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जालंधर से हिमाचल

पंकज चतुर्वेदी 

नई दिल्ली .पंजाब से हिमाचल के पहाड़ बिलकुल साफ़ दिख रहे हैं , हवा इतनी शद्ध है कि बीते सत्तर साल में नहीं रही, नदियों के जल गुणवत्ता में भी बेहतरी आई है . कार्बन उत्सर्जन का आंकडा मानक से नीचे आ गया . जंगल के जानवर अब उन्मुक्त हो कर घूम रहे हैं , पंछियों की चहचाहट ज्यादा देर सुनाई दे रही है .भले ही एक लाइलाज बीमारी के कारण हुआ लेकिन तेजी से दूषित हो रही प्रकृति ने चेतावनी दे दी कि मेरे साथ ज्यादा खिलवाड़ करोगे तो उसका इलाज भी कायनात को आता है .

यह किसी से छुपा नहीं कि दुनिया यायातात प्रबंधन, जाम व् औद्योगिक प्रदुषण, जल की गुणवत्ता आदि दिक्कतों से जूझ रही है और इसके मशीनी निदान पर हर साल अरबों डॉलर खर्च होते हैं .कोरोना ने बता दिया कि वह अरबों डॉलर खर्च मत करो बस हर साल में दो बार एक एक हफ्ते का लॉक डाउन कड़ाई से लागू कर दो , प्रकृति नैसर्गिक बनी रहेगी .क्या आफिस का बड़ा काम घर से हो सकता है ? क्या स्कूल में बच्चों का हर रोज जाना जरुरी नहीं ? क्या समाज के बेवजह विचरने की आदत पर नियंत्रण हो सकता है ? ऐसे भी कई सवाल और प्रकृति - शुद्धिकरण के विकल्प ये दिन दे गये .अपराध कम हो रहे हैं, सडक दुर्घटना कम हो रही हैं ,दूषित खाना खाने से बीमार होने वालों की संख्या कम हो रही है .देखिये जालंधर से हिमाचल के पहाड़ों का नजारा.

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