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बनारस में तो विपक्ष ने हथियार डाल दिया

धीरेंद्र श्रीवास्तव

लखनऊ.बनारस में तो विपक्ष ने हथियार डाल दिया  इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ होनी चाहिए. उन्होंने जुबानी जंग में चौकीदार चोर है, का नारा जरूर दिया लेकिन असली लड़ाई में सम्मानित पद का सम्मान रखते हुए वाराणसी में एक बार के पराजित उम्मीदवार को फिर उम्मीदवार बनाकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को वाकओवर दे दिया. तारीफ तो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव की भी होनी चाहिए जिन्होंने एक कांग्रेस नेत्री को पार्टी की सदस्यता देने के कुछ घण्टे बाद ही वाराणसी से गठबन्धन का उम्मीदवार घोषित कर प्रधानमंत्री को संयुक्त विपक्ष की ओर से मिलने वाली चुनौती की सम्भावना को राहुल गांधी  के फैसले से पहले ही समाप्त कर दिया. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी को वाराणसी से चुनाव लड़ना ही नहीं था .दूसरे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रियंका गांधी का नजरिया जानने के बाद अपना उम्मीदवार घोषित किया .पर फिर भी सवाल तो उठ ही रहा है .

केवल वाराणसी में नहीं, विपक्ष का पक्ष के प्रति सम्मान का यह भाव इस बार भी लखनऊ में दिखा. विपक्ष ने  2014 में भी यही किया था. सभी ने राजनाथ सिंह के खिलाफ अलग अलग अपने अपने उम्मीदवार उतारे और परिणाम में पराजय पाए. इस बार सपा, बसपा और रालोद मिलकर चुनाव मैदान में था. कांग्रेस इस गठबन्धन से अलग थी लेकिन बहुत जगह अलग नहीं थी. इसलिए यह भी माना जा रहा था कि राजनाथ सिंह को विपक्ष की ओर से संयुक्त रूप से चुनौती मिल सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ . समाजवादी पार्टी ने लखनऊ से गठबन्धन की ओर से फ़िल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी श्रीमती पूनम सिन्हा को मैदान में उतारा. कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को उतारा है. दोनों का लक्ष्य है, राजनाथ सिंह को हराना लेकिन हराने की कोशिश भी अलग अलग.दोनों बजा रहे हैं, अपनी अपनी ढपली और अपना अपना राग. इस अलग अलग की कोशिश को ही आधार बनाकर सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि विपक्ष ने इस बार भी अवध की शाम को श्री राजनाथ सिंह के नाम कर दिया है.

अब चलते हैं वाराणसी. कांग्रेस नेत्री श्रीमती प्रियंका गाँधी के मैदान में उतरने के साथ ही यहाँ यह माना जा रहा था कि वह वाराणसी में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दे सकती है. उन्होंने जब यह कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अनुमति दें तो वह इसके लिए तैयार हैं. इसके बाद से यहाँ के सियासी गलियारों में वाराणसी के रण को लेकर कल्पना की जाने लगी. लोग स्वतः कयास लगाने लगे कि वह संयुक्त विपक्ष की उम्मीदवार के रूप में आईं तो जीते हारे कोई, लेकिन मुकाबला जोरदार होगा.

इस मुकाबले की सम्भावना शुरू होने के दौरान ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा की राज्यसभा के पूर्व उपसभापति स्वर्गीय श्यामलाल यादव जी की बहू कांग्रेस नेत्री श्रीमती शालिनी यादव ने उनकी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है. श्रीमती शालनी यादव ने कहा कि जो अध्यक्ष का हुक्म होगा, वह पालन करेंगी. कुछ घण्टे बाद अध्यक्ष जी ने उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सपा, बसपा और रालोद के गठबन्धन का उम्मीदवार घोषित कर दिया. रही सही कसर पूरा कर दिया कांग्रेस अध्यक्ष दी ग्रेट श्री राहुल गाँधी ने. उन्होंने श्री अजय राय को वाराणसी से कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसी के साथ यहाँ सियासी जगत ने मान लिया कि वाराणसी में श्री नरेंद्र मोदी को वाकओवर.

इस वाकओवर के कयास का परिणाम श्री नरेन्द्र मोदी के 25 अप्रैल के रोड शो में भी नज़र आया. कहने के लिए तो यह रोड शो ही था लेकिन इसमें हो रही पुष्पवर्षा बोल रही थी कि यह वह विजय जुलूस है जो 23 मई की परिणाम घोषणा के बाद निकलना है.

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