जनादेश

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जोकर ने बना दिया था चिंटू का भाग्य

वीर विनोद छाबड़ा

दिल बहुत दुखी है. कल इरफ़ान और आज ऋषि कपूर. कैंसर ने उन्हें हरा दिया.ऋषि की याद में एक छोटा सा संस्मरण.राजकपूर 'मेरा नाम जोकर' (1968) की तैयारी कर रहे थे. सोच रहे थे कि छोटा राजू किसे बनायें जिसमें उनकी छवि दिखती हो. डिनर की टेबुल के आस-पास पूरा परिवार बैठा था. अचानक उनका ध्यान मझले बेटे ऋषि उर्फ़ चिंटू पर गया. गोल-मटोल और नीली आंखें. चेहरे पर शरारत. उम्र चौदह साल. उनकी मां बताया करती थी कि बचपन में तू ऐसा ही था. यह ठीक रहेगा. उन्होंने पत्नी कृष्णा से पूछा - चिंटू को बना दें छोटा राजू? तुम्हें कोई ऐतराज़ तो नहीं?कृष्णा जी बोलीं - लो भला, मैं क्यों मना करने लगी. आप जो बेहतर समझें. बस इतना ध्यान रखें कि बेटे की पढ़ाई ख़राब न होने पाए.राज जी ने आश्वासन दिया - वो मुझ पर छोड़ दो. चिंटू के सीन वीकेंड और संडे को शूट होंगे.

लेकिन चिंटू को यह अच्छा नहीं लगा - नहीं, मैं पढ़ना चाहता हूं. फिल्म-विलम में मुझे काम करना अच्छा नहीं लगता.राज साहब ने उसे समझाया - जोकर के लिए मुझे तुझ जैसा ही लड़का चाहिए. तू मेरे बचपन का किरदार करेगा. जानते हो न कि जोकर मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है. इसके बाद तुम जितना चाहो पढ़ो. लंदन जाओ या अमेरिका. बैरिस्टर बनो या बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेटर, तुम्हारी मर्ज़ी.

ओके पापा जैसा आप चाहें - यह कह कर चिंटू भारी मन से अपने कमरे में चला गया. लेकिन चिंटू के मन में कुछ और ही था. वो तो यह सब ऊपरी मन से बोल रहा था. दरअसल, सब कुछ तो उसके मन-मुताबिक हो रहा था. मन ही मन तो लड्डू फूट रहे थे. पढ़ने से निजात मिलेगी. कपूर परिवार का हाई स्कूल पास नहीं करने रिकॉर्ड भी क़ायम रहेगा इसी बहाने.

चिंटू ख़ुशी के मारे बहुत देर तक नाचता रहा. फिर उसने कॉपी पर कुछ लिखना शुरू किया. वो कोई होम वर्क नहीं कर रहा था और न कहानी लिख रहा था. बल्कि तरह तरह के हस्ताक्षर बना रहा था. उसे यकीन था कि वो जोकर से स्टार बनने जा रहा है और ऑटोग्राफ़ के लिए उसे अच्छे हस्ताक्षर चाहिए. बाकी तो हिस्ट्री है. हालांकि 'मेरा नाम जोकर' बेहतरीन फिल्म होने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर धमाल नहीं मचा सकी. लेकिन चिंटू का काम बहुत सराहा गया. डेब्यू चाइल्ड आर्टिस्ट का नेशनल अवार्ड मिला था उसे.

पापा राजकपूर समझ गए कि बेटा बड़ा होकर बड़ा नाम करेगा. कुछ समय बाद राजकपूर ने चिंटू को 'बॉबी' (1972) में बतौर हीरो पेश किया. चिंटू न सिर्फ स्टार बन गया बल्कि 'बॉबी' की अपार सफलता ने राजकपूर के सिर पर चढ़ा लाखों का कर्ज उतार दिया. आरके फिल्म्स और स्टूडियो भी बिज़नेस में वापस आ गए. अब ये अलग त्रासदी है कि आरके स्टूडियो बिक गया.

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