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आज बाबूजी का जन्मदिन है

चंचल 

आज यानी पांच अप्रैल बाबू जगजीवन राम का जन्म दिन है . बाबू जी बिहार से उठे और तमाम 'असुविधाओं ' को झेलते हुए शिखर पर जा बैठे . काशी विश्व विद्यालय के छात्र थे , बिरला छात्रावास के कमरा नम्बर 19 उनके नाम से आवंटित हुआ . यहां उन्हें पाखंडी सनातनियों द्वारा बहुत अपमानित होना पड़ा था लेकिन इस विश्व विद्यालय का मोह वे कभी नही छोड़ पाए .

हमारी उनसे जान पहचान 77 में हुई . हम संघ को हराकर छात्रसंघ का चुनाव जीते थे . इस खबर से बाबू जी बहुत खुश थे . इसके पहले ही वे हमारा नाम सुन चुके थे . आपातकाल के खत्म होने के बाद बाबू जी कांग्रेस से अलग सीएफडी  बना लिए थे और सासाराम से प्रत्यासी थे . एक दिन सच्चिदा बाबू ( भाई जगदानंद के बड़े भाई और प्रसिद्ध समाजवादी ) बनारस आये थे और हमे चुनाव प्रचार के लिए सासाराम ले गए . वहां बहुत छोटी मुलाकात हुई . बाद में जब हम छात्र संघ का चुनाव जीते तो बाबू जी को हमारे चुनाव जीतने की खबर सच्चिदा भाई ने ही दिया . बाबू जी ने सच्चिदा भाई से कहा इसे दिल्ली बुलाओ . जब ये बात हो रही थी तो उस समय बहुगुणा जी ( स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा ) वहां मौजूद थे , यह जिम्मेदारी बहुगुणा जी ने ले ली और हमारी मुलाकात बाबू जी हो गई . आजीवन मिलते रहे .

इन लोंगो में पंच और विट गजब का रहा . हम जब भी मिलते बाबू जी बे रोक टोक बोलते - आइए अध्यक्ष जी . और हम बोलते - जी मंत्री जी . और जोर का ठहाका लगता .

एक दिन बाबू जी ने कहा - हमारे साथ कोई फोटो नही खिंचवाना चाहते ? कैमरा देखते ही खिसक जाते हो ?इतना भद्दा हूँ ? हमे अंदर से तकलीफ हुई . विश्विद्यालय ने उनके साथ जो किया था , वो याद आ गया . हम चुपचाप संजीदा बने बैठे रहे . अचानक टाइम्स के फोटो ग्राफर आ गए . हम उठे और बाबू जी के बगल में जाकर बैठ गए . फोटो हो गया . हम उठे , चलने को हुए , हाथ जोड़ कर नमस्कार किया , उन्हें कुछ असहज लगा . बोले - बैठिए अभी नही जाना है काफी पीकर जाओ .बोलो , कुछ बोलना चाहते हो ?हमने कहा - हम आपसे नाराज हैं , आपने आज जो बोला है .

- हम जानते थे , तुम्हे तकलीफ हुई है , अब नही बोलूंगा . समाजवादी हो न .बाद में सब सहज जो गया और एक दिन हमने बाबू जी का कैरिकेचर बनाया . हमने कहा इसपर दस्तखत करिये यह हमारी पूंजी है और रहेगी , जब आप याद आओगे हमारे दराज से यह कागद बाहर आएगा .नमन बाबू जी ! आज आपका जन्मदिन है .


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