जनादेश

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पर यह गमछा हमारा है !

चंचल 

बहुत पुरानी , पर जवानी के दिनों की तस्वीर है . बाएं से चलिए,चित्रांगद सिंह , आईएएस अधिकारी रहे हैं स्वास्थ्य सचिव रहे जब नेता राजनारायण जी 77 मे स्वास्थ्य मंत्री बने उस समय . हम सबके रिश्ते आपसे पारिवारिक रहे हैं . इनके बगल हम हैं , ठीक पीछे मलिक साहब हैं और सबसे दाएं राज बब्बर .गमछा हमारा है .गमछा पर जोर इसलिए दे रहा हूँ कि इसके पीछे एक कहानी है . मूल कहानी तो बगदाद की है - जुम्मन का पजामा . इसी तर्ज पर हमने गमछे को राज के साथ जोड़ दिया . पहले जुम्मन को सुन लीजिए फिर राज पर आता हूं.

जुम्मन मुल्ला नसीरुद्दीन के पड़ोसी थे पर उनकी शादी नही हुई थी . माली हालत बहुत खराब थी . किसी तरह जुगाड़ भिड़ा कर मुल्ला के दोस्तों ने शादी तो तय कर दी . लोंगो ने चंदा करके कपड़े दिए . मुल्ला नसीरुद्दीन ने जुम्मन को अपना पजामा दिया . बारात चली बहुत धूमधाम से . सामने एक गांव पड़ा . गांव के लोंगो ने पूछा भाई ये किसकी बरात है इतने धूम धाम से ? मुल्ला नसीरुद्दीन दूल्हे के साथ चल रहे थे चुनांचे वही जवाब देते - बरात फलां गांव से चली है , फलां गांव जा रही है ये हैं जुम्मन मिया दूल्हे औरयह पजामा मेरा है . जुम्मन को यह पजामा की बात नागवार लगी और उन्होंने मुल्ला को समझाया कि भाई ! सब तो ठीक है बोलो पर यह मत बोला करो कि यह पजामा मेरा है . अगले गांव में फिर वही सवाल . मुल्ला ने फिर बताया पर आखिर में यह बोले कि ये दूल्हा जुम्मन है और पजामा मेरा नही है . मुल्ला की बेहूदगी जुम्मन को बुरी लगी बोले - मुल्ला ! सब तो ठीक है पर तुम पजामे की बात ही मत किया करो . अगले गांव में फिर वही सवाल और जवाब दे रहे हैं मुल्ला नसीरूदीन . सब बताने के बाद अंत मे बोले कि - लेकिन पजामे के बारे में कोई बात नही . जुम्मन के सब्र का बांध टूट गया . वो घोड़ी से कूदे नीचे आये , पजामे का दाहिना पांव ऐसे खिंचे कि पजामा तार तार हो गया . दूल्हा जोर लगा कर पैदल भागा वापस घर की ओर . फटा पजामा सामने पड़ा . मुल्ला नसीरुद्दीन उस फटे पजामे को उठाये जार जार रोये जा रहे . बरातियों का नया प्रस्ताव बना की बरात का इस तरह लौटना बहुत तौहीन की बात होगी , क्यों न मुल्ला नसीरुद्दीन की ही शादी करा दी जाय . और इस तरह मुल्ला को एक अदद बीवी मिली .

इसी कहानी की तर्ज पर हमने मरहूम भाई लच्छू महाराज से कहा था -

- आज तो बहुत जम रहे हो राज .

राज तो मुस्कुरा कर रह गए थे , जवाब हमने दिया था - यह लिबास ' रेड एंड ह्वाइट ' ( एक सिगरेट हुआ करता था , राज ने पहला विज्ञापन उसी का किया था , वह तस्वीर बहुत दिनों तक टूंडला में राज के घर मे लगी रही थी ) के सौजन्य से आमद है . पर यह गमछा हमारा है . '

यह तस्वीर अभी मलिक जी ने भेजा है , क्यों ?

लाकडाउन की वजह से पता नही चल पा रहा है . लेकिन अपनी तनहाई में खुद को पीछे ढकेल ले जाना , खुद से बोलना बतियाना कुछ तो राहत देता ही है .

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