जनादेश

जब तक जिए शान से जिये चन्द्रशेखर असली समस्या तो बुद्धि है सादगी में मुस्कुराता चेहरा यानी चंद्रशेखर गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह गुजर जाना एक दरख्त का जोमैटो में चीन का निवेश रुका कोई क्यों बनती है आयुषी क्या समय पर हो जाएगा वैक्सीन का ट्रायल हरफनमौला पत्रकार की तलाश काफ़्का और वह बच्ची ! कोरोना ने चर्च भी बंद कराया सरकार अपनी जिम्मेदारियों से क्यों भाग रही है? वसूली का दबाव अलोकतांत्रिक विपक्षी दलों ने कहा ,राजधर्म का पालन हो पुर्तगाल ,गोवा और आजादी कब शुरू हुई बाबाओं की अंधविश्वास फ़ैक्ट्री कोरोना से बाल बाल बचे नीतीश आंदोलनकारी या अतिक्रमणकारी ओली के बाद प्रचंड की भी राह आसान नही खामोश हो गई सितारों को उंगली से नचाने वाली आवाज

सूना पड़ गया है पहाड़ !

अंबरीश कुमार 

बागेश्वर की घाटी में  किसानो का संकट बढ़ रहा है .लगातार बिगड़ते मौसम ने गेंहू की फसल चौपट कर दी है .अमूमन रोज ही बरसात हो जा रही है .बीच बीच में ओला भी पड़ रहा है .गेंहू की फसल आधी से ज्यादा खराब हो गई .यही हाल प्याज ,आलू ,मसूर आदि का भी है .गेंहू तो वैसे भी पहाड़ पर कम होता है .इधर सोमेश्वर से लेकर कौसानी के नीचे के कुछ मैदानी हिस्सों में जो होता है वह ही बर्बाद हो गया है .ज्यादा पानी और ओला पड़ने से प्याज भी ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं .इस बीच लाकडाउन ने स्थिति और खराब कर दी है .बहुत से लोग बाहर फंसे हुए हैं तो बहुत से जो किसी काम से यूपी दिल्ली गए थे वे भी फंस गए हैं .पहाड़ की कुल आबादी का करीब आधा हिस्सा प्रदेश से बाहर रहता है. कमाने खाने के लिए जो महाराष्ट ,गुजरात और दिल्ली यूपी गए थे उनमे ज्यादातर लौटना चाहते हैं .पर कैसे आएं .आज पहाड़ के एक राजनैतिक कार्यकर्त्ता और खेती किसानी करने वाले भुवन पाठक से बात हुई तो नैनीताल में होटल चलाने वाले आशुतोष जोशी से भी .गरुण का उदाहरण देते हुए भुवन पाठक ने कहा कि बाजार में ग्राहक आधा रह गया है .बिक्री शुरू में तो बढ़ी पर अब आधी से भी कम है .लोगों के पास खरीदने के लिए पैसा कम होता जा रहा है .

आशुतोष हल्द्वानी से नैनीताल अपने होटल जा रहे थे .स्टाफ का वेतन देने .कुछ से माफ़ी मांगने भी क्योंकि अब तीन चार महीने कोई उम्मीद तो है नहीं .लोन की क़िस्त का तकाजा जल्द बैंक शुरू कर देंगे .ऐसे में ज्यादा स्टाफ को कैसे वेतन देंगे .यह सिर्फ उन्ही की समस्या नहीं है .उतराखंड की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ज्यादा निर्भर रहती है .होटल रिसार्ट .रेस्तरां ,ढाबा और जीप टैक्सी वाले .सभी को सीजन का इन्तजार रहता है .पर सीजन तो शुरू होने के पहले ही खत्म होता नजर आ रहा है .होटल ,रिसार्ट ,और गाडियां खासकर टैक्सी आदि के लिए लोग लोन लेते हैं .तीन क़िस्त बकाया हो गई पर जून से तो बैंक वाले कहां मानेंगे .यह चिंता ज्यादातर लोन लेने वालों की है .

अप्रैल से जुलाई तक का सीजन तो चला गया पर आगे क्या होगा .कोरोना की वजह से सैलानी अब कब निकलेंगे और कितने निकलेंगे यह बड़ा सवाल है .फिर सरकार ने कोरोना को लेकर डिस्टेन्स और सेनेटाइज करने के नए नियम बनाए तो वह भी खर्च बढाने वाला होगा .साथ ही हर सैलानी शक की नजर से भी देखा जाता रहेगा .जब पहाड़ से बाहर गए पहाड़ के ही लोगों का फिलहाल कोई स्वागत नहीं कर रहा तो किसी सैलानी का क्या करेगा .दूसरे जो भी लोग बाहर से छोटा मोटा काम छोड़कर आएंगे उनका खर्च कैसे चलेगा .पाहस से वे बाहर गए ही थे काम करने के लिए अब बेरोजगार होकर लौटेंगे तो करेंगे क्या .जो आर्थिक रूप से संपन्न है उनकी बात अलग है .पहाड़ में निर्माण गतिविधियां भी ठप पड़ गई हैं .मजदूरों के लिए काम नहीं है .किसान को मौसम ने तबाह कर दिया है .भुवन पाठक ने कहा ,जितनी बड़ी संख्या में लोगों ने पहाड़ पर लौटने के लिए आवेदन किया है वह सरकार के लिए भी सरदर्द बन गया है .वे कैसे लाए जाएं .किस तरह उन्हें रखा जाए यह समझ नहीं आ रहा .

पहाड़ में फल का भी सीजन यही होता है तो शादी ब्याह का भी .शादी ब्याह में बैंड बाजा से लेकर जेनरेटर वाले कैटरिंग वाले होटल रेस्तरां सब की भूमिका होती है .कुछ दिन का रोजगार भी मिलता है .वह भी बंद हो गया .आडू खुबानी प्लम की शुरू में आने वाली प्रजाति अबतक निकल आती है .पर मौसम ने फल को नुकसान पहुंचाया तो लाकडाउन ने रही सही कसर भी तोड़ दी . फोटो साभार गूगल ट्रेवल ट्रेंगल 


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