जनादेश

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वे देश जो बेहतर कर रहे है

शैलेंद्र प्रताप सिंह 

कोरोना के सम्बंध में मैने  27 मार्च को ही साफ लिखा था कि कोरोना से वही देश / राज्य निपट पायेगा जो अपने सारे मरीज चिह्नित कर , अलग कर , इलाज कर स्वस्थ कर लेगा और बाहर से बिना क्वारनटिन  किये लोगों को अंदर आने नही देगा । जागरूक जनता , प्रश्न पूछने वाली जनता इस सबके लिये बहुत जरूरी है .इधर मैं देख रहा हूं कि जिन देशो में इस दिशा में काम हुआ है यथा साउथ कोरिया , जापान , सिंगापुर , हांगकांग और यहां तक की आस्ट्रेलिया , वहां हालात अभी अमेरिका आदि देशों की तरह बेकाबू नही हो रहे है वरन वहां से अच्छी खबरें आ रही है.

रात सिंगापुर के हालात पर रिपोर्ट देख रहा था , जहां कोई लाक डाउन नही है और हालात नियंत्रित है । दलदल में बसे छोटे से देश सिंगापुर ने अपने संसाधनो को कहां से कहां पहुंचाया है , देखने लायक है ।

ट्रम्प ने अमेरिका की स्थित वाकई खराब कर रखी है .नाम चोमस्की  91 वर्षीय प्रसिद्ध भाषाविद और राजनैतिक विश्लेषक  का मैं एक साक्षात्कार सुन रहा था जिसमें उन्होने कहा कि यह बहुत ही खौफनाक है कि इस कठिन दौर में ट्रम्प जैसा असामाजिक विदूषक सत्ता में है.

सूचना के लिये बता दूं कि यहां आस्ट्रेलिया में भी सिडनी और मेलबर्न जैसे पचास पचास लाख से ज्यादा जनसंख्या के शहर है . अकेले न्यूयार्क में जहां इस समय प्रतिदिन करीब दस हजार पाजिटिव मामले सामने आ रहे है वहीं पूरे आस्ट्रेलिया का ग्राफ समतल हो रहा है और प्रतिदिन बस 200- 250 मामले ही सामने आ रहे है . बिना कारण के कुछ नही होता । कोई न कोई तो अमेरिका की इस स्थिति के लिये जिम्मेदार होगा.

मैने उक्त पोस्ट में यह भी लिखा था कि किसी देश के अंदर के कुछ राज्य भी इसी तरह सफल होगे जो उपरोक्तानुसार प्रभावी कार्यवाही करेगे और इस सम्बंध में अपने देश में केरल का काम सबसे ठीक समझ में आ रहा है . वहां मरीजों को चिन्हित कर अलग कर लिया गया है . कुल लगंभग 300 मामलों में 200 से ज्यादा विदेश से आए थे , 14 लोग ठीक भी हो गये .केवल दो की मृत्यु हुई है.

इस समय मैं आस्ट्रेलिया में हूं और यहां यह देखता हूँ कि हिंदुस्तान का उत्तर सत्यता युग ( या झूठ युग ) अभी यहां नही पहुचा है । यहां की मीडिया भी अभी सूचनाओं को तोड़ मरोड़ कर मिर्च मसाला नही मिला रही है .लोग भी देशभक्ति के नाम पर विभाजनकारी देशद्रोही काम नहीं कर रहे है .अंधविश्वास  और अवैज्ञानिक सोच भी दिखाई नही पड़ती है . मतलब इन तमाम मामलों में यह अभी हमारे देश से बहुत पीछे है .लोग जागरूक है और सरकार से सवाल पूंछ रहे है .अब भविष्य ही बतायेगा कि कोरोना से निपटने में कौन आगे निकलता है ?छोटी की एक बात और ? अब जबकि कोरोना , हमारे शहर और मोहल्ले तक आ ही गया है तो उसे घर से दूर रखने के लिये अपनी प्रतिरोधक क्षमता .जिस दिये में जान होगी , वह दिया रह जायेगा .


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