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केरल से परहेज है तो सिक्किम का रास्ता पकड़िए !

गंगटोक से प्रभाकर मणि तिवारी

गंगटोक .कोराना की शुरुआत जिस चीन से हुई उसकी सीमा से सटे होने के बावजूद भारत के पर्वतीय राज्य सिक्किम में अब तक कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है. ऐसे में यह कहना ज्यादा सही होगा कि देश का छोटा-सा खूबसूरत पर्वतीय राज्य कोरोना वायरस से निपटने की दिशा में राह दिखा रहा है. हिमालय की गोद में बसा यह राज्य पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल, भूटान और चीन से घिरा है. राज्य सरकार ने मई से नंवबर तक नाथूला सीमा चौकी के जरिए चीन के साथ होने वाले सीमा व्यापार के अलावा इस रूट से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी स्थगित कर दी है. यह यात्रा जून से सितंबर के दौरान होती है.

पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण चीन से लगी नाथूला सीमा चौकी तो बहुत पहले ही सील कर दी गई थी. इसके अलावा सरकार ने महामारी से बचाव के लिए अक्तूबर तक पर्यटकों के राज्य में आने पर पाबंदी लगा दी है. इस तथ्य के बावजूद कि इस राज्य की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही आधारित है और पर्यटकों पर पाबंदी से इसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. लेकिन सरकार का कहना है कि लोगों की सुरक्षा पहले है, कमाई बाद में. राज्यपाल गंगा प्रसाद कहते हैं कि राज्य के सात लाख लोगों की सुरक्षा के लिए ही सरकार ने यह कड़ा फैसला किया है. अब केंद्र की ढील के बाद सरकार ने राज्य के प्रवासी लोगों को सिक्किम में प्रवेश करने से पहले पड़ोसी पश्चिम बंगाल में 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रहना अनिवार्य कर दिया है. मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग ने अपने एक वीडियो संदेश में कहा है, “देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे सिक्किम के लोगों को पहले बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित होटलों और गेस्ट हाउसों में बने क्वारंटीन केंद्रों में 14 दिन बिताने होंगे. उसके बाद ही उनको राज्य में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी.”


अभी जब पूरे देश में दूर-दूर तक लॉकडाउन की कोई चर्चा तक नहीं थी, सिक्किम ने बीते पांच मार्च को ही विदेशी पर्यटकों के राज्य में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी. उसके बाद 17 मार्च को घरेलू पर्यटकों पर भी रोक लगा दी गई औऱ सीमाएं सील कर दी गईं. सरकार ने 29 जनवरी से ही राज्य में पहुंचने वाले लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. उसके बाद अब तक छह लाख लोगों की जांच की जा चुकी है. इन ऐहतियाती उपायों का ही नतीजा है कि राज्य में 20 अप्रैल से ही लॉकडाउन में काफी हद तक ढील दे दी गई है और तमाम सरकारी दफ्तर खुल गए हैं. हालांकि बाहर निकलने वालों के लिए मास्क और मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु एप्प अनिवार्य कर दिया गया है. वाहन चालकों को भी परमिट उसी स्थिति में मिलेंगे जब उनके पास आरोग्य सेतु व मास्क हो और वे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करें.

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग बताते हैं, "जनवरी में चीन में कोरोना का संक्रमण फैलने औऱ इसके पड़ोसी नेपाल तक पहुंचने के बाद सिक्किम ने चीन से लगी नाथूला सीमा को फौरन सील कर दिया था. इसके साथ ही नेपाल से लगी खुली सीमाओं को भी बंद कर दिया गया. सिर्फ पश्चिम बंगाल से लगी दो सीमा चौकियों—रंग्पो और मल्ली को खुला रखा गया था. वहां से भी राज्य के लोगों को लौटने और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन की ही अनुमति दी गई थी. बाहर से आने वालों को जांच के बाद होम क्वारंटीन में भेज दिया गया था.” वह कहते हैं कि बीते साल मार्च में राज्य में 1.18 लाख पर्यटक आए थे. ऐसे में सीमाएं सील करने का फैसला आर्थिक तौर पर बेहद नुकसानदेह था. लेकिन बावजूद इसके सरकार ने यह फैसला करने में देरी नहीं लगाई.

वैसे, राज्य के लोग भी केंद्र की ओर से घोषित लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का सख्ती से पालन कर रहे थे. मुख्य सचिव एससी गुप्ता बताते हैं, राज्य के लोग 17 मार्च से ही घरों में रह रहे थे. अब तक तमाम नमूनों के नेगेटिव आने के बाद कहा जा सकता है कि कोरोना के खिलाफ सिक्किम की लड़ाई कामयाब रही है. वह बताते हैं कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले सिक्किम के लोगों की वापसी आसान नहीं होगी. उनको कड़ी जांच से गुजरना होगा. उससे पहले ऐसे तमाम लोगों को आरोग्य सेतु पर पंजीकरण करना होगा.

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