास है . यहां आने के अगले दिन से ही क्वारनटाइन के नियम भी सख़्त हो गये . सोचता हूँ कि जिंदगी जीने का मजा यही है कि ‘ जाहे विधि राखे राम , ताहि विधि रहिये ‘ . एक शेर भी है -

‘ न खुशी अच्छी , ऐ दिल , न मलाल अच्छा है ,

यार जिस हाल में रखे , वह हाल अच्छा है .

ऊपर वाले के ऐसे आदेश में कुछ अच्छा ही छिपा होगा , यह मानता हूं . यहां का खूब लुत्फ उठा रहा हूं . कभी भी मन में एक छड़ के लिये भी यह नही आया कि मैं तो फंस गया 

भवाली में मुख्यत: अकेले रहता था . यहां भी घर है , बेटी दामाद है , पत्नी है , आन लाइन कक्षायें लेने के कारण बच्चे घर पर ही रहते है , रोज ही हम लोग शाम को घूमने निकल जाते है . बेटियों का वैसे भी पिता के साथ विशेष रिश्ता रहता है . टहलना धूमना भी हो जाता है . यहां घूमना टहलना आवश्यक सेवाओं की तरह माना जाता है , बस दो से ज्यादा कहीं इकत्रित न रहिये .

लानचेस्टन से ही टैमर नदी निकलती और करीब 50 कि दूर समुद्र में मिलती है . यह इलाका तस्मानिया का सबसे उर्वरक क्षेत्र है . आसपास बडे बडे फार्म है . वहां टहलते हुये लोग अपने घरो के सामने अपने उत्पाद बिक्री के लिये रख देते है . कल मैंने देखा कि पड़ोस के एक घर के बाहर लोगों को मुफ्त में भी ले जाने के लिये सेब नाशपाती आदि फल रखे थे .


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