जनादेश

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नेहरू अकेले रह गए

चंचल 

सरदार पटेल की जिद थी , कांग्रेस का समाजवादी बाहर जाय . जे पी लोहिया दो एक जन और ताव खाये और जंतर मंतर की सीढ़ियों से नीचे आने लगे . डॉ लोहिया ने जे पी को बीच सीढ़ी पर रोका - जल्दबाजी मत करिए , नेहरू का चेहरा देखा , कितना असहाय लग रहा था . ' जे पी नही माने . लोहिया ने कहा - एक बार फिर सोच लो . अगर हम बाहर निकल गए तो फिर कभी पलट कर नही आएंगे . और वही हुआ . अब नेहरू को समझ मे आया - गांधी कितने बड़े मन और मिजाज के थे . जिस संगठन को खड़ा किया , वह भी उनके साथ पूर्णता में नही रह गया . बापू की विरासत में यह अकेलापन भी नेहरू को मिला .

आचार्य नरेन्द्रदेव कांग्रेस छोड़ कर समाजवादी आंदोलन में गए तो विधान सभा से भी इस्तीफा दे दिए . जिन कई लोंगो ने आचार्य को मनाया कि विधान सभा से इस्तीफा मत दीजिये ,उनमें पंडित नेहरू भी शामिल रहे , लेकिन आचार्य नही माने . उप चुनाव घोषित हुआ नेहरू चाहते थे आचार्य के मुकाबले कांग्रेस अपना उम्मीदवार न उतारे लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत जिद कर गए और बाबा राघवदास को खोज कर मैदान में उतारे और जिताये . पंडित नेहरू फिर हारे .

पंडित नेहरू के सख्त आलोचकों में डॉ लोहिया रहे . मुतवातिर हमला कर रहे थे लेकिन नेहरू का प्यार लोहिया पर उसी तरह बरकरार रहा . 1954 में जे पी ने पंडित नेहरू को खत लिखा इसे 14 सूत्रीय कार्यक्रम के नाम से जाना गया . जे पी ने लिखा - अगर कांग्रेस कार्यकारिणी इस प्रस्ताव को मान लेती है, तो समाजवादी कांग्रेस में वापस आ सकते हैं . पंडित नेहरू ने न ही उससे असहमति जताया न उसे कार्यकारणी में ले गए . नेहरू को डर था , पार्टी टूट जाएगी . 1969 में यही प्रस्ताव श्रीमती इंदिरा गांधी लेकर उठी तो कांग्रेस ने श्रीमती गांधी को बाहर कर दिया . इस बार जंतर मंतर से नेहरू बाहर निकल रहे थे .

कांग्रेस फिर बन रही है . इस बार कांग्रेस को जनता खुद उठाकर आगे आएगी .देश लुट चुका है , करोना के बाद जब हम उठने की कोशिश करेंगे तो आर्थिक मुहाने पर हम औंधे गिरे मिलेंगे . उससे लड़ना और फिर उठना बड़ा वक्त लेगा लेकिन हम उठेंगे

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