पर लाट साहब तो कोरोना नहीं ममता से ही भिड़े हुए हैं

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पर लाट साहब तो कोरोना नहीं ममता से ही भिड़े हुए हैं

प्रभाकर मणि तिवारी

कोलकाता .कोरोना वायरस के खिलाफ देशव्यापी जंग औऱ लॉकडाउन के बीच पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच राजनीतिक जंग भी लगातार तेज हो रही है. ऐसा कोई भी दिन नहीं बीत रहा है जब राज्यपाल ने कोरोना के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में नहीं खडा किया हो. धनखड़ ने अपने ताजा ट्वीट में बंगाल में लॉकडाउन के सरेआम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दोषी अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने और लॉकडाउन को सख्ती से लागू कराने के लिए राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती करने की बात कही है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राजभवन के साथ जारी लॉकडाउन को खत्म करना चाहिए. उनका कहना था कि सरकार राज्यपाल को कोरोना से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रही है. धनखड़ ने कहा कि राज्यपाल के साथ सरकार का लॉकडाउन असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी राज्यपाल का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधती रही हैं.


वैसे तो धनखड़ के बीते साल जुलाई में कार्यभार संभालने के बाद से ही राजभवन और राज्य सचिवालय के बीच रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे हैं. लेकिन अब कोरोना के मुद्दे पर यह जंग लगातार तेज हो रही है. इसी सप्ताह राज्यपाल ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार पर आरोप लगाया कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस व प्रशासन के जो अधिकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए. राज्यपाल ने यह भी मांग की कि राज्य में लॉकडाउन लागू कराने के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को तैनात करने की जरूरत पर विचार होना चाहिए. 

इसके अगले दिन ही ममता ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में किसी का नाम लिए बिना सवाल किया कि बंगाल में अर्धसैनिक बलों की क्या जरूरत है? राज्य में बेहतर तरीके से लॉक डाउन का पालन हो रहा है. कुछ लोग बेवजह इस पर आपत्ति जता रहे हैं. और तो और कुछ लोग यहां सहायता की बात तो दूर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग कर रहे हैं. ममता का कहना था कि लोग फिजूल की बातें कर रहे हैं. यह राजनीति का समय नहीं है. हम लोगों को मिलकर कोरोना को हराना होगा. ममता बनर्जी ने संकट के मौजूदा दौर में राजभवन को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी है.


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी हाल में राज्य के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन में ढिलाई पर चिंता जताई थी. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को दो-दो पत्र भी भेजे थे. उनमें लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले में जिन जगहों का जिक्र किया गया था उनमें से ज्यादातर अल्पसंख्यक-बहुल हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत समय-समय पर जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है.केंद्र सरकार के पत्र पर ममता बनर्जी ने कहा था कि केंद्र सरकार की दिलचस्पी महज कुछ खास इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरते जाने में है. मुख्यमंत्री का कहना था कि हम किसी सांप्रदायिक वायरस से मुकाबला नहीं कर रहे हैं. हम ऐसी बीमारी से लड़ रहे हैं जो मनुष्य के संपर्क में आने से फैलती है. जहां भी हमें दिक्कत दिखेगी, वहां लॉकडाउन लागू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे .लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि तमाम दुकानें बंद रहेंगी. सरकार हालात पर कड़ी निगाह रख रही है.

भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी कई बार आरोप लगा चुका है कि कई इलाकों में लॉकडाउन का सरेआम उल्लंघन हो रहा है. पार्टी के एक प्रतिनिधमंडल ने बीते सप्ताह राज्भवन में राज्यपाल से मुलाकात कर उनको भी यह शिकायत की थी. पार्टी के नेताओं ने राज्य सरकार पर कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा चिपाने का भी आरोप लगाया है. लेकिन ममता की दलील है कि इससे सरकार को क्या हासिल होगा. आखिर पहले भी वह मलेरिया और डेंगू से मरने वालो के आंकड़े बताती रही है.राज्यपाल और मुख्यमंत्री के रुख से साफ है कि कोरोना पर जारी यह राजनीतिक जंग फिलहाल लंबी खिंचेगी.

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